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तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले, अपने पे भरोसा है तो एक दांव लगा ले

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हौसलों के पंख होते हैं, पैर नहीं। वो जब ठन जाता है, तो कोई आसमान उसकी पकड़ से बच नहीं सकता। एक ऐसे ही हौसले को मैंने आसमान की बुलंदी को छूते हुए देखा है। एक पैर की मोरनी को मैंने सावन में झूमते हुए देखा है। कोई फर्क नहीं पड़ता वह दिसंबर 1986 में प्रदर्शित फिल्म “नाचे मयूरी” की मयूरी है या टीवी सीरियल में अपने नाम से बढ़कर अपने रोल के नाम से प्रसिद्धी पाई रमोला सिकंद है । उसने तो ‘झलक दिखला जा’ में अपनी प्रतिभा की एक ही झलक से लोगों को मोहित किया है।

जी हाँ, आपने ठीक पहचाना वो एक पैर की मयूरी सुधा चंद्रन है। जो जितनी अपनी नृत्य प्रतिभा के कारण जानी जाती है, उतनी ही, मुश्किलों के आगे जीवन में लक्ष्य को खोज निकालने के लिए।

सुधा चंद्रन ने उम्र के पाँचवे साल में नृत्य सीखना शुरू किया था और सातवे साल से स्टेज प्रोग्राम। उम्र के सोलहवे साल तक नृत्य में डूबी रहने वाली इस नृत्यांगना का जीवन एक प्रश्नचिह्न बन गया, जब उन्होंने एक दुर्घटना में अपना एक पैर खो दिया।

कोई और होता तो शायद जीवन के इस प्रश्न का जवाब दिए बिना हार मान लेता, लेकिन सुधा चंद्रन ने किस्मत के आगे घुटने नहीं टेके और ‘जयपुर फुट’ के जनक, हड्डी रोग विशेषज्ञ और मैगसेसे व पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित डॉ. प्रमोद करण सेठी, से कृत्रिम पैर लगवाकर अपनी नृत्य प्रतिभा को न सिर्फ बरकरार रखा, बल्कि अपने जीवन पर आधारित ‘नाचे मयूरी’ नामक फिल्म करने के बाद फिल्म और टीवी की दुनिया में अपनी प्रतिभा का जादू बिखेर रही हैं।

मातृभाषा तमिल होते हुए उन्होंने अपनी हिन्दी इतनी पुख्ता कर ली है कि कई कार्यक्रमों की एंकरिंग के समय हिन्दी भाषा पर उनकी पकड़ और शेर-ओ-शायरी से लोग प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके।

क्या आप जानते हैं कि सुधा चंद्रन एक स्टाइल आइकॉन भी हैं। टीवी सीरियल “कहीं किसी रोज” में रमोला सिकंद के रूप में उनकी बिंदी की डिजाइन और ज्वैलरी सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हुई। लेकिन ये उस उपलब्धि के आगे कुछ नहीं, जो उन्होंने उस समय प्राप्त की होगी, जब उनके जीवन की कहानी स्कूल की किताब में छापी गई और वे बच्चों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनीं।

इतना नाम शायद वो एक नृत्यांगना के रूप में कभी प्राप्त नहीं कर पातीं, जितना उन्होंने अपना एक पैर खोने के बाद जीवन की जंग जीतकर कमाया है। सुधा के आत्मविश्वास के आगे उनकी बदकिस्मती को अपना रुख मोड़ना पड़ा और आज वो अपने नृत्य और अभिनय के बलबूते पर सबके दिलों पर राज कर रही हैं।

आप सोच रहे होंगे मैं इतनी पुरानी अभिनेत्री का उदाहरण लेकर क्यों आई हूँ, आजकल तो हर दूसरे दिन किसी न किसी वेबसाइट पर कोई न कोई सेलेब्रिटी, सक्सेस मंत्र प्रस्तुत करता हुआ दिख जाता है. तो वह इसलिए क्योंकि हम साधारण लोग जब सुखद और सुलभ परिस्थितियों की ज़रा सी कमी के कारण इतने निराशा की खाई में गिर जाते हैं तो फिर आप सोचिये यह तो फिर भी शारीरिक कमी है.

आप इस बात का शुक्र मनाइए कि कम से कम आपके पास पूरा शरीर है… फिर भी आप जीवन के प्रति शिकायत से भरे रहते हैं, कम से कम ऐसे लोगों से प्रेरणा लीजिये जिनके पास परिस्थितियाँ तो दूर शरीर भी पूरा नहीं… और सबसे बड़ी बात उन्होंने अपनी इस कमी को ही अपना प्लस पॉइंट बनाकर उसमें से कुछ रचनात्मक करके दिखाया.

आप कब अपनी कमियों से निराश होना छोड़ेंगे, आप कब अपनी कमी से कुछ रचनात्मक करके दिखाएंगे… आपको मेरी कमी पता है? मेरा किसी विषय पर कोई अध्ययन नहीं है, ना मेरी हिन्दी का उच्चारण ठीक है, ना मुझे अंग्रेज़ी बोलनी आती है, आज आप मुझे माइक पकड़ाकर सवाल जवाब करना शुरू कर दीजिये… उस सवाल के जवाब के अलावा आपको दुनिया भर की बातों का जवाब घंटे भर तक दे सकती हूँ लेकिन किये गए प्रश्न का जवाब देने की कोई ग्यारंटी नहीं…

लेकिन अपनी इस कमी के कारण पता है मुझे क्या फायदा हुआ है? जब भी कोई अच्छी बात पढ़ती हूँ तो उससे तुरंत प्रभावित हो जाती हूँ… मेरा सदैव खुश रहने का एक कारण यह भी है कि मैंने जो सीखा है उसका ज़्यादा लोड सर पर नहीं लेती… इसलिए कोई नई बात चाहे जहाँ से सीखने को मिल जाये मैं उसे बिना कोई ईगो आड़े लाए तुरंत ज्ञान मानकर ग्रहण कर लेती हूँ… ग्रहण बनकर छुपाकर रख नहीं लेती… आप सबको वापस भी कर देती हूँ… you know… तेरा तुझको अर्पण…

तो ऐसे ही अभी कल परसों मुझे एक ऐसा सन्देश प्राप्त हुआ जो बहुत ही साधारण सा था लेकिन उसके पीछे जो गहन अर्थ छुपा था उसने मुझे बहुत प्रभावित किया और उसे मैंने सेव करके रख लिया कि आप सबको एक दिन वह अवश्य बताऊंगी… आप में से कई लोगों ने शायद इसे पढ़ा भी होगा… तो सन्देश कुछ यूं है –

एक महिला की आदत थी, कि वह हर रोज सोने से पहले, अपनी दिन भर की खुशियों को एक काग़ज़ पर, लिख लिया करती थी…. एक रात उसने लिखा :
मैं खुश हूं, कि मेरा पति पूरी रात, ज़ोरदार खर्राटे लेता है. क्योंकि वह ज़िंदा है, और मेरे पास है. ये ईश्वर का शुक्र है..
मैं खुश हूं, कि मेरा बेटा सुबह सबेरे इस बात पर झगड़ा करता है, कि रात भर मच्छर – खटमल सोने नहीं देते. यानी वह रात घर पर गुज़ारता है, आवारागर्दी नहीं करता. ईश्वर का शुक्र है..
मैं खुश हूं, कि हर महीना बिजली, गैस, पेट्रोल, पानी वगैरह का, अच्छा खासा टैक्स देना पड़ता है. यानी ये सब चीजें मेरे पास, मेरे इस्तेमाल में हैं. अगर यह ना होती, तो ज़िन्दगी कितनी मुश्किल होती? ईश्वर का शुक्र है..
मैं खुश हूं, कि दिन ख़त्म होने तक, मेरा थकान से बुरा हाल हो जाता है. यानी मेरे अंदर दिन भर सख़्त काम करने की ताक़त और हिम्मत है, सिर्फ ईश्वर की मेहर से है..
मैं खुश हूं, कि हर रोज अपने घर का झाड़ू पोछा करना पड़ता है, और दरवाज़े -खिड़कियों को साफ करना पड़ता है. शुक्र है, मेरे पास घर तो है. जिनके पास छत नहीं, उनका क्या हाल होता होगा? ईश्वर का शुक्र है..
मैं खुश हूं, कि कभी कभार, थोड़ी बीमार हो जाती हूँ. यानी मैं ज़्यादातर सेहतमंद ही रहती हूं. ईश्वर का शुक्र है..
मैं खुश हूं, कि हर साल त्यौहारों पर तोहफ़े देने में, पर्स ख़ाली हो जाता है. यानी मेरे पास चाहने वाले, मेरे अज़ीज़, रिश्तेदार, दोस्त, अपने हैं, जिन्हें तोहफ़ा दे सकूं. अगर ये ना हों, तो ज़िन्दगी कितनी बेरौनक हो..? ईश्वर का शुक्र है..
मैं खुश हूं, कि हर रोज अलार्म की आवाज़ पर, उठ जाती हूँ. यानी मुझे हर रोज़, एक नई सुबह देखना नसीब होती है. ये भी ईश्वर का ही करम है..
जीने के इस फॉर्मूले पर अमल करते हुए, अपनी और अपने लोगों की ज़िंदगी, सुकून से भरी बनानी चाहिए. छोटी या बड़ी परेशानियों में भी, खुशियों की तलाश करिए, हर हाल में, उस ईश्वर का शुक्रिया कर, जिंदगी खुशगवार बनाएं!!!!

है ना सुंदर सन्देश… तो यदि आप किसी मुश्किल में हैं, किसी तकलीफ में हैं, परेशानी है दुःख है पीड़ा है तो एक गीत हमेशा गुनगुनाइए – मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिये, बस एक बार मेरा कहा मान लीजिये…

– माँ जीवन शैफाली

‘पंछी’ से सीखिए आसमान में उड़ने का हुनर और शऊर

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