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Category: June (Second) 2018

पग घुँघरू बाँध मीरा नाची रे…

रिश्ते खट्टे हो जाएं तो उसमें से थोड़ा जामन निकालकर बहती भावनाओं का दही जमा लेना, फिर उसमें थोड़ा सा मीठा प्रेम डालकर मीठी लस्सी बना कर या मिष्टी दोही बनाकर खुद भी खाना, औरों को भी खिलाना… मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी अप्रेल माह – पहला अंक और हाँ, कहते हैं न कोई कुछ नया काम […]

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जीवन, अध्यात्म का प्रकट रूप और अध्यात्म, जीवन का अप्रकट विस्तार

ये जादू मेरे साथ अक्सर घटित होता है, किसी तस्वीर पर एकदम से दिल आ जाता है तो लगता है इस पर कुछ लिख डालूँ, या काश कोई इस पर कुछ लिख दे. या कई बार कोई विचार या वन लाइनर-सा दिमाग में कुछ कौंधता है, तो लगता है काश बस ऐसा कोई चित्र मिल […]

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Thyroid : माया को गलमाया मत बनाइये

जैसे हर गोपी को कृष्ण अपने साथ रास करते दिखाई देते थे वैसे ही Thyroid का हव्वा इस तरह से फैलाया गया है कि हर स्त्री को अपने छोटे मोटे हार्मोनल बदलाव भी थाइरोइड होने की आशंका से घेर लेता है. एक बार आपने उस बीमारी को याद किया कि उसका होना तय है क्योंकि […]

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नेप्ट्यून से परे एक ‘महापृथ्वी’ : जो नवाँ होगा और नवा भी

पुराने बच्चों को स्कूल में नौ ग्रह पढ़ाये गये; आज-कल के बच्चे आठ पढ़ते हैं. जो थोड़े अधिक कुतूहली हैं, वे इस आठ की संख्या के बाद एक प्रश्नचिह्न लगा छोड़ देते हैं. नेप्ट्यून से सुदूर शायद कोई और है, जिस पर से कभी पर्दा उठेगा और सत्य प्रकट होगा. वह जो नवाँ होगा और […]

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ध्यान का ज्ञान : इस ज़मीं से आसमां तक मैं ही मैं हूँ, दूसरा कोई नहीं

मैं अहंकारी हूँ, तुम भी अहंकारी हो और वो भी… निरपवाद रूप से सभी अहंकारी हैं… ऐसा भी नहीं कि बहुत बड़े-बड़े अहंकार पाले हों… छोटे-छोटे, बहुत तुच्छ, टुच्चे से अहंकार पाले हुए हैं. क्या खूब लिखता हूँ मैं, क्या खूब दिखता हूँ मैं, कितनी ऐशो-आराम की ज़िन्दगी जुटाई है मैंने खुद के लिए और […]

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जब मशीनें करेंगी हमारा काम, और हम करेंगे चेतना की खोज : सद्‌गुरु

इस बार सद्‌गुरु हमें उस दिन के बारे में बता रहे हैं, जब हमारे सभी काम मशीनों द्वारा होंगे और हमारे पास काफी खाली समय होगा. वे बताते हैं कि तब हमें चेतना की खोज की जबरदस्त जरुरत महसूस होगी. याद्दाश्त से पूरी तरह से मुक्त चीज़ ऐसी कोई भी चीज जो स्मृति(याद्दाश्त) के जमा […]

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प्रेम की भिक्षा मांगे भिखारन : कान्हा देख तेरी गोपियाँ तड़प रहीं…

कहते हैं विधवाएं हैं, परित्यक्ता हैं, सताई हुईं, बेघर, बच्चों ने घर से निकाल दिया या खुद ही बच्चों के दुर्व्यवहार से घर छोड़ आईं, कुछ जीवन की तलाश में, कुछ मृत्यु की तलाश में तो कुछ मोक्ष की तलाश में… कारण कई हैं, सामाजिक और दुनियावी स्तर पर प्रकट कारणों का होना आवश्यक भी […]

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