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Category: September (Fourth) 2018

तन नुं बनावे तम्बूर अने मन ना करे मंजीरा, तो तमे मानजो के ए हशे, राधा ने कां मीरा

एक राधा, एक मीरा दोनों ने श्याम को चाहा अन्तर क्या दोनों की चाह में बोलो इक प्रेम दीवानी, इक दरस दीवानी राधा ने मधुबन में ढूँढा मीरा ने मन में पाया राधा जिसे खो बैठी वो गोविन्द और दरस दिखाया एक मुरली एक पायल, एक पगली, एक घायल अन्तर क्या दोनों की प्रीत में […]

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नायिका -3 : Introducing सूत्रधार

हर फिल्म का एक नायक होता है………….. और होती है एक नायिका……………………. फिल्म चाहे पुरानी हो या नई………. हर फिल्म में एक नायक होता है…………. और होती है एक नायिका…………… बात चाहे नायक की सफलता की हो या असफलता की………… हर नायक के पीछे होती है एक नायिका……….. बात चाहे प्रेम की हो रही हो […]

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उत्पादक श्रम अर्थकारी और अनुत्पादक श्रम अनर्थकारी

उत्पादक श्रम अर्थकारी और अनुत्पादक श्रम अनर्थकारी होता है। सन्तानोत्पत्ति हेतु संसर्ग करना अर्थकारी है। केवल भोगेच्छा पूर्ति हेतु पहले सहवास करना, फिर विरक्ति होने पर पुनः भड़काऊ सामग्री की शरण में जाना, पश्चात मानसिक अशांति होने पर ड्रग्स आदि का सेवन और वहाँ से विखंडित व्यक्तित्व की पूर्ति हेतु विकृतियों को अपनाना, कुल मिलाकर […]

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नव युग चूमे नैन तिहारे, जागो, जागो मोहन प्यारे…

पूर्व में सूर्योदय हो चुका है। बाल अरुण अपनी पूर्ण आभा से प्रकाशित हो अपने प्रखर तेज से दसों दिशाओं को आलोकित करने वाला है। नभ में विहग पंक्ति रक्ताभ्र मेघ पर ऐसे सुशोभित है मानो किसी स्वर्णमय पात्र में कस्तूरी का छिड़काव किया हो। रात भर कोलाहल कर रहे सियारों का स्वर मन्द हुआ […]

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मानो या ना मानो : यात्रा एक तांत्रिक मंदिर की

चौथे दिन मैं भैरव पहाड़ी पर पहुंचा तो कोहरा-सा छाया हुआ था, पर कुछ ही समय बाद कोहरा छंट गया और प्रखर धूप निकल आई. यह मेरे लिए शुभ संकेत था. भैरव पहाड़ी की चढ़ाई अत्यंत कठिन और श्रम-साध्य है. लगभग पांच घंटे की जी-तोड़ चढ़ाई के बाद ही मैं ऊपर पहुँच सका. सामने ही […]

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ब्रह्माण्ड बहुत ही प्यारा दोस्त है मेरा

हस्पताल के गलियारे में बैठी थी। अपनी बारी का इंतज़ार कर रही थी। ब्लड टेस्ट तो हो चुका था पर डॉक्टर अभी किसी और मरीज़ के साथ मशगूल थी। एकाएक मन को न जाने क्या हुआ, अब मन है तो अपनी मर्ज़ी से उड़ने लगता है, पूछता थोड़ी न है। विचार तितलियों की तरह मँडराने […]

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ना उम्र की सीमा हो, ना जन्मों का हो बंधन

रिश्तों के कोंपल उसी मिट्टी में अंकुरित होते हैं, जहाँ अनुकूल वातावरण मिलता है, फिर चाहे विवाह हो, प्रेम हो या फिर दोस्ती. किसी भी रिश्ते को फलने-फूलने में सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है, सामंजस्य की, सहनशीलता की और प्रेम की. जिस रिश्ते में इनमें से कोई एक भी चीज कम हो तो रिश्ते की […]

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