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मोशन से इमोशन तक : पेट साफ होगा तभी तो वज़न के साथ इंसाफ़ होगा

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पिछले कई दिनों से डॉ विपिन गुप्ता के सेहतवन के वीडियोज़ देख रही हूँ. एक-एक बात बहुत गौर करने लायक होती है. मोशन से इमोशन तक के अपने वीडियो में बहुत अच्छी जानकारी दी है.

चूंकि आपके शरीर का ही नहीं आपकी चेतना का सम्बन्ध भी आपके पेट से होता है इसलिए किसी भी तरह की परेशानी आप झेल रहे हैं तो उसका सीधा सम्बन्ध आपके खान पान में गड़बड़ के कारण है.

जितना अधिक हो सके ऐसी सब्ज़ियाँ खाएं जो कच्ची खाई जा सकती हो, सलाद खाना इसलिए भी फायदेमंद है. इससे दो फायदे हैं – एक तो पेट को जितना अधिक फाइबर मिलेगा पेट उतनी जल्दी साफ़ होगा, दूसरा आपके दांतों की सफाई भी होती है.

और पेट जितना अधिक साफ़ रहेगा शरीर में उतनी अधिक स्फूर्ति बनी रहेगी. पेट में पड़ा मल न सिर्फ शरीर बल्कि आत्मा पर भी बुरा प्रभाव डालता है.

डॉ विपिन गुप्ता कहते हैं जिस कमोड व्यवस्था के दुष्परिणाम समझने में अंग्रेज़ों को दो सौ साल लग गए और वो अब उसके लिए विकल्प खोज रहे हैं, उस व्यवस्था को हम भारतीय लोग अपना कर हमारी उकडू बैठकर शौच करने की व्यवस्था को पिछड़ा मानकर अपने ही शरीर के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.

उकडू बैठने के फायदे

1. वास्तव में मल निष्कासन के लिए जो लॉक बना है वो उकडू बैठने से पूरी तरह खुल जाता है, लेकिन कमोड पर बैठकर शौच करने से वो आधा ही खुल पता है, जिसकी वजह से पेट पूरी तरह साफ़ नहीं हो पाता. पेट साफ़ न होना ही सारी बीमारियों की जड़ है. मानसिक तनाव, सर दर्द, चिड़चिड़ापन, सबकुछ इसीसे सम्बंधित है. और यही सब चीज़ें अलग अलग बीमारियों के लक्षण के रूप में उभरते हैं. और फिर हम मूल समस्या का इलाज करने की बजाय उन बीमारियों को ठीक करने में ही पूरा जीवन निकाल देते हैं.

2. सिर्फ शौच करते समय ही नहीं, बल्कि बाकी समय भी जहाँ तक हो सके उकडू बैठकर ही काम करना चाहिए. हमारे नए मोड्यूलर किचन, सफाई के लिए मिलने वाली नई नई झाडू जिससे आपको झुकना न पड़े, ये सब आधुनिक जीवन शैली के नुकसान है.

हम पुराने ज़माने की तरह ज़मीन पर चूल्हा बनाकर खाना तो नहीं बना सकते लेकिन कम से कम झाडू उकडू बैठकर लगाना चाहिए. जिससे घुटनों और जाँघों को अधिक से अधिक व्यायाम मिलता है.

आप यदि ज़मीन पर अपनी दोनों हथेलियाँ टिकाए बिना आराम से उठ सकते हैं, मतलब आपकी जाँघों ने अभी आपके उठने बैठने पर नियंत्रण नहीं पाया है. आपका उस पर नियंत्रण बरकरार है.

मैं यह नहीं कहती आप हर जगह उकडू बैठ जाइए. घर के बाहर आप अपना स्टेटस और स्टाइल बनाकर रखिये लेकिन घर में उकडू बैठकर काम करने में कैसी शर्म.

3. जैसा कि मैं हमेशा कहती हूँ जब तक मैं खुद उन नियमों का पालन कर उसका लाभ न उठाऊँ, तब तक मैं सलाह नहीं देती. चूंकि मेरा काम दिन भर कम्प्युटर के सामने कुर्सी पर बैठकर करने का होता है इसलिए मैं दिन में कई बार कुर्सी पर उकडू बैठकर ही काम करने लगती हूँ. अक्सर खाना भी मैं उकडू बैठकर खाती हूँ.. इससे पेट पर दबाव पड़ता है और आप अतिरिक्त खाने से बचते हैं. एक बार आप भी प्रयास कीजिये, एक दो दिन की झिझक के बाद आपको खुद को बहुत आरामदायक और स्फूर्तिदायक लगेगा.

4. हर बार की तरह बातें सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रखूँगी. इसका आध्यात्मिक महत्व भी है. आपने देवरहा बाबा की तस्वीरें देखी होंगी. उन्हें आपने हमेशा उकडू बैठे ही देखा होगा. उकडू बैठने से आपका मूलाधार चक्र भी प्रभावित होता है.

मुझे कई लोग कहते हैं, आपने वज़न क्यों कम कर लिया आप पहले अधिक सुन्दर लगती थी. लेकिन सिर्फ मैं जानती हूँ, शरीर के अतिरिक्त मांस से चेतना भी मांसाहारी सी हो जाती है… चेतना को शाकाहारी बनाना है तो शरीर पर जो मांस सजाकर रखा है उसे हटाना आवश्यक है. क्योंकि आपके चेहरे की सुन्दरता और कामुकता के बजाय साधारण व्यक्तित्व और गहन ठहराव अधिक आकर्षित और प्रभावित करता है. यहाँ आकर्षण से तात्पर्य केवल दैहिक आकर्षण से नहीं है. पता है ना… आत्मा भी आकर्षित करती है…

बहरहाल मैं बता दूं यह बहुत सही समय है, गर्मियों का मौसम बिलकुल सही होता है वज़न कम करने के लिए, एक तो आपके पसंद की सब्ज़ियाँ नहीं होती, तो आप खाना जीभ के स्वाद के लिए नहीं सिर्फ शरीर को ऊर्जा देने के लिए खाएंगे. बेमौसम की सब्ज़ियाँ जो लोग नहीं खाते उनके लिए है ये बात… दूसरा ठोस आहार के बजाय तरल चीज़ें अधिक ली जाती है…

बाकी थोड़ा शारीरिक श्रम बढ़ाया जाए, शक्कर, नमक थोड़ा-सा कम कर दिया जाए, तो खाने में भी कोई परहेज़ नहीं करना पड़ेगा, और फिर अपने सूरज दादा का आशीर्वाद तो है ही…

जैसा कि वादा, अरे नहीं, दावा था सूर्य साधना से वज़न कम करने का… मैंने पिछले दिनों कुछ और कम किया है… क्योंकि

Vaisvaanara is the Lord who has all forms, the golden one, the Sun, the all knowing, the goal of all soul-light, the giver of heat possessing thousands of rays existing in hundreds of forms. Thus rises the Sun, the life of all creation. – Says Sri M

  • माँ जीवन शैफाली

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1 thought on “मोशन से इमोशन तक : पेट साफ होगा तभी तो वज़न के साथ इंसाफ़ होगा”

  1. चारु नीलेश पंडया says:

    अच्छी जानकारी

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