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नदिया के पार वाले वास्तव में उस पार ही छूट गए

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स्कूल के मित्र, इंजीनियरिंग के मित्र, MBA के मित्र, इंदौर के मित्र, निरमा के मित्र, अहमदाबाद के मित्र, बंगलोर के मित्र और अब फेसबुक के मित्र.

इनके ऊपर रिश्तेदारों की पूरी फौज. परबाबा और परदादी वाली पीढ़ी के अलावा हर प्रकार का रिश्ता देखने समझने को परिवार में ही मिल गया.

अभी कुछ दिन पहले तक सब दोस्तों की पत्नियों को भाभी जी ही बुलाता था, भाभी का मतलब समझने के लिए “नदिया के पार” शायद सबसे सही रहेगी.

कुछ समय से ज्ञात हुआ कि लोगों को भाभी शब्द सुनकर कुछ दिक्कत सी महसूस हो रही है…. फिर TV पर एक भोंडा सीरियल देखा, और दुनिया भर में भाभी का मतलब बदलते देखा. आज की जेनरेशन का बेंचमार्क है – “भाभी याने शादीशुदा महिला जिसे इस्तेमाल किया जा सके”

कुंठा ग्रसित मेरी जेनरेशन ने भी इसको बखूबी पचा लिया है, और उनमें नदिया के पार वाले वास्तव में उस पार ही छूट गए.

इस दुनिया मे हर कंप्यूटर को कई GB पोर्न से लाद दो, कामसूत्र कॉलेजों में पढ़ाओ, वैश्यावृत्ति लीगल कर दो, एक इंसान को दस बीवी, एक बीवी को दस मर्द दे दो.

लेकिन, रिश्तों को इसमें मत घसीटो. ये खेल मत चलाओ कि हर रिश्ते के पीछे सेक्स ही होता है.

रिश्ता तो रिश्ता होता है
सेक्स तो सेक्स होता है
सेक्स के लिए रिश्ता नहीं होता

पुराने ज़माने के लोगों ने बड़ी बड़ी बातें करी लेकिन औरत को पर्दे में ठूस दिया, हर आदमी की जागीरी में एक औरत बांध दी, जो भी थोड़ा इधर उधर हुआ उसको गांव से भगा दिया या मार दिया.

इन बुड्ढों ने प्रेशर कुकर में बहुत भाप भर दी, वो भाप इस जेनरेशन में निकल रही है. आज के लड़कों को औरत के ढंके तन को खोल डालने की भयंकर तृष्णा है, उसके तन को इस्तेमाल करने के लिए चालें बुनना आम बात है….

आज की लड़कियां भी शरीर का उपयोग करके आगे बढ़ने को गलत नहीं मानती, एक कैलकुलेशन फिट कर लिया है, कितने शारीरिक इस्तेमाल से कितना काम करवा लेना चाहिए.

वास्तव में मुझे कोई दुःख नहीं होता जब कोई-स्त्री पुरुष एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं, या समाज के हिसाब से अनैतिक सम्बन्ध बनाते हैं.

लेकिन मुझे दुःख होता है जब लोग झूठ का सहारा लेकर, रिश्तों का सहारा लेकर स्त्री की केवल देह पाना चाहते हैं….या स्त्री अपनी देह और झूठ से पुरुष से काम निकलवा लेना चाहती है.

खैर ये बात है बच्चों और बड़ों तक पहुंचाने की, नहीं पहुंचा पाएंगे तो भाभी के अलावा बहन, भाई, माँ बाप सब तैयार है youtube आदि पर….

(कुछ देवियां फारवर्ड हो गयी हैं, भाभी कहलवाना उनको बेहनजी टाइप्स हरकत लगती है. Ok कोई बात नहीं, केवल इतना निवेदन है कि ये फॉरवर्ड होने की निशानी नहीं है, ये TV के पीछे (या बैकवर्ड) होने की निशानी है)

  • अभिषेक सचान

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