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Category: July 2018

अलविदा पीड़ा के राजकुंवर नीरज

जीवन कटना था, कट गया अच्छा कटा, बुरा कटा यह तुम जानो मैं तो यह समझता हूँ कपड़ा पुराना एक फटना था, फट गया जीवन कटना था कट गया ‘जीवन’ के लिये पहले ही उन्होंने ये अभिव्यक्त कर जता दिया कि उनके लिये वो महज़ एक पुराने कपड़े के फटने की तरह है और बिल्कुल, […]

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तुम आयीं जैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रस!

“तुम आयीं जैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रस!” ये श्री केदारनाथ सिंह हैं, और बड़े दिनों से इस कविता को गुनगुनाते हुए मेरे हृदय में बह रहे हैं। वही केदार, जिनके लिए “जाना” हिंदी की ख़ौफ़नाक क्रिया थी! वही केदारनाथ, जो स्वयं को नदियों में चम्बल और सर्दियों में बुढ़िया का कम्बल कहते थे! […]

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नगरवधू से तवायफ और फिर वेश्या बनने का सफ़र

मैं पवित्रता की कसौटी पर पवित्रतम हूँ क्योंकि मैं तुम्हारे समाज को अपवित्र होने से बचाती हूँ। मैं अपने अस्तित्व को तुम्हारे कल्याण के लिए खोती हूँ स्वयं टूटकर भी, समाज को टूटने से बचाती हूँ। और तुम मेरे लिए नित्य नयी दीवार खड़ी करते हो, मैं तो यहाँ स्वाभिमान के साथ तलवार की नोंक […]

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देवकी की आँखों का प्यार, रिमझिम बरसता दुलार

देवकी चौदह वर्ष की हो गई थी। जवानी में उसने खूब दूध दिया और बच्चे भी। बछिया तो रामधीन रख लेता था पर चार बछड़े जो हुए ना जाने कहां भेज दिए रामधीन ने। जब-जब बछड़े उसके पास से ले जाए गए देवकी बहुत कलपी, सींग चलाए, खूंटे में बंधे-बंधे फड़फड़ाई पर ले जाने से […]

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मानो या ना मानो : क्या मार्गदर्शन करती हैं आत्माएं?

एक खुशहाल परिवार, न पैसे की दिक्कत, न आपसी कलह, न कोई और किल्लत… फिर ऐसा क्या हुआ कि दो भाइयों के पूरे परिवार ने एक साथ जान दे दी। दिल्ली के बुराड़ी इलाके में 11 लोगों की खुदकुशी की घटना ने देश भर को झकझोर कर रख दिया है। मामले में अभी परिवार के […]

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कुछ परियां काली भी होती हैं!

RENEE KUJUR: मन को बावरा बनाता, बाला का सांवरा रंग जब किस्मत मेहरबान होती है तो वो रंग नहीं देखती कि गोरी की किस्मत चमकाना है या काली की, बल्कि यदि रंग देखकर ही किस्मत चमकती होती तो रात के काले आसमान पर चमकते चाँद और सितारों की तरह काले रंग पर अधिक चमकती हुई […]

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फेसबुक अड्डा : शून्य का संगीत

प्रेम करते-करते हम चुपके से उसे रोप देते हैं बातों में, आदतों में, फिर हर बात में प्रेम उगता है.. – शून्य आभा-सी दुनिया में कुछ जगहें ऐसी होती हैं जहाँ शब्द से पहले वहां की तस्वीरें बोल पड़ती हैं… जैसे किसी गीत के बोल शुरू होने से पहले का संगीत… गौतम योगेन्द्र की फेसबुक […]

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बस एक दिन तुम लौट आना अपनी देह में…

हर देवता में कुछ मानवीय गुण होते हैं और हर मानव में कुछ असुर तत्व, इससे हम उसे देवता या मानव होने से पदच्युत नहीं कर सकते। वैसे ही किसी पुरुष में स्त्री तत्व प्रबल हो जाता है, तो कभी किसी स्त्री में पुरुष तत्व प्रबल हो जाता है, तो हम उसे उसके पुरुष या […]

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गुलज़ारी जादू : धन्नो की आँखों में रात का सुरमा और चाँद का चुम्मा

एक कवि के व्यक्तित्व का पैमाना उसके जीवन में घटित घटनाएं नहीं होती, उस जीवन में उन तमाम असंगत या कभी-कभी क्रूर घटनाओं के बावजूद वो अपनी कविता कितने नाज़ुक शब्दों के साथ प्रस्तुत करता है, इससे उसके चरित्र और व्यक्तित्व को देखा जाना चाहिए… सिर्फ देखा जाना ही काफी है, क्योंकि जिस गहरे तल […]

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सीधे रस्ते की ये टेढ़ी सी चाल है…

जीवन विविधता से भरा हुआ है और आज मुझे आप सबसे ढेर सारी अलग-अलग बातें करनी है…. तो मैं अपने किशोरावस्था से शुरू करती हूँ, बचपन मेरा बहुत यादगार नहीं रहा होगा इसलिए मुझे याद नहीं… वैसे भी ध्यान बाबा कहते है जब आप 14 वर्ष और 23 दिन की हुई थीं तब आपके जीवन […]

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