चरित्रहीन – 1 : प्रेम, पीड़ा, प्रतीक्षा, परमात्मा

उसे कई बार ऐसा लगता है जैसे वह इस जन्म में जिस किसी से भी मिल रही है, वह पिछले किसी न किसी जन्म का कोई रिश्ता है… यूं तो वह हज़ारों लोगों से मिलती है, लेकिन एक दिन अचानक किसी को देखकर आँखें चमक जाती है. चेतना से कोई लहर उठती है और वह … Continue reading चरित्रहीन – 1 : प्रेम, पीड़ा, प्रतीक्षा, परमात्मा