शरीर ने तुम्हें नहीं, तुमने शरीर को पकड़ा है : ओशो

उपनिषद के ऋषियों के मन में मनुष्य के शरीर की कोई भी निंदा नहीं है. मनुष्य के शरीर के प्रति बहुत सदभाव है, बहुत श्रद्धा भाव है, क्योंकि मनुष्य का शरीर वस्तुत: मंदिर है. उस परमात्मा का निवास जिसके भीतर है, उसकी निंदा तो कैसे की जा सकती है! परमात्मा जिसके भीतर बसा है, उस … Continue reading शरीर ने तुम्हें नहीं, तुमने शरीर को पकड़ा है : ओशो