कुछ दिल ने कहा… कुछ भी नहीं…

संवाद की उत्कंठा की पराकाष्ठा पर ही प्रस्फुटित होता है मौन. मौन, जो उस कल्पवृक्ष का बीज है, जो प्रार्थनाओं के पानी से पाता है अपना सम्पूर्ण स्वरूप…. प्रेम-यात्रा की … Continue reading कुछ दिल ने कहा… कुछ भी नहीं…