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जिसने गोधन पाया वही स्वास्थ्य से धनवान कहलाया

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गाय हमें 3 चीज़ देती है दूध, गौ मूत्र, गोबर।

दूध

दूध मानव का एक सम्पूर्ण आहार है मानव शरीर में जो भी पोषक तत्व चाहिए होता है वो सब दूध में होता है। दूध को प्रोसेस करके दही बनाया जाता है, दही को प्रोसेस करके मंथन क्रिया करके माखन-छाछ बनाया जाता है।

माखन एक ऐसा पदार्थ है जिसके सेवन से बच्चों का चरित्र निर्माण होता है, छाछ एक ऐसा पदार्थ है जिसमें दूध से बीस गुना ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। इन सब के बाद घी बनता है और घी ऐसा पदार्थ है कि “वात – पित्त” से होने वाले सभी बीमारियों को अकेले ठीक कर देता है।

वात पित्त का कुछ बीमारी बता देता हूं – नर्वस सिस्टम, ENT, लकवा, हाथ पैर में दर्द, मानसिक तनाव, त्वचा रोग, इसके अलावा आप जो भी बीमारी का नाम ले सब का इलाज घी में छुपा हुआ है।

 

गो मूत्र

गोमूत्र का उपयोग खेत में कीटनाशक बनाने के लिए उपयोग करते हैं और अब मानव जगत के कल्याण के लिए औषधियाँ बनाना शुरू कर दिए हैं। मानव जगत में ऐसी कोई बीमारी नहीं जो गोमूत्र से ठीक नहीं होती, वायरस को खत्म कर देता है गोमूत्र, चाहे कैसा भी वायरस हो, कितना भी खतरनाक वायरस हो, सब वायरस खत्म कर देता है, रक्त शुद्धिकरण के लिए गोमूत्र का उपयोग किया जाता है, कोई अंग जैसे किडनी, स्टमक, लिवर खराब हो रहा हो तो उसके लिए गोमूत्र दिया जाता है, शरीर मे खुजली हो रही हो या अन्य त्वचा रोग हुआ हो उसके लिए गोमूत्र का उपयोग किया जाता है, सर्दी बुखार नहीं होता है।

गोमूत्र से कैंसर भी इसलिए ठीक होता है क्योंकि गोमूत्र डेड सेल को शरीर से बाहर निकाल देता है। ये काम नेचुरल रूप से स्प्लीन करता है लेकिन यूरिया इतना ज्यादा मात्रा में जाता है कि पूरा डेड सेल स्प्लीन संभाल नहीं पाता।

गोबर

गोबर का उपयोग खेतों में खाद बनाने के लिए किया जाता है, और गोबर को सुखाकर कंडा बनाया जाता है जिसका उपयोग भोजन बनाने के ईंधन के रूप में किया जाता है। गोबर का उपयोग वाहन चलाने और बिजली बनाने में भी किया जाता है।

गोबर का उपयोग मेडिकल जगत में ऐसा है कि कोई अंग जैसे लिवर किडनी खराब हो गया तो गोबर का रस उसको रिपेयर कर देता है , नॉर्मल डिलीवरी करने के लिए भी गोबर का रस पिलाया जाता है जिससे सिजेरियन करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। अभी वर्तमान में नागपुर के देवला पार के गोशाला में गोबर से 75 प्रकार के प्रोडक्ट बनाये जा रहे है जैसे कागज़, गमला, पेंसिल..

ये तीन प्रोडक्ट तो सामान्य मानवों के लिए हैं, परन्तु ध्यान करने वालों के लिए भी गोमाता के द्वारा दिया गया एक उपहार है वो उपहार है “ऊर्जा”।

दूध, गोबर, गोमूत्र के अलावा भी एक चीज़ देती है और वह है “बुद्धि”.

क्या करना सही है क्या करना गलत है ये बुद्धि से ही सम्भव है। आज व्यक्ति 20 लाख पैकेज में काम करता है उसको मालूम है मैगी खाना हानिकारक है लेकिन जब मैगी बैन होता है तो एक बोरी मैगी खरीद के ले आता है। तो 20 लाख पैकेज होने के बाद भी इसको बुद्धिमान व्यक्ति नहीं कहा जा सकता।

इसलिए पहले सबके घर में गाय होती थी। पहले पण्डित लोग भिक्षा मांग के खाते थे उनके घर में भोजन नहीं होता था लेकिन फिर भी उनके घर मे गाय होती थी और उनके पास बुद्धि, कॉमन सेन्स, ज्ञान होता था।

जब मालूम है चाइना सामान लेना गलत है फिर भी अमीर आदमी चाईना की कार इम्पोर्ट करता है और मध्यम आदमी मोबाइल इम्पोर्ट करता है गरीब आदमी झालर इम्पोर्ट करता है।

गाय एंटीना है जो सौर मंडल से सकारात्मक ऊर्जा खींच के हमको देती है। जब हम गाय के पीठ पर हाथ फेरते हैं तो उसकी पीठ हिलती है वो सकारात्मक ऊर्जा ही होती है। व्यक्ति कितना भी मानसिक तनाव में रहे 10 मिनट में आराम मिल जाता है।

गाय की पीठ पर हाथ न फेरो, तब भी पीठ हिलती है वो ऊर्जा जमीन को दे देती है जिससे प्रलय नहीं आता।

– ऋत वत्सल्य

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