कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है

सुख-साधन-सत्ता के शिखर पर आरूढ़ व्यक्ति भी जब आत्महत्या जैसे घृणित कार्य को अंजाम देता है तो मेरा मन क्षुब्ध हो उठता है; क्षुब्ध हो उठता है मेरा मन जब मैं अखबारों के पन्नों में आत्महत्या जैसी खबरों को सुर्खियाँ बटोरते पाता हूँ; बहुत क्षोभ होता है तब जब मैं पाता हूँ कि आईआईटी जैसे … Continue reading कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है