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तुम्हारा दिल या हमारा दिल है…

प्रतीक्षा चिरनिरन्तर है. वह प्रतीक्षा ही कैसी जो विरत हो जाये? प्रतीक्षा प्रारंभ होती है कभी समाप्त नहीं होने के लिए! प्रतीक्षा रोती है कलपती है लेकिन थकती नहीं! प्रतीक्षा मोजड़ी में अनवरत चलने के घाव दे के आह को नित्य नव्य बना देती है! प्रतीक्षा ऊपरी सतह से समतल राह सी दिखती है लेकिन […]

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Cinderella : सिर्फ़ प्रेम कहानी नहीं, एक प्रेरक कहानी

“सिंड्रेला” फ़िल्म (2015) मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है. हालांकि इस फ़िल्म या सिंड्रेला की कहानी से जुड़ी चली आ रही आम धारणा “सिंड्रेला” के वास्तविक कथानक, अर्थ और भाव को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाती. आमतौर पर “सिंड्रेला” की कहानी को महज एक आम लड़की और उसके सपनों के राजकुमार के वास्तविक […]

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धर्म और विज्ञान : दो नावों की सवारी

हम सभी ने देखा है कि प्रकाश की कोई किरण किसी प्रिज़्म में से गुज़रने पर सात रंगों में विभाजित हो जाती है. कल्पना की जाए कि वह प्रकाश प्रिज्म में उलझ कर अपनी असली पहचान भूल गया और स्वयं को कांच का प्रिज्म ही समझने लगा और बाहर दिखने लगी उसे एक सतरंगी दुनिया, […]

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हसरत है धूपिया रंग की शिफॉन में चाँद छू लेने की!

साड़ियों से इश्क़ उम्र के दूसरे दशक में हुआ फिर वक्त के साथ परवान चढ़ा.. साड़ी पहन कर मिजाज़ आशिकाना हो जाता लगता रिमझिम फुहारों से भरी हवायें हैं! घर से निकलने का एक आकर्षण ये होता कि कोई गुनगुनी सी साड़ी पहनेंगे और उसके आँचल में हर मौसम ठहरा लेंगे!! आहिस्ता आहिस्ता साड़ी की […]

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प्रस्तुतिकरण का मस्का और ऑनलाइन शॉपिंग का चस्का

एक दिन दोनों बेटे मेरे पास आए – क्या आपके पास नौ हज़ार नौ सौ निन्यानवे रुपये हैं? नहीं, मेरे पास तो नहीं है… मुझे तो ये भी नहीं पता नौ हज़ार नौ सौ निन्यानवे लिखते कैसे हैं… लेकिन आपको क्यों चाहिए है? अरे… चार बार 9 लिखो और नौ हज़ार नौ सौ निन्यानवे रुपये […]

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कायाकल्प संकल्प के जादू से : वज़न कम करने के लिए करें ये आसान उपाय

इस समय यदि सबसे बड़ी कोई समस्या शरीर को लेकर लोगों में है, तो वो है वज़न बढ़ने की समस्या. और बावजूद इसके सबसे बड़ा सपना यदि लोग देख रहे हैं, तो वो है छरहरी काया पाने का सपना. छरहरी काया पाना तो सब चाहते हैं लेकिन बैठे बिठाये. ना उन्हें खाने पीने में परहेज़ […]

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मन में विश्वास होना आवश्यक है, चाहे ईश्वर के प्रति हो या सांसारिक व्यक्ति के प्रति

मन में विश्वास का होना बहुत आवश्यक होता है. चाहे वह ईश्वर के प्रति हो या किसी सांसारिक व्यक्ति के प्रति. यह एक ऐसा गुण है जिसको अपनाए बिना मनुष्य जीवन चला ही नहीं सकता. सांसारिक लोगों पर विश्वास कभी सुखदायी होता है तो कभी दुखदायी. लोग एक-दूसरे पर अपना स्वार्थ साधने के लिए ही […]

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साफ फ़र्क है आह से उपजे गान और बाज़ार की कला में : प्रसून जोशी

हमारा अतीत इस बात का गवाह है कि चाहे वह कल्पना की ऊंची उड़ान हो या नए-नए विचारों की गहरी पैठ, हमने नए विचारों का सदा ही स्वागत किया है. हमारे पास अनेक उदाहरण हैं निर्बाध चिंतन के. फिर भी आज कुछ लोगों में एक असंतोष क्यों दिखाई देता है? क्यों कला का समाज और […]

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यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे

आधुनिक विज्ञान की बिग बैंग थ्योरी बताती है कि ब्रह्मांड (सृष्टि) की उत्पत्ति महाविस्फोट से हुई. विस्फोट से असंख्य ग्रह, नक्षत्र, तारे बने. जिससे ब्रह्माण्ड का विस्तार हुआ. और अभी विस्तार की प्रक्रिया जारी है. भारतीय अध्यात्म दर्शन में भी कहा गया कि एक ने अनेक होने की कामना की, और वह अनेक रूपों में […]

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मासिक धर्म, माहवारी या ‘कपड़े से’ होना

आज से 54-55 साल पहले, 1963 के जून माह में, जब मेरी गर्मी की छुटियाँ थीं, मैं पूरे दस दिन के लिए अपनी बुआ फूफा के पास लखनऊ आ गया था. खूब मस्ती के दिन थे वे. पर क्या मस्ती की थी तब, ये ठीक से याद नहीं, बस चिड़ियाघर, अमीनाबाद और हजरतगंज जैसी जगहें […]

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