मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग

अध्यात्म के रंगमंच पर जीवन का किरदार…

मुझसे किसी को किसी बात पर ईर्ष्या नहीं हो सकती, लेकिन बिस्तर पर करवट बदलते रहने वालों को मेरी इस आदत पर अवश्य ईर्ष्या हो सकती है कि ध्यान बाबा

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एक मुलाक़ात : डॉ. बशीर बद्र साहब से

न जी भर के देखा, न कुछ बात की, बड़ी आरज़ू थी मुलाकात की! डॉ. बशीर बद्र साहब की लिखी गई और चन्दन दास जी की आवाज़ में इस गज़ल

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तू खाली-सी जगह हो गया, जिसमें मैं भर आई हूँ

हर एक के जीवन में ऐसा क्षण अवश्य आता है जब वह रिक्तता के चरम बिंदु पर पहुँच जाता है. जीवन में यह रिक्तता दो तरफ से काम करती है,

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बचिए एनर्जी वैम्पा़यर्स से : क्योंकि खाली दिमाग़ शैतान का घर

ईश्वर की एक बहुत असीम अनुकंपा है हम मनुष्यों पर कि उन्होंने हमें इतना ज़्यादा सक्षम दिमाग बख्शा. बिल्कुल धरती पर उतरी पहली गंगधार की तरह, पवित्र और एक कोरे

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कविताएं कुछ प्रेम पगी

उसके लिए भी, जिसका चेहरा स्मृति में धुंधला हो गया है, पर उसका राशिफल आज भी पढ़ता हूँ, और उसके लिए भी जो आभासी संसार मे रहती है, पर लगता

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मुझ जंगली का मन तो जंगल में ही भटकता है

बचपन के दिनों में खाए गए फलों को याद करती हूँ तो दो तीन चीज़े दिमाग में कौंध जाती है, और मैं ‘हाय वो भी क्या दिन थे’ सोचकर बचपन

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संतानवती की ओर से माँ शीतला को धन्यवाद

यह तस्वीर देखकर किसी के मन में ‘आस्था’ जागेगी, किसी के मन में ‘अन्धविश्वास’… लेकिन इसे देखकर मेरे हृदय के अश्रु कुण्ड में एक बड़ी सी लहर जागी और भरे

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