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प्राथमिकता खुद तय करें : संस्कारी बच्चा या स्मार्टफोन वाला स्मार्ट बच्चा

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आजकल अभिभावकों को अक्सर ये शिकायत करते हुए देखती हूँ कि उनका बच्चा स्मार्ट फ़ोन बहुत इस्तेमाल करता है और लगातार लतखोरी की तरफ बढ़ रहा है. तो आइये, जानते हैं बच्चों में स्मार्टफोन की इस लतखोरी के कारण और फिर उसका निवारण…..

1. आजकल मैंने अक्सर देखा है कि माँ बाप एक छोटे से छह महीने से लेकर एक साल तक के बच्चे को, बहलाकर खाना खिलाने या फिर रोते हुए बच्चे को चुप कराने के लिए उसके हाथ में झट से मोबाइल थमा देते हैं. कई बार जब अभिभावक किसी काम में व्यस्त होते हैं, तो बच्चे और बच्चे के लगातार सवालों से बचने के लिए, उसको व्यस्त रखने के लिए अपना मोबाइल दे देते हैं. और यहीं से स्वयं ही लतखोरी का बीज डाल देते हैं.

इसीलिए सर्वप्रथम तो यही ज़रूरी है कि बच्चों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को आसान और सुलभ करने के लिए आप स्वयं अपने हाथों से बच्चे के हाथ में मोबाइल कतई ना थमायें. नहीं तो देर सबेर आपको इसके दुष्परिणामों का सामना करना ही पड़ेगा. इसके बजाय बच्चों को अपना वक़्त और प्यार दें.

साथ ही लगे हाथ, ये भी आप सब को बताती चलूं कि विश्वपटल पर सॉफ्टवेर टेक्नोलॉजी के सबसे बड़े जनक बिल गेट्स और स्टीव जॉब्स ने इन्टरनेट इस्तेमाल के दूरगामी दुष्परिणामों को ध्यान में रखते हुए, अपने बच्चों को बारह साल की उम्र तक स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं कराया था.

2. आजकल बढ़ते बच्चों को पढ़ाई में मदद करने के नाम पर और बाहर निकलने पर उनकी सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत आसानी से मोबाइल मुहैया करा दिया जाता है.

अगर आपको अपने बाहर जाते हुए बच्चे को मोबाइल देना आवश्यक लगता है, तो फिर उसे स्मार्टफोन की बनिस्बत एक साधारण की पैडवाला मोबाइल मुहैया करवाइये, जिससे वो लगातार आपके संपर्क में रह सके.

3. ध्यान रहे, बच्चों की ये उम्र बेहद कच्ची होती है और इसी करियर बनाने की उम्र में ही उनका पैर फिसलने का खतरा भी सर्वाधिक रहता है. अगर उनके पास मोबाइल सुलभ ही उपलब्ध होगा तो इन्टरनेट के मायाजाल में फंसकर उनका गलत दिशा में जाने और दिग्भ्रमित होने की संभावना अत्यधिक प्रबल हो जाती है.

अगर पढ़ाई की दृष्टि से ज़रूरी हो तो आप घर में ही इंटरनेट कनेक्शन लगवाकर, उनको एक डेस्कटॉप उपलब्ध करा दें. साथ ही ये भी ध्यान दीजिए कि डेस्कटॉप बंद कमरे में ना होकर, घर के एक ऐसे कमरे/कोने में हो जहां आप बच्चे की गतिविधि पर नज़र रख सकें.

4. वैज्ञानिक शोधों में ये पाया गया है कि जो बच्चे और युवा इन्टरनेट/फेसबुक का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उन बच्चों की स्मरणशक्ति और पढ़ाई में एकाग्रता अत्यधिक कम हो जाती है, और ऐसे बच्चे पढ़ाई में पिछड़ते जाते हैं. साथ ही साथ ऐसे बच्चे स्वभाव से चिड़चिड़े, असामाजिक और ज़्यादा आक्रामक भी हो जाते हैं. स्मार्टफोन को बच्चे एक स्टेटस सिंबल के रूप में भी देखने लगते हैं और स्वयमेव ही उनमें प्रतिद्वंदिता की भावना भी प्रबल होती है.

वैसे भी ताज़ा सर्वे के अनुसार 241 करोड़ युवा (18-24आयु वर्ग) के फेसबुक यूजर्स के साथ, भारत विश्व में सबसे ज्यादा फेसबुक उपयोग करनेवाला देश बन गया है. फेसबुक/इन्टरनेट के अत्याधिक उपयोग/दुरूपयोग/लतखोरी के दुष्परिणाम देर सबेर हमारे बच्चों और उनके अभिभावकों को भुगतने ही पड़ेंगे.

5. बहुत ज़रूरी है कि इन सारी चीजों को अमल में लाने के साथ ही साथ, सर्वप्रथम स्वयं अभिभावक ही स्मार्टफोन का सीमित और सिर्फ ज़रुरत के कामों के लिए इस्तेमाल करें, विशेषकर बच्चों की उपस्थिति में. ध्यान रहे कि बच्चों की सबसे पहली पाठशाला घर ही होती है और बच्चे सबसे ज़्यादा माता पिता का ही अनुसरण करते हैं.

6. अगर बच्चों को आप स्मार्टफोन की लतखोरी से दूर रखना चाहते हैं, तो बहुत ज़्यादा ज़रूरी है कि आप उन्हें संगी साथियों के साथ बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें. कभी कभी स्वयं ही बच्चों के साथ खेलकर बच्चा बनेंगे, तो उन्हें बहुत ख़ुशी होगी.

घर में भी उन्हें व्यस्त रखने के लिए उन्हें प्रेरक कहानी की किताबें और महापुरुषों की जीवनी भी उपलब्ध करायें. उन्हें स्वयं अपना काम करने और घर के कामों को करने के लिए प्रोत्साहित करें. साथ ही समय व्यतीत करने की दृष्टि से उन्हें कुछ बुद्धिमतापूर्ण इंडोर गेम्स भी उपलब्ध कराएं.

7. बच्चों को डांटने डपटने और ज़ोर ज़बरदस्ती करने की बजाय, उन्हें साथ में बैठकर प्यार से समझाएं और स्वयं भी उनके साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय व्यतीत करने की कोशिश करें.

मुझे उम्मीद है कि एक ज़िम्मेदार अभिभावक के तौर पर इन छोटी छोटी परंतु महत्वपूर्ण टिप्स को ध्यान में रखकर हम बच्चों को इस लतखोरी से दूर भी रख पाएंगे और बच्चों को स्वर्णिम भविष्य की तरफ भी अग्रसर कर पाएंगे.

– श्रुति अग्रवाल

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