तन नुं बनावे तम्बूर अने मन ना करे मंजीरा, तो तमे मानजो के ए हशे, राधा ने कां मीरा

एक राधा, एक मीरा दोनों ने श्याम को चाहाअन्तर क्या दोनों की चाह में बोलोइक प्रेम दीवानी, इक दरस दीवानी…

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उत्पादक श्रम अर्थकारी और अनुत्पादक श्रम अनर्थकारी

उत्पादक श्रम अर्थकारी और अनुत्पादक श्रम अनर्थकारी होता है। सन्तानोत्पत्ति हेतु संसर्ग करना अर्थकारी है। केवल भोगेच्छा पूर्ति हेतु पहले…

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नव युग चूमे नैन तिहारे, जागो, जागो मोहन प्यारे…

पूर्व में सूर्योदय हो चुका है। बाल अरुण अपनी पूर्ण आभा से प्रकाशित हो अपने प्रखर तेज से दसों दिशाओं…

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मानो या ना मानो : यात्रा एक तांत्रिक मंदिर की

चौथे दिन मैं भैरव पहाड़ी पर पहुंचा तो कोहरा-सा छाया हुआ था, पर कुछ ही समय बाद कोहरा छंट गया…

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ना उम्र की सीमा हो, ना जन्मों का हो बंधन

रिश्तों के कोंपल उसी मिट्टी में अंकुरित होते हैं, जहाँ अनुकूल वातावरण मिलता है, फिर चाहे विवाह हो, प्रेम हो…

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