मैं अपनी ही प्रेमिका हूँ

शायद 1996 या 97 की बात होगी उन दिनों टीवी पर एक डेली सोप आता था “एक महल हो सपनों का” ये टीवी सीरियल पहले गुजराती में बना फिर उसकी लोकप्रियता को देखते हुए उसका हिन्दी रीमेक भी बना। गर्मी की छुट्टियां चल रही थी, मेरा ग्रेजुएशन हो चुका था, … Continue reading मैं अपनी ही प्रेमिका हूँ