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कुछ दिल ने कहा… कुछ भी नहीं…

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संवाद की उत्कंठा की पराकाष्ठा पर ही प्रस्फुटित होता है मौन. मौन, जो उस कल्पवृक्ष का बीज है, जो प्रार्थनाओं के पानी से पाता है अपना सम्पूर्ण स्वरूप….

प्रेम-यात्रा की राह पर खड़ा यह कल्पवृक्ष उस मील के पत्थर के समान है, जहाँ से तुम जब भी दुबारा गुज़रोगे, तुम्हें याद आएंगी वो बातें, जो मैं तुम्हारा हाथ पकड़ कर, तुम्हारा चेहरा देखते हुए तुम्हें कहना चाहती थी….

और कहते हुए रुकना चाहती थी तुम्हारी आँखों की मछलियों पर जो मेरी आँखों से उठती जलतरंगों पर नृत्य करती सी प्रतीत होती हैं..

मैं उन मछलियों संग तड़पकर उतरना चाहती थी तुम्हारे होठों की तितलियों के गुलाबी पंखों पर, जिसको छूते ही उसका रंग मुझ पर चढ़ जाए…

लेकिन… कुछ बातें ऐसी भी होती हैं जो संवाद नहीं बन पाती….

दिल की तस्सली के लिये, झूठी चमक झूठा निखार
जीवन तो सूना ही रहा, सब समझे आयी बहार
कलियों से कोई पूछता, हंसती हैं या रोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं….
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं….

प्रेम-यात्रा के तुम वो अदृश्य सहयात्री हो जो अपने संवाद को इतना सार्वजनिक कर देते हो कि तुम्हारे दो शब्दों के बीच ठहर कर अपने व्यक्तिगत मौन को चुनकर लाना, मेरे लिए प्रतीक्षा के पैर से शूल निकालने जैसा होता है…

तो ये ठहराव मैंने यूं ही नहीं पाया है, तुम्हारे दो शब्दों के बीच ठहरने के लिए भी मुझे अपनी आती जाती दो साँसों के बीच ठहरना पड़ता है. उन ठहरे हुए पलों से ही मैंने अपने हृदय में एक पीड़ा का महल बनाया है. मैं उस महल की रानी हूँ… मेरे साम्राज्य में अब कोई संवाद नहीं करता… संवाद की उत्कंठा की पराकाष्ठा पर आकर ही मेरे मौन की परियां सोती हैं…

यकीन मानों मुझे आज भी उम्मीद है कि किसी दिन तुम अपने कान मेरे हृदय पर धर दोगे तो मेरे मौन की सोती परियां धड़कनों की थाप पर पूर्ण समर्पण के साथ नृत्य करने लगेगी…

लेकिन तब भी शायद तुम कुछ नहीं सुन पाओगे क्योंकि मेरा मौन तक तुम्हारा नाम लेने में लजाता है… तब मैं तुमसे पूछूंगी एक अंतिम सवाल ….

कुछ दिल ने कहा?

तुम कहोगे… कुछ भी नहीं….

कुछ दिल ने सुना?

कुछ भी नहीं….

लेता है दिल अंगड़ाइयां, इस दिल को समझाये कोई
अरमान ना आँखें खोल दें, रुसवा ना हो जाये कोई
पलकों की ठंडी सेज पर, सपनों की परियां सोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं…. कुछ ऐसी भी बातें होती हैं….

कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं….
कुछ दिल ने सुना… कुछ भी नहीं….

– माँ जीवन शैफाली

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