ध्यान का ज्ञान : इस ज़मीं से आसमां तक मैं ही मैं हूँ, दूसरा कोई नहीं

मैं अहंकारी हूँ, तुम भी अहंकारी हो और वो भी… निरपवाद रूप से सभी अहंकारी हैं… ऐसा भी नहीं कि बहुत बड़े-बड़े अहंकार पाले हों… छोटे-छोटे, बहुत तुच्छ, टुच्चे से अहंकार पाले हुए हैं. क्या खूब लिखता हूँ मैं, क्या खूब दिखता हूँ मैं, कितनी ऐशो-आराम की ज़िन्दगी जुटाई है … Continue reading ध्यान का ज्ञान : इस ज़मीं से आसमां तक मैं ही मैं हूँ, दूसरा कोई नहीं