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Category: November (Second) 2018

अंगरेज़ का रंगरेज़ हो जाना

अंगरेज़…. कहने लगा मैं आप पर एक कहानी लिखूंगा… मेरी कहानी का पात्र… मेरी ही कहानी में प्रकट होकर कह रहा मैं उस रचयिता पर कहानी लिखूंगा जिसने मुझे रचा है… दो कहानियां एक दूसरे में उलझ रही थीं… जैसे कल्पवृक्ष पर चढ़ती दो बेलें… अपनी अपनी कामनाएं दर्ज़ करती हुईं… तुम्हारी जुल्फों के पेंच […]

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लक्ष्मी और दुर्गा का ब्रह्माण्डीय नृत्य

संसार में भाषा का आविष्कार करने वाले कौन थे, ये तो मैं नहीं जानती लेकिन इतना मैं यकीन से कह सकती हूँ कि अविष्कार के बाद इसका सबसे अधिक उपयोग और उस पर प्रयोग लड़कियों ने किया होगा… बातें करती हुई लड़कियों को कभी ध्यान से देखा है? उनका सारा संसार उनके संवाद की डोर […]

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आज की नायिका: आत्महत्या की हार से जीवन को जीतनेवाली पद्मश्री कल्पना सरोज

कल्पना सरोज का जन्म महाराष्ट्र के एक कस्बे मुर्तजापुर में हुआ था. कल्पना एक दलित परिवार में जन्मी थीं. उनके पिता पुलिस में कांस्टेबल थे. पांच भाई बहनों में कल्पना सबसे बड़ी थीं. कांस्टेबल पिता शिक्षा के महत्व को समझते थे, उन्होंने कल्पना को एक सरकारी स्कूल में भर्ती कराया. लेकिन कल्पना दलित थीं. स्कूल […]

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जापान लव इन टोक्यो : हिंदुस्तानी दिल का जापान भ्रमण

मार्च 2015 की एक रात 9 बजे प्लेन टोक्यो के नरिटा एयरपोर्ट पे लैंड किया. 20 मिनट में इम्मीग्रेशन, बैगेज और कस्टम्स से बाहर. इम्मीग्रेशन अफसर ने वीज़ा पे एक मोहर लगाई और एक बड़ा सा स्टैम्प चिपकाया. थोड़ा आश्चर्य हुआ क्योंकि विकसित देशों में सिर्फ आगमन की मोहर लगाई जाती है. टोक्यो के लिए […]

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जिसने गोधन पाया वही स्वास्थ्य से धनवान कहलाया

गाय हमें 3 चीज़ देती है दूध, गौ मूत्र, गोबर। दूध दूध मानव का एक सम्पूर्ण आहार है मानव शरीर में जो भी पोषक तत्व चाहिए होता है वो सब दूध में होता है। दूध को प्रोसेस करके दही बनाया जाता है, दही को प्रोसेस करके मंथन क्रिया करके माखन-छाछ बनाया जाता है। माखन एक […]

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मैं और मेरी किताबें अक्सर ये बातें करते हैं : वर्जित बाग़ की गाथा

ये समीक्षा नहीं है, सचमुच समीक्षा नहीं है. समीक्षा तो पुस्तक की होती है, जीवित गाथाओं की नहीं. अच्छा बुरा पहलू तो लिखे हुए हरूफ़ का देखा जाता है, उन हरूफ़ का नहीं, जो रूह बनकर गाथाओं के शरीर में बसते हों. कुछ हर्फ आँखों से गुजरकर चेतना बनकर हमारे अचेतन मन में ज़िंदा रहते […]

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कृष्ण : विरह का अनंत अनुराग

बरसों पहले देखा एक तैलचित्र अब तक मेरी स्मृति में सो रहा है । भगवान कृष्ण का वह चित्र महाभारत युद्ध के बाद का था, संभवत: राजा रवि वर्मा का बनाया हुआ । बात चूंकि बहुत पुरानी हो चुकी है इसलिए पक्के तौर पर नहीं कह सकता । चित्र अपनी गरिमा और गुणधर्म में रवि […]

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