मानो या ना मानो : वामांगी-उत्सव पुनर्जन्म एक प्रेमकथा

वामांगी, जिसका ज़िक्र पहले आता है उसके बाद आती है वह.. पैरों की ऊंगलियों के नाखून बढ़ाकर रखती है, लेकिन उस पर महावर नहीं होता, बाकी उसके महावर से रंगे पाँव जहाँ जहाँ पड़ते हैं रास्ता गुलाबी हो जाता है। पैरों में पायल नहीं बस काला धागा डाले रहती है, जैसे नदी के दुधिया पानी … Continue reading मानो या ना मानो : वामांगी-उत्सव पुनर्जन्म एक प्रेमकथा