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Category: June (first) 2018

अध्यात्म के रंगमंच पर जीवन का किरदार…

मुझसे किसी को किसी बात पर ईर्ष्या नहीं हो सकती, लेकिन बिस्तर पर करवट बदलते रहने वालों को मेरी इस आदत पर अवश्य ईर्ष्या हो सकती है कि ध्यान बाबा कहते हैं आप इतनी बड़ी कुम्भकरण हैं कि आप पास में बैठी हैं और ज़रा सी कोहनी मारकर आपको लुढ़का दो तो वहीं खर्राटे मारने […]

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एक मुलाक़ात : डॉ. बशीर बद्र साहब से

न जी भर के देखा, न कुछ बात की, बड़ी आरज़ू थी मुलाकात की! डॉ. बशीर बद्र साहब की लिखी गई और चन्दन दास जी की आवाज़ में इस गज़ल की ये दो पंक्तियाँ; बशीर बद्र साहब के सामने पहुँचने के बाद, मेरे हाल को बख़ूबी दर्शा रही हैं. बशीर बद्र! नाम ही काफी है, […]

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तू खाली-सी जगह हो गया, जिसमें मैं भर आई हूँ

हर एक के जीवन में ऐसा क्षण अवश्य आता है जब वह रिक्तता के चरम बिंदु पर पहुँच जाता है. जीवन में यह रिक्तता दो तरफ से काम करती है, बाहर की तरफ से व्यक्ति असुरक्षित और एकाकी अनुभव करता है तो अन्दर से कोई उसे इस अवस्था के आनंद को जी लेने के लिए […]

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बचिए एनर्जी वैम्पा़यर्स से : क्योंकि खाली दिमाग़ शैतान का घर

ईश्वर की एक बहुत असीम अनुकंपा है हम मनुष्यों पर कि उन्होंने हमें इतना ज़्यादा सक्षम दिमाग बख्शा. बिल्कुल धरती पर उतरी पहली गंगधार की तरह, पवित्र और एक कोरे कागज़ की तरह धवल. यह हम पर निर्भर होता है कि हम इस कागज़ पर किस तरीके की भावनात्मक स्याही का इस्तेमाल करते हैं. अब […]

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कविताएं कुछ प्रेम पगी

उसके लिए भी, जिसका चेहरा स्मृति में धुंधला हो गया है, पर उसका राशिफल आज भी पढ़ता हूँ, और उसके लिए भी जो आभासी संसार मे रहती है, पर लगता है कि हमारी रेखाएं कहीं ना कहीं तो जुड़ती है. तुम वही हो ना, जो बदल सकती है, मौन को मुखर में, और छेड़ सकती […]

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मुझ जंगली का मन तो जंगल में ही भटकता है

बचपन के दिनों में खाए गए फलों को याद करती हूँ तो दो तीन चीज़े दिमाग में कौंध जाती है, और मैं ‘हाय वो भी क्या दिन थे’ सोचकर बचपन की गलियों में उतर जाती हूँ… जहां माँ गर्मियों के मौसम में रस वाले नरम आम की टोकनी, एक बड़ा सा तपेला लेकर बैठती थी […]

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संतानवती की ओर से माँ शीतला को धन्यवाद

यह तस्वीर देखकर किसी के मन में ‘आस्था’ जागेगी, किसी के मन में ‘अन्धविश्वास’… लेकिन इसे देखकर मेरे हृदय के अश्रु कुण्ड में एक बड़ी सी लहर जागी और भरे कंठ के साथ मेरी चेतना भी जैसे माँ के चरणों में ऐसे साक्षात दंडवत हो गयी… तब तक ना मैंने इस तस्वीर के पीछे के […]

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