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Category: Feb (Third) 2019

AskAmma : पश्चिम तुम्हें देख अचंभित है, तुम कब झांकोगे अपने मन में पूरब वालों!

कुछ दो तीन वर्षों पहले जिन दिनों मार्क जुकरबर्ग की नीम करोली बाबा से मिलने आने वाली खबर चर्चा में थी, तब मेरे पास एक फेसबुक मित्र का सन्देश आया – वैसे एक बात समझ नहीं आई, स्टीव जॉब्स और फेसबुक वाले मार्क तो नीम करोली बाबा से प्रेरणा ले गए और दुनिया बदल डाली, […]

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Menstruation Taboo : सैनिटरी पैड्स कंपनी की ठगी और समाधान

बात उन दिनों की है जब सेनिटरी पैड्स पर बढ़े हुए टैक्स को लेकर एक ओर बहस चल रही थी, दूसरी ओर अक्षय कुमार ‘पैडमेन’ लेकर आ रहे थे। यहां एक तमिळ पुरुष को याद करना प्रासंगिक होगा, जिसने अपनी पत्नी के लिए कई वर्ष जतन करके पैड बनाया और लोक-लाज से डरकर पत्नी उनको […]

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नायिका -19 : इतनी मिलती है सूरत से तेरी गज़ल मेरी, लोग मुझको तेरा महबूब समझते होंगे

विनायक – हाँ नायिका!!! है ना कमाल कि ज़िंदा हो!!!! लेकिन ऐसा लग रहा है, हो नहीं!!!! मरनेवाले के लिए कहा जाता है कि भगवान को प्यारा हो गया, गणेश को भी तो भगवान ही मानते है ना?? देखो खजराना जा कर!!!!! नायिका – मर गई नायिका… खजराने वाले गणेशजी, क्या मरने के बाद भी […]

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नाग लोक का रहस्य – 4 : उद्गम और टोटेमवाद

पिछली तीन श्रृंखला मेरे अनुभवों और गुरुओं से प्राप्त ज्ञान का लेखा जोखा है, जो मुझे नाग लोक के रहस्य को जानने के लिए जिज्ञासु बनाते हैं. पिछली श्रृंखला में आध्यात्मिक गुरु श्री एम द्वारा उद्घाटित कई रहस्यमयी घटनाओं को पाठकों ने सिरे से ख़ारिज कर दिया, जो अपेक्षित था. लेकिन जब आप नाग लोक […]

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शिक्षक : स्वयं की ज्योति को अखंड रखकर ही एक दीपक प्रज्जवलित कर सकता है दूसरे दीपक को

एक शिक्षक वास्तव में कभी भी नहीं पढ़ा सकता यदि वह स्वयं आज न पढ़ रहा हो, एक दीपक दूसरे दीपक को कभी भी प्रज्जवलित नहीं कर सकता यदि वह स्वयं अपनी ज्योति को जलती हुई न रखें- रविंद्रनाथ ठाकुर. शिक्षण एक प्रक्रिया है जो आवश्यक नहीं कि कक्षा में ही घटित हो. यह तो […]

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लोहा सिंह : जब लेखक खुद प्रसिद्ध हो गए नाटक के चरित्र के नाम से

अभी कुछ महीनों पहले हिंदी व भोजपुरी के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री भगवती प्रसाद द्विवेदी से बात हुई थी . चर्चा हो रही थी पुरबी के बेताज बादशाह महेंदर मिसिर पर लिखी एक पुस्तक की भाषा पर. द्विवेदी जी ने कहा कि उस किताब की भाषा भोजपुरी मिश्रित हिंदी है जैसी भाषा लोहा सिंह नाटक की […]

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मर्द तांगेवाला

दो ऊंचे पहियों की एक खुली गाड़ी जिसे एक घोड़ा खींचता है, उसे तांगा या टमटम कहते हैं। इसे हांकने वाला आगे बैठता है और सवारियां पीछे। विश्व में जब पहिए का आविष्कार हुआ तो यातायात व सामान ढुलाई में सहूलियत हुई। पहिए की जानकारी के बाद ही रथ, तांगा, बैलगाड़ी, ट्रेन,बस व कार बने। […]

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