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सहजन : सब जन की समस्या का निदान देता एक जादुई वृक्ष

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यूं तो इसे मुनगा कहते हैं लेकिन मुझे इसका सहजन नाम अधिक पसंद है. इसका संधि विच्छेद करें तो होता है सह+जन, यानी जो सब जन के साथ है. कहते हैं मृत शरीर को जीवित करने के अलावा यह सारे रोगों को दूर कर सकती है.

एक फली जो फलने फूलने से पहले ही अपनी पूरे अस्तित्व के साथ पोषण के लिए समर्पित है. छाल, पत्ती, फूल, फल ऐसा कोई हिस्सा नहीं जो मनुष्य शरीर के लिए लाभप्रद न हो.

आचार्य राजेश कपूर कहते हैं गौमाता इस धरती पर देवताओं की दूत हैं. वे अपना अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि आप गौमाता के कान में अपनी किसी भी समस्या के समाधान के लिए कह दीजिये फिर देखिये जादू. ऐसा ही जादू उनके साथ हुआ जब उन्होंने अपनी पुत्री के विवाह में आ रही समस्या गौमाता के कान में कही और उन्हें एक महीने के अन्दर ही न सिर्फ़ समाधान मिला बल्कि दामाद ऐसे मिले कि उन्हें लगता है ऐसा दामाद हर बेटी के पिता को मिलना चाहिए.

लेकिन इसमें मैं एक बात और जोड़ दूं कि ये आचार्य जी का खुद का निष्कपट और निश्छल सेवा भाव व मानव सेवा के प्रति समर्पित जीवन ही है जिसके बदले में उन्हें यह वरदान मिला वर्ना सिर्फ़ अपने स्वार्थ के लिए यदि आप गौमाता के कान में कुछ कहोगे तो वो आपको सींग ही मारेगी…

हालांकि यह जादू होता है इसकी मैं खुद साक्षी हूँ, अपने अनुभवों के आधार पर मैं यह कहूंगी कि सिर्फ़ गौमाता ही नहीं बल्कि कुछ वृक्ष भी हैं जिनके आगे आप निश्छल भाव से अपनी समस्या का समाधान मांगिये और वह अवश्य देंगे…

मेरे आँगन में ध्यान बाबा का लगाया हुआ आम का पेड़ है, उसे जब मैं बहुत गौर से देखती हूँ तो मुझे वह बहुत जीवंत लगता है, उस वृक्ष की चेतना मुझे वैसे ही अनुभव होती है जैसे किसी मनुष्य की होती है.

मैं अक्सर अपने आँगन के उस आम के वृक्ष से बात करती हूँ, घर की बातें साझा करती हूँ, बिलकुल वैसे ही जैसे घर के बुज़ुर्गों से आप अपनी बातें साझा करते हैं.

मैं छत पर जिस जगह ध्यान के लिए बैठती हूँ उसके ठीक सामने सहजन का वृक्ष है. कई बरसों से मैं लगातार उसे देख रही हूँ, कभी उस पर फली होती है, कभी सिर्फ़ फूल, कभी सूखकर पत्ते झड़ रहे होते हैं. मैंने उसके हर मौसम को बदलते देखा है और मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूँ जैसे मैं ध्यानमग्न होकर उसे देखती आई हूँ उतनी ही तटस्थता के साथ वो मुझे देख रहा है, मेरी आध्यात्मिक यात्रा का वह इकलौता साक्षी वृक्ष है जो किसी बुद्ध पुरुष की तरह ध्यानमग्न होकर मुझे मेरे निराशा के दिनों में ऊर्जा देता है.

सहजन जो सब जन के साथ तो है ही लेकिन मेरे साथ विशेष रूप से है. ऐसे ही आप अपने आसपास के किसी भी वृक्ष को अपना मित्र या गुरु बना लीजिये, उससे बातें कीजिये, उसे गले लगाइए. फिर देखिये आपके जीवन की समस्याएँ कैसे हल होती हैं.

यूं तो हर वृक्ष में चेतना होती है, लेकिन आम, पीपल, नीम, बरगद, तुलसी का पौधा ये कुछ ऐसे हैं जिन पर दैवीय शक्तियों की विशेष कृपा है.

पिछले लेख में आचार्य राजेश कपूर से मैंने सिर्फ़ आपका परिचय करवाया था, इस बार उनका वह वीडियो भी देखिये जिसमें वे बता रहे हैं कि आप किसी भी वृक्ष की ऊर्जा का परिक्षण कर सकते हैं कि वह आपके लिए सकारात्मक ऊर्जा दे रहा है या नकारात्मक.

कहते हैं भारत में ऐसी कई पुस्तकें और दस्तावेज उपलब्ध हैं जो बताते हैं कि कौन से वृक्ष किस प्रकार की हीलिंग करते हैं, लेकिन अब वे वृक्ष ही नहीं रह गए. या कुछ ऐसे वृक्ष हैं जिनके बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में आचार्य राजेश कपूर जैसे लोगों को प्रकृति चुनती है ऐसे रहस्यों को आमजन तक पहुंचाने के लिए. बिलकुल वैसे ही जैसे कहा जाता है कि प्राचीन काल में आयुर्वेद के ज्ञाताओं के पास आयुर्वेदिक पौधे स्वयं आकर अपने गुण उजागर कर देते थे.

कुछ ऐसा ही मेरे साथ हुआ जब पिछले वायरल इन्फेक्शन के बाद शरीर में कैल्शियम की एकदम से कमी हो गयी और हड्डी का एक एक जोड़ दर्द कर रहा था तब आचार्य राजेश कपूर के वीडियो मुझ तक जादुई रूप से पहुंचे. और उन्होंने अपने वीडियो जिस तरह से सहजन के गुण बताए. मैंने अपने उसी परिचित मित्र अर्थात सहजन के वृक्ष से कुछ पत्तियाँ माँगी और उसकी कभी सब्ज़ी बनाकर तो कभी ऐसे ही कच्ची चबाकर नियमित रूप से सेवन कर रही हूँ.

कहते हैं 100 ग्राम सहजन की पत्तियों में 5 गिलास दूध के बराबर कैल्शियम होता है. साथ ही एक नीबू की तुलना में इसमें 5 गुना ज़्यादा विटामिन सी पाया जाता है. इसकी पत्तियों में कैल्शियम और विटामिन सी के साथ ही प्रोटीन, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम और विटामिन-बी कॉम्पेक्स की भरपूर मात्रा होती है.

पेट की बीमारियों में, हैजा, दस्त, पेचिश, पीलिया और कोलाइटिस जैसे रोगों में भी सहजन की पत्तियों का रस पीना काफी असरकारक होता है.

बहुत ज़्यादा सर्दी होने पर इसकी पत्तियों और फली को पानी में उबालकर उस पानी की भाप लेने से बंद नाक खुल जाती है. साथ ही सीने की जकड़न कम होती है.

बवासीर जैसी बीमारियों को सहजन के सेवन से दबाया जा सकता है. इसका सेवन करते रहने से बवासीर और कब्जियत की समस्या नहीं होती. वहीं पेट की अन्य बीमारियों के लिए भी यह फायदेमंद है.

सहजन से पथरी में लाभ होता है, बच्चों के पेट के कीड़े, बड़ों के उच्च रक्तचाप में लाभ होता है. सहजन की पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा कम होता है.

मैं तो आजकल धनिया पत्ती के साथ सहजन की पत्तियां भी सब्ज़ी दाल में डालने लगी हूँ.
आप भी करके देखिये.

हमारी प्राचीन जीवन शैली आज भी उतनी ही जादुई है, बस आवश्यकता है उस जादू को पहचानने की.

अब तो दुनिया भर में Healing Forest नाम से जंगल के जंगल खड़े किये जा रहे हैं, जहाँ पर इस तरह के सकारात्मक ऊर्जा वाले वृक्ष लगाए गए हैं. कहते हैं वहां जाकर रहने पर एक महीने में ही आप का यौवन लौट आता है, यानी शरीर की आतंरिक रूप से इतनी मरम्मत हो जाती है.

एक हम ही हैं जो उनका अँधा अनुसरण करते हुए आधुनिक होने का अभिशाप भोग रहे हैं. अभी भी समय है, आचार्य राजेश कपूर जैसे लोग बार बार सचेत करने नहीं आते.

बात सहजन से शुरू की थी, समापन भी वहीं पर करूंगी, इसे सहजन शायद इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि यह एक ऐसा वृक्ष है जो बहुत सहजता से उग जाता है. इसके तने को आप किसी भी मिट्टी वाली भूमि पर पटक दीजिये. ये बहुत सरलता और सहजता से पनप जाता है.

ये जितना सहज होता है, उतना ही कोमल और गुणवान इसलिए इसे जादुई माना जाता है. सच भी तो है वास्तव में जादू तो वहीं घटित होता है जहां सहजता, सरलता और कोमलता का मिलन हो.

अगले लेख में मैं आचार्य राजेश कपूर की इस तस्वीर का रहस्य खोलूँगी कि वे इन बर्तनों के बीच बैठकर आखिर क्या कर रहे हैं…

– माँ जीवन शैफाली

आचार्य राजेश कपूर का वीडियो

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2 thoughts on “सहजन : सब जन की समस्या का निदान देता एक जादुई वृक्ष”

  1. ज्योति पंवार says:

    बहुत सुंदर शब्दों में विवेचना सहजता के साथ सहजन …आदर बुजुर्गों का

    1. Making India Desk says:

      आभार 🙂

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