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शुभ मंगलम सावधान : दूसरी शादी

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2008, 10 वर्ष पहले।
जबलपुर। (संस्मरण)

दिल्ली से लौट मैंने नई नई प्रैक्टिस शुरू की थी।
मरीज़ बहुत कम आते थे। जो आते थे वे सभी बेहद ग़रीब, ग्रामीण परिवेश के। मध्यम एवं उच्च वर्ग या तो मुझसे अनभिज्ञ था या मेरे छोटे से क्लिनिक और मुझे उन्होंने स्वीकारा नहीं था।

ऐसे में एक मध्यम वर्गीय जोड़ा सुंदर पत्नी एवं हैंडसम पंजाबी पति अपने 2 माह के बच्चे को लेकर मेरे पास आने लगे। और उनसे फिऱ एक लंबा नाता बना रहा। पति हरमिंदर और उनकी लव मैरिज थी। हरमिंदर तो मॉडल सा लगता था।
हमेशा दोनों साथ ही आते। खुशमिज़ाज़ और मेra बहुत सम्मान करते।

दोनों लगभग 3 वर्ष तक आते रहे। फिर मुझे लगभग 2 वर्ष तक नहीं दिखे । मुझे लगा बच्चा स्वस्थ्य होगा। या वे जगह बदल चुके होंगे।

किन्तु एक दिन बच्चे की मां अकेले ही बलबीर ( बच्चे का परिवर्तित नाम ) को लेकर मेरे पास आई।
आते ही मैंने पूछा अरे इतने दिनों बाद कैसे हो आप?

“जी सर सब ठीक है।” हंसते हुए बोली। लेकिन चेहरा वैसा खुशमिज़ाज़ नहीं दिखा।

हरमिंदर (परिवर्तित नाम) जी कैसे हैं? कहाँ हैं।

कुछ देर की खामोशी के साथ वो बोली “सर इसे 4 दिन से बुखार आ रहा है।”

मुझे लगा मेरे प्रश्न को जानबूझ कर उन्होंने नज़रअंदाज़ किया है।
इस बात का सम्मान करते हुए मैं बच्चे को चेक कर ट्रीटमेंट लिखने लगा।

“सर, हरमिंदर और मैं अलग हो गए हैं।”

मेरा पेन रुक गया था।

“ओह, लेकिन क्यों”

“सर, वो बहुत गुस्सा होते थे मुझ पर, बात बात पर चिल्लाते थे, काम करना भी बंद सा कर दिया था। मैंने काम शुरू किया तो शक करते थे।”

मैं अपने सभी भावों को संयत रख एक प्रोफेशनल की तरह बस दवाएं लिखने लगा था।

यह एक पक्ष था जो मैं सुन रहा था। और न ही मुझसे उन्होंने कोई सलाह मांगी थी।

“ये ट्रीटमेंट लीजिये और 3 दिन बाद दिखा लेना फिर से। सिंपल वायरल फीवर लग रहा है।”

लेकिन जब वे उठने लगीं तब बिन मांगी सलाह न देने के अपने सिद्धांत पर मैंने नियंत्रण खो, इतना कह ही दिया..

“एक बार आप दोनों को मुझे तो बताना था, या किसी काउंसेलर से मिलना था। खासकर बच्चे के लिए सोचिये।”

“सर अब तो जो होना था हो गया, कोर्ट से भी मामला निपटने ही वाला है। म्यूच्यूअल डिवोर्स मिल जाएगा।”,

तीन दिन बाद ही हरमिंदर क्लिनिक पर आ गया।

” सर, बच्चा आया था क्या उसकी मम्मी संग”

उसे मैंने सामने बैठाया। लेकिन वह बेहद कमज़ोर लग रहा था। हट्टा कट्टा, लंबा और गोरे रंग का वो पंजाबी युवक दो वर्ष बाद पहचानना भी मुश्किल था।

बेहद कमज़ोर, रंग उड़ा हुआ।

“हां, आई थीं वो बच्चे को लेकर।” लेकिन
“आपको क्या हुआ है, कमज़ोर लग रहे हो।”

सर मेरी किडनी ख़राब हो गई हैं। डायलिसिस पर हूँ।
बच्चा कैसा है सर और क्या हुआ है उसे?

” बच्चा ठीक है। मामूली बुखार है।”

“आप दोनों के बीच क्या हुआ। इतने अच्छे लगते थे दोनों साथ में।”

“सर मेरी ही गलती है, मैं पिछले 2 साल से उससे बहुत बुरा बर्ताव कर रहा था। चिल्लाता था, एक बार तो हाथ भी उठा दिया तब वो चली गयी।”

शादी कितने साल की थी?

“सर 6 साल हो गए थे।”

कब से आप ऐसा करने लगे?

“सर 2 एक साल से ही पता नहीं क्यों गुस्सा आने लगा इतना।”

किडनी खराब कैसे हुईं और कब पता चला।?

“सर शायद bp बहुत दिन से हाई था, डॉक्टर ने कहा।
मुझे पता नहीं चला। एक बार स्टोन और इंफेवशन भी हुआ था।”

“आप हाई बीपी और यूरिया बढ़ने से तो चिड़चिड़े नहीं हो रहे थे कहीं?”

“सर उस समय तो कोई जांच कराई ही नहीं। क्या पता?”

ये तो 7 माह पहले जब सांस में तकलीफ हुई तब पता चला creatine 8 है।

और वो कब अलग हुईं?

“सर एक साल पहले।”

ओह…

क्या उन्हें पता है?

“नहीं सर, अब क्या फायदा बताने से। वो अपनी ज़िंदगी अच्छे से जिये। बस मेरा बच्चा ठीक रहे। वैसे भी शायद वो दूसरी शादी कर रही है, साथ होती तब भी कौन सा उसे मेरी परवाह होती।”

डॉक्टर ने आपकी किडनी का क्या कहा है?

“सर ट्रांसप्लांट को बोला है। तब तक डायलिसिस।”

हरमिंदर, पूर्णतः संयत था। निडर, दृढ़, अपने इन हालातों के बावज़ूद।

ट्रांसप्लांट हो पायेगा? मैंने पूछा था।

“सर दो भाई हैं बस। एक तो पहले ही अलग हो गया है उससे पटती नहीं। माँ बहुत बूढी हैं। और छोटा भाई देना चाहता है किडनी लेकिन भाभी ने रोना गाना मचा दिया है। इसलिए अब वो भी नहीं दे पाएगा।”

यूँ उस लंबे चौड़े हैंडसम पंजाबी का जीवन मैंने अपने सामने बदलते देखा था।

कुछ देर बात कर वो चला गया था।

वो तीन दिन बाद आई थी, बच्चा ठीक था।

“सर एक बात पूछूँ?” चिरपरिचित चहचहाट से उसने कहा था।

जी, पूछिये “मैं दूसरी शादी कर लूंगी तो बच्चे के दिमाग पर बुरा असर तो नहीं पड़ेगा?”

इस बात का उत्तर मैं छोटा और ज़ल्दी देना चाहता था।

“यह बहुत सी बातों पर निर्भर करेगा। पहला तो जिससे आप शादी करेंगे, उसका बर्ताव इसके प्रति कैसा है। क्योंकि बच्चा उसे महीनों या बरसों तक पिता के रूप में नहीं देख पायेगा।”

हरमिंदर, की कोई ख़बर है, आपको?

“नहीं, बस किसी ने बताया बहुत दारू पी पी कर कमज़ोर हो गए हैं।”

“नहीं, उसकी दोनों किडनी ख़राब हैं। पिछले 6 माह से वो हफ्ते में एक से दो बार डायलिसिस करवाता है। और जब आप दोनों साथ थे तब भी मुझे लगता है उसके हाई बीपी और शारीरिक बदलाव से वह चिड़चिड़ा हो गया था और काम नहीं कर रहा था।”

यह सुन, उसका चेहरा अवाक था।

उस बीते समय की विभिन्न घटनाओं का तीव्र फ्लैश बैक मुझे उसके चेहरे पर रंग बदलते दिखा। जैसे कोई प्रोजेक्टर, नए सिरे से, नई व्याख्या से उन्हीं बन चुके सीन्स को उसे फिर एक बार दिखा रहा हो।

ज़ल्दी से बच्चा और फ़ाइल ले वह बाहर चली गयी। भीतरी मनोभाव मुझ तक न पंहुचें शायद इसलिए।

“मैं अपनी कुर्सी पर पीछे धंस गया था। सोचते कि क्या मैंने व्यर्थ ये सब कह दिया। वो ख़ुश थी कितना। दूसरी शादी करती, मेरा क्या जा रहा था।”

तीन माह फिर बीत गए थे।

वे दोनों बच्चे के साथ एक बार फिर मेरे सामने थे।

उसी चिरपरिचित चहचहाट से वो बोली..

“सर इनका रीनल ट्रांसप्लांट 15 दिन बाद कराने जा रहे हैं।”

अरे वाह, डोनर मिल गया?…

“जी, सर मेरी सब जांचें हो गई हैं।”

हरमिंदर अब बोला “जी सर ये किडनी दे रही है मुझे?”

हँस कर चिढाते हुए बोला “दूसरी शादी कर रही है मुझसे।”

मैं दोनों को मुस्कुराते देख रहा था।

मनुष्य के कितने व्यवहार हैं…

– डॉ अव्यक्त अग्रवाल

एक विवाह ऐसा भी

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