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अनोखा रिश्ता

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उन दोनों को देखकर कोई नहीं कह सकता था कि दोनों की उम्र में 8 साल का अंतर है और जिस तरह दोनों हमेशा साथ घूमते दिखाई देते थे, साथ फिल्म देखने जाते, साथ रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते, कोई अंदाज़ा नहीं लगा पाता था कि आखिर दोनों में रिश्ता क्या है.

शिक्षा जब कॉलेज जाने लगी थी तो लौटते समय वो हमेशा उसके कॉलेज के बाहर खड़ा मिलता. अपने कॉलेज के सारे दोस्तों को अलविदा करके उसके कंधे का सहारा लेकर शिक्षा उसकी बाइक पर सवार हो जाती और फिर दोनों चले जाते . लोग उनको तब तक देखते रहते जब तक दोनों सबकी नज़रों से दूर नहीं निकल जाते.

स्कूल में तो पढ़ाई में हमेशा से अव्वल रहती, लेकिन कॉलेज में आते आते शिक्षा हॉकी के खेल में राष्ट्रीय स्तर पर अपना लोहा मनवा चुकी थी. यही नहीं फिर चाहे इंटर-कॉलेज वाद-विवाद प्रतियोगिता हो या फिर विश्वविद्यालय की तरफ से किसी सामाजिक कार्य का प्रतिनिधित्व करना, सबको पता होता है कि शिक्षा जा रही है तो ट्रॉफी उनके ही कॉलेज को मिलेगी.

मिलनसार और सबकी मदद के लिए एक पैर पर तैयार शिक्षा कॉलेज में ही नहीं अपने हॉस्टल में भी सबकी चहेती थी.

बस एक बात जो सबकी आँखों में सवाल बनकर उभरती थी लेकिन किसी की पूछने की हिम्मत नहीं होती थी वो ये कि वो लड़का कौन है जिसके साथ शिक्षा हमेशा दिखाई देती थी. कोई कर भी कैसे सकता था ये पूछने की हिम्मत, क्योंकि शिक्षा के चेहरे पर तेज, आत्मविश्वास और किसी को उसके व्यक्तिगत जीवन में हस्तक्षेप न करने देने का भाव इतना स्पष्ट दिखाई देता था कि कोई चाहकर भी उससे उस लड़के के बारे में नहीं पूछ सकता था.

एक बार शिक्षा के कॉलेज में ही इंटर-कॉलेज वाद-विवाद प्रतियोगिता चल रही थी. शिक्षा स्टेज पर आकर खड़ी ही हुई थी कि अचानक उसको चक्कर आया और वो स्टेज से गिर पड़ी. सिर पर काफी गहरी चोट लगी थी. अभिमन्यु जो दूसरे कॉलेज से प्रतियोगिता में भाग लेने आया था वह भी वहीं स्टेज पर खड़ा था, दौड़कर आता है, और कॉलेज के कुछ और लोगों की मदद से उसे अस्पताल ले जाता है.

अस्पताल में शिक्षा को प्राथमिक उपचार के बाद जब होश आता है तब अभिमन्यु उससे चक्कर आने का कारण पूछता है तो शिक्षा बताती है कि उसे हीमोग्लोबीन की कमी है इसलिए उसे अक्सर चक्कर आ जाते हैं. लेकिन उसका इलाज वह करवा रही है.

किसी रिश्तेदार के बारे में पूछने पर शिक्षा सिर्फ इतना कहती है कि मुझे जितनी जल्दी हो सके फिर से कॉलेज पहुँचा दिया जाए, कोई उसका इंतज़ार कर रहा होगा. अभिमन्यु उसे कॉलेज तक पहुँचने में मदद करता है. जब शिक्षा कॉलेज पहुँचती है तो वो लड़का उसे बाहर ही खड़ा मिलता है. शिक्षा के सर पर पट्टी बंधी देखकर वो दौड़कर उसके पास आता है. शिक्षा उससे गले मिलकर रो देती है. फिर उसकी बाइक पर बैठकर वो चली जाती है.

चोट ठीक होने पर जब शिक्षा कॉलेज आना शुरू करती है तो अभिमन्यु उससे मिलने आता है और उसके हालचाल पूछता है. धीरे-धीरे मुलाकात बढ़ती है, दोनों का मिलना जुलना और दोस्ती भी. लेकिन शिक्षा कभी भी शाम को अभिमन्यु के साथ कहीं नहीं जाती, बस कॉलेज के बाहर वो लड़का आता और शिक्षा उसके साथ बैठकर निकल जाती.

अभिमन्यु के साथ शिक्षा की दोस्ती गहरी होती जा रही थी. लेकिन कई बार पूछने पर भी शिक्षा ने अपने परिवार के बारे में अभिमन्यु को कुछ नहीं बताया था. सबकी तरह अभिमन्यु के मन में भी उस लड़के के बारे में जानने की जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी, लेकिन वो शिक्षा के स्वभाव से काफी परिचित हो चुका था, वो जानता था कि समय आने पर शिक्षा ख़ुद उसके बारे में बता देगी.

समय के साथ साथ उनकी दोस्ती गहरा रही थी लेकिन कॉलेज खत्म होने का समय भी आ चुका था. अभिमन्यु का ये साल कॉलेज का आखिरी साल था और नौकरी उसे किसी और शहर में मिली.

अभिमन्यु के जाने का समय आ गया था शिक्षा और अभिमन्यु स्टेशन पर खड़े थे. अभिमन्यु के चेहरे से साफ नज़र आ रहा था कि वह शिक्षा को बहुत कुछ कहना चाह रहा है लेकिन शिक्षा की नज़रें बार बार किसी और को तलाश रही थी जैसे उसे किसी का इंतज़ार हो. अभिमन्यु कुछ कहता उसके पहले ही वो बाइकवाला लड़का आता है और उन दोनों के पास खड़ा हो जाता है. शिक्षा अभिमन्यु से उसका परिचय करवाती है.

“अभि, इनसे मिलो, विजय भैया, मेरे बड़े भाई हैं. अभिमन्यु कुछ कहे उसके पहले ही विजय उससे पूछता है, मेरी बहन से शादी करोगे? शिक्षा मुस्कुराते हुए अभिमन्यु की तरफ देखती है और अभिमन्यु चकित होकर विजय की तरफ कि विजय उसके दिल की बात कैसे जानता है जबकि उसने तो अभी तक शिक्षा से भी ये बात नहीं कही थी.

विजय उसके कंधे पर हाथ रखकर कहता है कि जिस बहन को अपने हाथों से बड़ा किया, जिसके चेहरे के भाव से उसके मन की बात समझता है, क्या उसे इतना भी पता नहीं होगा कि उसकी बहन को किसी से प्यार हो गया है.

ट्रेन निकलने में समय था, सो शिक्षा ने आज पहली बार अपने भाई के बारे में अभिमन्यु को बताना शुरू किया कि जब वह 3 साल की थी जब एक दुर्घटना की वजह से माता पिता का साया उसके सर से उठ गया था. उसके बाद जब भी आँख खोली अपने बड़े भाई का मुस्कुराता हुआ चेहरा सामने पाया. शिक्षा बताती है कि आज तक उसे माता-पिता की कमी का एहसास नहीं हुआ, तो उसका पूरा श्रेय विजय को जाता है, जिसने सिर्फ माता-पिता और भाई की ही नहीं हर रिश्ते की पूर्ति की है.

माता-पिता के देहांत के बाद वो दोनों चाचा के घर रहते थे. लेकिन चाचा की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि दोनों की पढ़ाई का खर्च उठा सके. सो शिक्षा का स्कूल जाना बंद न करना पड़े इसलिए विजय ने अपनी पढ़ाई रुकवा दी. सिर्फ स्कूल की पढ़ाई ही नहीं जीवन के हर इम्तिहान में शिक्षा अव्वल रही तो उसके पीछे कारण विजय ही है, जिसने शिक्षा को जीवन के हर पड़ाव पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और हर मुसीबत में उसके चारों ओर कवच बनकर खड़ा रहा.

चारों ओर से सुरक्षा का भाव होने पर भी शिक्षा में निर्भरता का नहीं बल्कि स्वावलंबन का भाव विकसित करने में भी विजय पूरी तरह से सफल हुआ था.

और यही सबसे बड़ा कारण था कि विजय कभी भी शिक्षा के व्यक्तिगत जीवन में दखल नहीं देता था. शिक्षा के स्कूल, कॉलेज के दोस्तों से कभी नहीं मिलता था, ना ही उनको ये एहसास होने देता था कि शिक्षा के पास कोई बॉडी गार्ड नुमा भाई भी है, ताकि कोई उससे किसी तरह का दुर्व्यवहार या चालाकी न करें.

वो चाहता था कि जीवन के सारे उतार चढ़ाव, जीवन की सारी सुंदरता और कुरुपता को शिक्षा ख़ुद देखे, समझे और अकेले ही उन सबसे उबर कर अच्छे बुरे में फर्क करें. जीवन के सारे पाठ पढ़ाने का अपना कर्तव्य निभाने के बाद शिक्षा को इम्तिहान की घड़ी में अपने बलबूते पर खड़ा होने का विजय पूरा मौका देता था. और शिक्षा ने वो मौका चूका भी नहीं और हर क्षेत्र में, हर पड़ाव, हर इम्तिहान में अपने भाई का सिना गर्व से चौड़ा किया.

शिक्षा के लिए विजय केवल भाई ही नहीं बल्कि गुरू, पिता और सबसे अच्छा दोस्त है.

अभिमन्यु ये बात तो जानता था कि एक दिन ख़ुद शिक्षा विजय से मिलवाएगी, लेकिन ये नहीं जानता था कि ये मुलाकात इस तरह से होगी जब उसे शहर छोड़कर जाना पड़ रहा होगा. फिर भी आँखों में शिक्षा के लिए ढेर सारा प्यार, विजय के लिए सम्मान, और दिल में उन दोनों के रिश्ते के लिए गर्व की भावना लिए वो उन दोनों से वादा करता है कि जिस शहर में नौकरी के लिए जा रहा है, वहीं पर अपनी गृहस्थी की शुरुआत करेगा. उसके लिए उसे थोड़ा समय चाहिए, तब तक शिक्षा की पढ़ाई भी पूरी हो जाएगी और वो उसे आकर ले जाएगा.

ट्रेन निकलने का समय हो जाता है, अभिमन्यु अपनी सीट पर आकर बैठ जाता है, और सोचता है कि उसने अपने जीवन में कभी भी भाई और बहन का इतना प्यारा रिश्ता नहीं देखा. एक बड़ा भाई जो अपनी छोटी बहन को अपने बड़े होने का एहसास तो दिलाता है लेकिन क्या उतना ही बड़प्पन भी दिखा पाता है जो विजय ने दिखाया है. आज विजय शिक्षा की तरफ अभिमन्यु की नज़रों में भी बहुत ऊपर उठ चुका था. ट्रेन चल रही थी और अभिमन्यु उन दोनों भाई बहन को स्टेशन पर एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए देख रहा था. और लोगों की प्रश्न भरी निगाहों को देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहा था जो अक्सर यही खोजती है कि आखिर इन दोनों के बीच रिश्ता क्या है.

– माँ जीवन शैफाली

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