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Category: November (Fourth) 2018

जय राधा माधव, जय कुंज बिहारी

पुस्तकों में लिखे शब्दों को अस्तित्व में बोने के लिए आँखों का पानी देना होता है, परन्तु जीवन की पुस्तक में लिखे जाने वाले अक्षरों को, घटनाओं को जब साक्षी भाव का पानी मिलता है, तो बीज सिर्फ जीवन के अस्तित्व में नहीं, समय की साँसों में भी पड़ जाते हैं. फिर वो समय जिस […]

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नायिका – 7 : अरमान तमाम उम्र के सीने में दफ्न हैं, हम चलते-फिरते लोग मज़ारों से कम नहीं

बहरहाल तो जनाब यहाँ से शुरू होता है नायक का परिचय… ख़ुद नायक की ज़ुबानी… जी हाँ कहा ना मैंने बताना शुरू किया तो कहानी आगे नहीं बढ़ेगी… आप जितना भी नायक के बारे में जानेंगे, जितना भी उसे समझेंगे वो सब नायक के ही शब्दों में होगा…. क्योंकि नायक को ख़ुद के अलावा और […]

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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए

आज आपको आँखों सुनी और कानों देखी बात बताने जा रहा हूँ। जी हाँ! आपने सही देखा। अगर सुनने का साहस हो और तपाक से प्रतिउत्तर न देने की आदत हो तभी आगे पढ़े। ये मार्मिक वृतांत एक बुजुर्ग शख़्स के बारे में है, उनका नाम ‘कृष्ण लाल शर्मा’ है। इंदौर के शीतल नगर में […]

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मानो या ना मानो : ऊपरी हवा का टोना और अंतर की आस्था का जादू

आज आपबीती लिखने जा रहा हूँ। कुछ ऐसी घटनाएं जो जीवन में सबक बन कर आती हैं और आप किंकर्तव्यविमूढ हो जाते हैं कि आगे का मार्ग क्या हो? लगभग 27-28 सितम्बर से यह सब आरम्भ हुआ। मुझे यह अनुभूति होती कि मुझे बुखार रहता है.. और दिन में तीन-चार बार हथेली से स्वेद भी […]

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यह सुरेंद्र मोहन पाठक के लिए खतरे की घंटी है…

मैं किशोरावस्था में तथाकथित लुगदी साहित्य का बड़ा प्रेमी था। हां, हमलोग उसे जासूसी नॉवेल कहते थे। सुरेंद्र मोहन पाठक, वेदप्रकाश शर्मा के साथ मैं तो जेम्स हेडली चेइज और रीमा भारती, केशव पंडित जैसों को भी खूब पढ़ता था। हालांकि, इनमें पाठकजी को पढ़कर हमेशा ही लगता रहा जैसे वह व्यक्ति अपनी वर्तमान स्थिति […]

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#AskAmma : प्रेम में देह की भूमिका और SEX की कामना

मुझसे जुड़ें मित्रगण अलग अलग अवसरों पर अलग अलग लेख पर या इनबॉक्स में कुछ व्यक्तिगत तो कुछ सामान्य प्रश्न मुझसे पूछा करते हैं. जैसा कि मैं हमेशा कहती हूँ मैं कोई बहुत बड़ी ज्ञानी नहीं हूँ जो सबके प्रश्नों का उत्तर जानती हूँ या मुझे सब पता है, और सबसे बड़ी बात मैं जो […]

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कान्हा के अंतिम दर्शन

अश्वत्थ वृक्ष के नीचे तने के साथ अपनी भुजा को सिर के पीछे लगाये पीठ के सहारे अर्धशयन मुद्रा में वे बैठे हुए थे, दाँया पैर बाँये घुटने पर रखे हुए अर्धनिमीलित नेत्रों से शून्य में देखते हुए से। बांया चरण घुटने पर होने के कारण हवा में था जिसका तलवा प्रातःकाल के उदित होते […]

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