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जीवन के MONACO BISCUITS पर कुछ TOPPINGS हो जाए!

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बिस्कुट एक ऐसी चीज़ है जो अमूमन सभी उम्र के लोग खाते हैं. चाय में डुबोकर, शाम की हल्की भूख के समय, या यूं ही कभी मन हो आता है बिस्कुट खाने का. आलू ही की तरह बिस्कुट हर जगह फिट हो जाते हैं, चाहे नाश्ता हो या खाना. इसको खाने का कोई निश्चित समय भी नहीं होता.

बचपन में बच्चों की किसी कविता में ये लाइन भी सुनी है, –
“पापा लाये बिस्कुट, सबने खाए कुट-कुट, पापा बोले वैरी गुड.”

मेरे पापा भी मेरे लिए बिस्कुट लाते थे, और मैं उसे खाने से पहले गौर से देखती थी… तरह तरह के बिस्कुट… ग्लूकोज़ वाले, फिफ्टी-फिफ्टी, क्रीम वाले, जैम वाले…

एक बिस्कुट इनमें से मुझे बहुत आकर्षित करते थे… Monaco के गोल कुरकुरे नमकीन बिस्कुट, जिसमें बीच कई सारे छेद हुआ करते थे. उसके विज्ञापन में उसके Toppings बनाकर खाने के आईडिया दिए जाते थे. मुझे वो बहुत पसंद आते थे. बचपन में मैंने भी कई तरह के Monaco Toppings बना बना कर खाए हैं…

लेकिन बड़े होने के बाद जैसे हम भूल ही जाते हैं कि उसे आज भी वैसे ही खाया जा सकता है… आखिर जीवन भी तो इन Monaco के बिस्कुट जैसा होता है, गोल-गोल, क्रिस्पी, क्षण भंगुर, ज़रा सा ज़ोर से पकड़ लिया तो हाथ में ही चूरा हो जाए. किस्मत की तरह इसमें भी कई छेद होते हैं.

लेकिन इसको जीने का मज़ा लेना हो तो इस पर Toppings लगाइए. खुशियों की Toppings.

संगीत एक इसका सबसे बेसिक Topping है जो अमूमन सभी लोग लगाते हैं. दुनिया में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जिसके जीवन में संगीत न हो.

इसके साथ आप अपनी रूचि के अनुसार लेखन, चित्रकला, नृत्य जैसे कई रचनात्मक प्रयोग भी कर सकते हैं. जो आपके जीवन को न सिर्फ स्वादिष्ट बनाएगा बल्कि सेहतमंद भी बनाएगा.

यात्रा एक ऐसा Topping है जो आपके इस जीवन रूपी Monaco बिस्कुट के छेद से आती जाती हवा को हमेशा ताज़ा रखता है… यात्रा हमें सिखाती हैं जीवन को इतना सहज रखो कि इसमें चाहे कितने ही बड़े छेद हो, इसका स्वाद लेना हम न भूलें. खुद भी खाएं और औरों के साथ भी बाँटें.

लेकिन इसको आंसुओं की नमी और दुखों की आर्द्रता से बचाना होता है… एक बार इसका कुरकुरापन चला गया तो फिर दोबारा उसे पाना बहुत मुश्किल होता है…

बाकी चाहे हाथ में रहे, या मुंह में जाए, होते तो ये बहुत क्रिस्पी हैं… एक दिन तो चूरा होना ही है… लेकिन ऐसा होने से पहले इसको सजाने का और खाने का पूरा पूरा आनंद ले लें.

लिज्जत पापड़ की तरह ही इसे लज्जतदार बनाएं… कर्रम कुर्रम करते हुए खाएं, औरों को भी खिलाएं.

– माँ जीवन शैफाली

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