मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग

मानो या ना मानो -7 : महासमाधि की झलक

पिछले महीने ‘युगन युगन योगी’ यह पुस्तक एक मित्र के माध्यम से जादुई रूप से पहुँची थी… यूं तो मैं आजकल सद्गुरु को दिन रात यूट्यूब पर सुनती रहती हूँ,

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मानो या ना मानो – 6 : अग्नि के मानस देवता

मानो या न मानो भाग-5 के आगे… चार साल बाद मिली उस ड्रेस को पहनने के बाद मैं खुद को कहीं की परी समझने लगी थी, उम्र को मैंने कभी

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मानो या ना मानो – 5 : इच्छापूर्ति के लिए कायनाती षडयंत्र

बात उन दिनों की है जब फैशन डिजाइनिंग का शौक चढ़ा था… अधिकतर ड्रेस मैं अपने हाथों से बना लेती थी, बात शायद 2002 के आसपास की होगी, विचार आया

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मानो या ना मानो – 4 : पिता के अंतिम दर्शन

पिता की मृत्यु के बाद लिखे दो लेख- सत्य से मुंह फेर कर खुद को समेट समेट कर जीते रहने की आदत औरत में जन्म के साथ पड़ जाती है,

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मानो या ना मानो – 3 : मुक्ति के यज्ञ में पिता ने दी आहुति

पिछले वर्ष जीवन एक चिलक हो गया था… चिलक जानते हो ना, पीठ की अकड़न से उठने वाली पीड़ा… भयंकर दर्द… असहनीय… ऐसा कि बस मुंह से अंतिम शब्द जो

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मानो या ना मानो – 2 : हनुमान दर्शन

(यह पिछले वर्ष मुझ पर हुए आध्यात्मिक प्रयोग पर लिखी सम्पूर्ण घटना जीवन पुनर्जन्म का एक अंश भर है) उन दिनों मैं पिछले जन्म में हुए किसी गुनाह के भय

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मानो या ना मानो : चन्दन-वर्षा

इश्क़ जब उम्र का चोला सिलता है तो उसमें मिलन की झालर में लगे तुरपाई के तंतु इतने संवेदनशील हो जाते हैं कि चेतना तक पैरहन के लिए लालायित हो

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रास्ते कभी बंद नहीं होते

मां बाप को बच्चों से ज़्यादा से ज़्यादा चाहिए, वो सब भी जो खुद कभी नहीं कर पाये। उम्मीद का पूरा टोकरा सिर पर लिए घूमते हैं आज के बच्चे।

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मानो या ना मानो : उसे जिसको चुनना होता है, वो चुन लेती है

कस्तूरी बहुत परेशान थी किस से कहे अपने मन की बात, कि तभी मकान मालकिन की बहू आयी। वो कलकत्ता से आई हुई थी। उनके परिवार में किसी की मृत्यु

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मित्रों! झोला उठाने का वक्त आ गया है

यूपी के बाज़ार से पॉलीथीन बेदख़ल हो गई। ठीक हुआ! जब किसी के जीवन में कोई दखलअंदाजी की बेइंतहा कर जायेगा तो उसे बेदखल होना ही पड़ेगा.. सौदा कैसा भी

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