मानो या ना मानो : उसे जिसको चुनना होता है, वो चुन लेती है

कस्तूरी बहुत परेशान थी किस से कहे अपने मन की बात, कि तभी मकान मालकिन की बहू आयी। वो कलकत्ता…

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तुम आयीं जैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रस!

“तुम आयीं जैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रस!” ये श्री केदारनाथ सिंह हैं, और बड़े दिनों से इस कविता…

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नगरवधू से तवायफ और फिर वेश्या बनने का सफ़र

मैं पवित्रता की कसौटी पर पवित्रतम हूँ क्योंकि मैं तुम्हारे समाज को अपवित्र होने से बचाती हूँ। मैं अपने अस्तित्व…

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