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Category: Jan (Fourth) 2019

नाग लोक का रहस्य – 1

बहुत छोटी थी जब श्रीदेवी की नगीना फिल्म आई थी, और मैं उस फिल्म से इतनी प्रभावित हुई थी कि दर्पण के सामने खड़े होकर दिन भर ‘मैं तेरी दुश्मन, दुश्मन तू मेरा, मैं नागिन तू सपेरा’ पर नृत्य करती रहती थी. श्रीदेवी की भाव भंगिमाओं की हूबहू नक़ल उतारने का प्रयास करती थी. उन […]

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नायिका -16 : आप सामने हो तो भला क्यों कोई पलक झपकने जितना समय भी गंवायेगा?

नायिका – अब आपकी उम्मीद कितनी बड़ी है ये तो मुझे नहीं पता ना…. ख़त तो बहुत बड़ा नहीं है, हाँ आपके गाने सुनते हुए जो महसूस किया उसे कमेंट्स में डालती गई… देख लेना… और जाऊँ मतलब? तुम जाते ही कहाँ हो….. भूत जो हो मँडराते रहते हो आसपास….. ऊपर से अपनी आँखें भी […]

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पाणिनि, संस्कृत भाषा का गौरव और आधुनिक विज्ञान

विश्व के सर्वकालीन महान गणितज्ञों में से एक श्रीनिवास रामानुजन ने अपने छोटे-से जीवन में क़रीब चार हज़ार प्रमेय दिए थे। उनमें से कई चमत्कारिक प्रमेयों के बारे में जब कैम्ब्रिज के गणितज्ञ जे.एच.हार्डी ने आश्चर्यचकित होकर उनसे पूछा कि यह कैसे सोचा तो रामानुजन ने उत्तर दिया, देवी नामगिरि ने स्वप्न में आकर बता […]

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स्वामी रामानंद, कबीर और वामपंथी षडयंत्र

हमने जब इतिहास पढ़ना शुरू किया तो भक्ति काल और धार्मिक आंदोलन की भूमिका में यदा-कदा स्वामी रामानंद के बारे में एक-आध पंक्तियां पढीं । जहां तक मेरी स्मृति साथ देती है, मैंने इससे अधिक उनके बारे में नहीं पढ़ा । फिर कुछ वर्ष बीत गए । इस दौरान इतिहास को और सुसंस्कारित किया गया! […]

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कहानी : सोलह साँसें, द्वार दूसरी दुनिया का

बिस्तर पर चढ़ने के बाद पहले चार साँसें चित्त अवस्था में लो, फिर आठ साँसें दाईं करवट से, फिर सोलह साँसें बाईं करवट से…. आपका यह सोलह साँसों वाला कंसेप्ट सुनकर तो मुझे वह गीत याद आता है… एक सौ सोलह चाँद की रातें और एक तुम्हारे काँधे का तिल??? हाँ वही तो… ठीक है […]

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रुद्राक्ष

“रुद्राक्ष” के विषय में प्रसिद्ध उक्ति है : “रुद्राक्ष धारयेद्बुध:”। [ अर्थात् ज्ञानीजनों को रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। ] जहाँ “रुद्राक्ष” की चर्चा होती है, वहां धर्म और विज्ञान एक दूसरे से भिन्न हो जाते हैं! विज्ञान कहता है : “पहाड़ों व पठारों पर समुद्र तल से क़रीब दो हज़ार मीटर तक पाए जाने वाले […]

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शकुन शास्त्र – 4 : अनुभव करें प्रकृति के सूक्ष्म प्रभावों को

अनेक बार हम अनुभव करते हैं कि हमारा मन अकारण खिन्न हो गया है. पीछे कोई दुखद संवाद आता है. अनेक बार हम अनुभव करते हैं कि अमुक कार्य प्रारम्भ करने में मन की कोई शक्ति रोक रही है. कई बार हम किसी प्रियजन को यात्रा में जाने से रोकते हैं. उस अंत: प्रेरणा का […]

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