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Category: August 2018

मानो या ना मानो : खजाने के रखवाले या मार्गदर्शक तीन बाबा

ये हैं सुशील जी उर्फ पिल्लू और उनके सुपुत्र रोहित. ये दोनों घरों में पुताई का काम करते हैं, जब मेरे बच्चों ने दीवारों पर जी भर कर चित्रकारी कर ली तब दादाजी ने इन दोनों को बुलाया और पूरे घर भर की पुताई करवाई. अब आप सोच रहे होंगे इन दोनों में ऐसी क्या […]

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#AskAmma : कैसे होती है पुस्तक यात्रा?

इस बार पुस्तक यात्रा शुरू हुई थी तब जब सोशल मीडिया की एकरसता से तंग आकर मैंने एक हफ्ते का अवकाश लिया। और उस एक हफ्ते में कुछ नई किताबें पढ़ीं, कुछ नई किताबों का ज़िक्र सुना और कुछ नए विषयों के बारे में जाना, यू ट्यूब पर Dr BM Hegde का ढाई घंटे का […]

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एक थी अमृता : और एक थी सारा

सुबह उठी तो सीने में सारा कुलबुला रही थी… किसी पर चिढ़ रही थी किस पर नहीं जानती… शायद सारा भी नहीं जानती थी. इसलिए अपनी चिढ़ या कहें कुलबुलाहट उसके लफ़्ज़ों में उतर आती. इसलिए सारा की लिखी नज़में किसी स्केल पर नहीं बनती थी. उसको नापने का पैमाना रुके हुए आंसुओं का जमावड़ा […]

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हे री सखी मंगल गावो री, धरती अम्बर सजावो री, आज उतरेगी पी की सवारी

व्यवस्था चाहे आध्यात्मिक हो या सामाजिक… जब जब व्यवस्था और प्रेम में से किसी एक को चुनने का मौका आया मैंने सारी व्यवस्थाओं को ताक पर रखकर प्रेम को चुना…. ऐसा भी नहीं है कि मैंने व्यवस्था को चुनने का प्रयास नहीं किया, किया लेकिन उसमें हमेशा एक भय व्याप्त रहा… भय किसी वस्तु का […]

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मंटो…

जब गुलाम थे तो आज़ादी का ख़्वाब देखते थे और अब आजाद हैं तो कौन सा ख्वाब देखें?? फिल्म ‘मंटो’ का ट्रेलर रिलीज़ हुआ है कुछ दिन पहले, जिसमें मंटो के किरदार में ‘नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी’ हैं, फिल्म का डायरेक्शन ‘नंदिता दास’ ने किया है। ट्रेलर में ये 2 लाइन सुनकर ही समझ आता है कि […]

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अनोखा रिश्ता

उन दोनों को देखकर कोई नहीं कह सकता था कि दोनों की उम्र में 8 साल का अंतर है और जिस तरह दोनों हमेशा साथ घूमते दिखाई देते थे, साथ फिल्म देखने जाते, साथ रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते, कोई अंदाज़ा नहीं लगा पाता था कि आखिर दोनों में रिश्ता क्या है. शिक्षा जब कॉलेज […]

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पुस्तक समीक्षा : ककनमठ, एक ऐतिहासिक प्रेम कहानी

ऐतिहासिक पुरातत्विक पृष्ठभूमि पर आधारित इस उपन्यास में भारत के अंधकार-पूर्ण काल-खण्ड को कथांकित किया गया है। सम्राट हर्षवर्धन के पश्चात् केंद्रीय सत्ता किसी की भी न रही, जिसकी वजह से देश में छोटे-छोटे राज्य स्थापित हो गए। इन राज्यों के बीच सामंजस्य न था। इस्लामी आक्रान्ताओं ने इस फूट का लाभ उठाया। किन्तु इस […]

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प्रेम पत्र : इश्क़ की दास्तान है प्यारे, अपनी-अपनी ज़बान है प्यारे

ये नहीं कि मैं बिना बात किए नहीं रह सकता. रह सकता हूँ. सिर्फ ये एहसास ही काफी होता है कि कोई है, जिससे मैं जब चाहे बात कर सकता हूँ. पिछले 53 घंटों से मैं चुप हूँ. आसपास लोग भी हैं जिनसे मैं कह रहा हूँ, वो सुन रहे हैं, वो कह रहे हैं, […]

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एक थी अमृता : मेरी सेज हाज़िर है, पर जूते-कमीज़ की तरह तू अपना बदन भी उतार दे

आत्ममिलन मेरी सेज हाज़िर है पर जूते और कमीज़ की तरह तू अपना बदन भी उतार दे उधर मूढ़े पर रख दे कोई खास बात नहीं बस अपने अपने देश का रिवाज़ है…… एमी माँ का एक-एक शब्द उनके अनुभवों और अनुभूति की यात्रा है. उस स्तर पर जाकर समझ पाना तो मुमकिन नहीं, जिस […]

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मानो या ना मानो : साक्षात माँ काली से बातें करता है वह!

आठ साल बाद हरेन्द्र फिर से मेरी ज़िंदगी में अचानक से आ गया है. दो-तीन दिन पहले मुझसे मिलने ग्वालियर से दिल्ली आया था. पहली बार 2010 में एक मित्र हरेन्द्र को मेरे कमरे पर मिलने के लिए ले आये थे. उन्होंने मुझे चुपके से बताया था कि इस पर माँ दुर्गा का वास है, […]

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