कितनी फीकी थी मैं, सिन्दूरी हो जाऊं… ओ सैंया…

जिनके घर कॉलोनी के नहीं, मोहल्लों और गली के नामों से पहचाने जाते हैं वही जान सकते हैं मुम्बई की चाल में रहने वालों का इश्क. इसे पहली बार फिल्म ‘कथा’ में देखा था, पड़ोसी से शक्कर, चाय-पत्ती माँगने के बहाने मिलने जाना भी बहुत रोमांटिक लगता था. कॉलोनी में रहने वालों से हम पड़ोस … Continue reading कितनी फीकी थी मैं, सिन्दूरी हो जाऊं… ओ सैंया…