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Category: November (First) 2018

अंगरेज़न : जंगल की रानी

जिनको जिनको भी मिलना है लिखा इश्क़ मिलवायेगा दूर दूर से ढूंढ ढूंढ के पास ले आएगा कहीं भी जाके छुपो इश्क़ वहीँ आएगा कितना भी ना ना करो उठा के ले जायेगा मानो या न मानो ये सारी ही दुनिया इसी के दम पे चले… यह सिर्फ एक गीत नहीं, मेरे जीवन का रहस्य […]

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तब आनंद से जीते थे जब खाने के काम आती थीं ब्लैकबेरी और एप्पल जैसी चीज़े

नब्बे के दशक में हम आज की तरह सेलेक्टिव नहीं हुआ करते थे… मतलब कि चीजों को खुद के लिए चुनने के इतने विकल्प नहीं थे. याद कीजिये उन दिनों कितनी बार हम सबके साथ ऐसा होता था कि आप घर से सुबह स्कूल के लिए निकले. स्कूल पहुंचे तो पता चला कि आज तो […]

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समुद्र मंथन : शुभ-अशुभ हमारी धारणा है, प्रकृति की नहीं

दो विपरीत विचार स्वभाव के समूह देव और दैत्यों के सहयोग से, समुद्र में विपरीत धारायें उत्पन्न की गईं, जिससे कई रत्नों के साथ अमृत पाया गया। गुण अवगुण, सभी प्रकृति में उपयोगी होते हैं। प्रकृति गुण अवगुण के सम्मिलन से ही बनी है। विपरीत के अभाव में अस्तित्व को सिद्ध कर पाना संभव ही […]

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सदमा – 2 : मेरा कोई सपना होता…!

दुखांत प्रेम कहानियों पर बनने वाली फिल्मों में सदमा को मैं श्रेष्ठ मानता हूं। ऐसी फिल्मों में अकसर नायक-नायिका की दुखद मृत्यु हो जाती है। वे मिलते हुए बिछड़ जाते हैं। लेकिन सदमा का विछोह अपार है। वहां देह की मृत्यु नहीं है, आत्मा के लोक का लुंठन है। एक भयावह अंधकार है। स्याह अंधेरा.. […]

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दुनिया रंग रंगीली

क्या आप जानते हैं जापान के ओसाका में स्थित गेट टावर बिल्डिंग किसी साइंस फिक्शन मूवी का आभास देती है! यह विश्व की एक मात्र बिल्डिंग है जिसके बीच में से एक्सप्रेसहाइवे गुज़रता है, और ऊपर व नीचे लोग रहते हैं। जी हां, ओसका के फुकीसमा कु स्थित 16 मंज़िला बिल्डिंग 236 फुट ऊंची है, […]

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किताबों की दुनिया

कवियित्री राजेश जोशी की ‘ब्रह्माण्ड का नृत्य’ संग्रह की कई रचनाओं को पढ़ते हुए मैंने महसूस किया जैसे संवेदनशील लोगों में यह फैलती चली जाएँगी और हर एक तक उसको, उसकी सी बातें कहेंगी. जैसे एक जंगल में भटका हुआ बनमाली जंगली फूलों की लताओं से प्रेम करने लगा हो और लताओं से उसकी होने […]

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आत्ममंथन : जिसे जो बनना होता है वो बनके ही रहता है

“जिसे जो बनना होता है वो बनके ही रहता है…………..” सुबह के सपने की सारी गुत्थियाँ सुलझ जाने के बाद जो आख़िरी वाक्य लेकर मैंने आँखें खोली वह यही था… लगा आज सुबह से पहले जितनी भी सुबहें याद रखे हुए सपनों को लेकर मेरे जीवनकाल में आई वो इसी सुबह का संदेशा लाने की […]

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