मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी

जीवन के सप्त रंग, मेकिंग इंडिया के संग

बब्बा, मैं जीवन सिखाती हूँ

बात दो तीन दिन पहले की है, जब मेकिंग इंडिया की पिछले वर्ष की यादें अपनी फेसबुक वाल पर शेयर करने के लिए जैसे ही वेबसाइट पर 14 तारीख पर

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नायिका -15 : किताबें पढ़ी ही नहीं, सुनी भी जाती हैं!

नायिका – ये 8 रोटी वाली बात समझ नहीं आई…. समझा कर रखना कल आकर पढ़ूँगी… कहा था… कुछ याद है? विनायक – हम भी सारे जहान का बोझ उठाए

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VIDEO : पिक्चर अभी बाकी है दोस्त

तो पिछले वीडियो में मैंने वादा किया था कि जीवन के एक स्वर्णिम नियम के बारे में बताऊंगी जो मैंने जीवन के व्यक्तिगत अनुभवों से जाना है… बाकी आपने बड़े

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यात्रा : झुमका गिरा रे, बरेली के बाज़ार में

शायद ही कोई होगा जिसने यह गाना नहीं सुना होगा, लेकिन आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि आखिर झुमका बरेली में ही क्यों गिरा, जबकि दिल्ली का

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प्रेम कहानी : हौसलों की उड़ान

लड़की अनमनाई हुई सी उठी चूल्हे को आँच लगाते हुये. शायद गोवर्धन चाचा (दूध वाले) आवाज दे रहे थे. गोवर्धन चाचा से अभी दूध की बाल्टी ले ही रही थी

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व्यंग्य : विश्व पुस्तक मेले के बहाने

देवांशु तेरे कितने नाम…. मैं लगभग आश्वस्त हो चुका हूं कि लिखने वालों में से अधिकांश बहुत स्वार्थी, बेईमान और पिलपिले किस्म के भावुक हैं। इन्हें शब्दों के जाल में

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शकुन शास्त्र – 3 : सबकुछ पूर्व नियोजित और सुनिश्चित है

शकुनों में हमें असम्भावना इसलिए प्रतीत होती है कि हम परिणामों को निश्चित नहीं मानते. फ्रांस के किसी वैज्ञानिक ने एक समुद्रीय पौधे को बाहर स्थल पर लगाया और उस

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