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कुछ परियां काली भी होती हैं!

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RENEE KUJUR: मन को बावरा बनाता, बाला का सांवरा रंग

जब किस्मत मेहरबान होती है तो वो रंग नहीं देखती कि गोरी की किस्मत चमकाना है या काली की, बल्कि यदि रंग देखकर ही किस्मत चमकती होती तो रात के काले आसमान पर चमकते चाँद और सितारों की तरह काले रंग पर अधिक चमकती हुई दिखेगी।

और ऐसा ही कुछ हुआ RENEE KUJUR के साथ जो आज Indian Rihanna के नाम से ख्याति प्राप्त कर रही है।

भारत में जहाँ चेहरे की सुन्दरता गोरा रंग, तीखी नाक और पतले होंठ से नापी जाती है वहीं इसके ठीक विपरीत RENEE KUJUR ने ये साबित कर दिया कि कुछ परियां काली भी होती हैं।

आपका मेरा रंग तो फिर भी साफ़ है, नाक जैसी भी है कम से कम तीखी तो है, लेकिन भाग्य RENEE KUJUR जैसा हो तो छत्तीसगढ़ के जंगल में रहनेवाली 3 साल की लड़की गांव के किसी कार्यक्रम में जो पहली बार स्टेज पर आई तो उसके बाद उसकी यात्रा नहीं रुकी और आज वह भारतीय रेहाना के नाम से वायरल हो रही है.

 

2016 में ऐसे ही एक और मॉडल Khoudia Diop की तस्वीरें वायरल हुई थीं…

सांवरी बावरियों के लिए राहुल सिंह कहते हैं –

पियरकी, ललकी गोराई अच्छी है, ठीक है, पर जो बात सांवरी सूरत में होती है, वो अलग ही है। ताम्रवर्णी सूरत पर काली लम्बी लटें, धनुषाकार भौंहें, घनी पलकें, किनारों पर कटावदार गाल, उन्नत नासिका, पतले अधर युग्म एक अलग ही आभामंडल रचते हैं।

सुन्दरता किसी रंग पर आश्रित नहीं होती, सांवली सलोनी सूरत भी, किसी गौर वर्णी को मात दे सकती है, सांवलेपन में आत्मविश्वास नज़र आता है।

सांवली बालाएं जब बेख्याली में मुस्कुराते हुए चलती हैं तो ज़माना देखता है, घुंघराले बालों को माथे से हटाने का उपक्रम हो, या लाज से आँखें झुका लेना हो, ये ताम्रवर्ण की चमक दूर तक नज़र आती है।

सांवली बाला के मुख पर पसीना शोभायमान होता है, श्रमकण आनंददायक होते हैं। सांवरे पतले नर्म हाथ, सांवरी कलाइयों में स्वर्ण चूड़ामणि, कंगन अलग ही खिलता है। सांवरी बालाएं, स्वर्णाभूषणों में अति आकर्षक प्रतीत होती हैं।

सांवरी बालाएं, मन को बावरा बनाती हैं…

लेकिन तस्वीर का एक दूसरा रूप भी होता है… यहाँ हर कोई रिनी कुजूर की तरह खुशकिस्मत नहीं होता… कुछ ऐसी काली स्वरूपा भी होती हैं जो गरीबी और मजबूरियों संग ब्याह दी जाती हैं… तो कुछ हिमा दास की तरह अपना शक्ति स्वरूप दिखाकर माथे पर स्वर्ण सा सूरज चमकाती है… आइये पढ़ते हैं उदयन के संस्थापक अजित सिंह के शब्दों में ममता की कहानी –

Athletics का Track देखा है कभी?
जो अंतिम मने बाहर वाली lane में दौड़ता है उसे आगे खड़ा किया जाता है।
जानते हैं क्यों? क्योंकि उसे पहली lane में दौड़ने वाले कि तुलना में ज़्यादा दौड़ना पड़ता है।
मैं हमेशा ये कहता हूँ कि बेटियों की उपलब्धियों को बेटों से ज़्यादा महत्व मिलना चाहिए। बेटा अपने रास्ते पे निश्चिंत निर्बाध दौड़ता चला आता है।
बेटी तो बेचारी उन रास्तों पे चल के आती है जहां पग पग पे Mines बिछी हैं…. ज़िंदा Mines…. जिनपे पैर पड़ते ही चीथड़े उड़ जाते हैं।
बेटियां की सफलता इन Mines बिछे रास्तों पे चल के प्राप्त होती है।

हाथ में बोतल पकड़े इस बेटी को पहचानते हैं।
जी हाँ… ये ममता है।
उदयन की ममता… उम्र यही कोई 13 साल।

ममता ने स्कूल आना बंद कर दिया है। बंद कर दिया नहीं बल्कि माँ बाप ने बंद करा दिया… 13 साल की ममता के लिए लड़का खोज लिया है माँ बाप ने… जल्दी ही उसकी शादी कर दी जाएगी।

मैंने उसकी माँ को बहुत समझाया। कहा कि पढ़ने दो। ये भी समझाया कि अगर 18 बरस की होने पर ममता का बियाह करोगी तो सारा खर्च मैं करूंगा… उदयन की हर बच्ची को समझाया, लालच दिया कि अगर 10th पास करोगी और 18 वर्ष के बाद शादी करोगी तो शादी का सारा खर्च उदयन वहन करेगा …… हर बेटी को शादी में मोटर साइकिल, फ्रिज और वाशिंग मशीन देंगे…. ये लालच भी दिया…. इसके बावजूद… 13 साल की ममता की शादी तय कर दी गयी…. जानते हैं क्यों ??

ममता अब बच्ची नहीं रही… 13 साल की हो गयी है। 13 साल की लड़की सयानी हो जाती है। अब वो Teenager है। शरीर से भी सयानी हो गयी है। खूबसूरत तो वो बचपन से ही थी …… अब यही खूबसूरती उसके जी का जंजाल बन गयी है…. माँ को हमेशा बेटी की चिंता लगी रहती है… कल को कोई ऊक चूक हो गयी तो क्या मुंह दिखाएगी समाज में, लड़की का किसी से बोल चाल बोले तो नयन मटक्का इश्क़ मुश्क अफेयर हो गया तो कितनी बदनामी होगी गांव में…. सो इन सभी समस्याओं का सबसे सरल उपाय…. लड़की का छोटी उम्र में ही ब्याह कर दो…. मांग में सिंदूर लिए घूमती लड़की पे बहुत ज़्यादा ध्यान नही देता समाज…. छोटी उम्र यानी 10 – 12 साल की उम्र में बियाह दो, जब 17 – 18 कि हो जाये तो गौना कर दो….

अब जबकि ममता का बियाह तय हो गया तो स्कूल जा के क्या करेगी ममता? इसलिए ममता को घर बैठा दिया गया है , अब चूल्हा चौका करती है ममता, और माँ की कड़ी निगरानी में रहती है ममता…. 13 साल की ममता को उम्र कैद हुई है….

ऐसी ही एक ममता ने कल विश्व जूनियर एथेलेटिक्स में 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीत लिया…. हिमा दास की उपलब्धि का महत्व किसी लड़के के द्वारा जीते गए पदक से इसलिए ज़्यादा है कि लड़की ने बारूद बिछी सड़कों पे दौड़ के ये उपलब्धि हासिल की…. बेचारी लड़की की जद्दोजहद तो माँ के गर्भ में ही शुरू हो जाती है… भाग्यशाली हुई तो बचेगी वरना भ्रूण हत्या ही हो जाएगी…. जन्म भी गयी तो किसी तरह आधा पेट खा के जियेगी…. भाई दूध मलाई खायेगा तो बहन सूखी रोटियां …… भाई 8th के बाद UP कॉलेज पढ़ने जाएगा तो बहन प्राइमरी में जाएगी… भाई IAS, PCS की तैयारी करने इलाहाबाद भेजा जाएगा तो बहन 8, 10 या 12 पढ़ा के बियाह दी जाएगी… एक जेल से दूसरी जेल में ट्रांसफर…

ऐसे में कोई ममता या कोई हिमा दास इन Mines बिछी सड़कों पे दौड़ते दौड़ते अगर वर्ल्ड कप के Victory Stand तक जा पहुंचे तो उसके लिए ज़्यादा तालियां बजनी चाहिए।

– प्रस्तुतकर्ता माँ जीवन शैफाली

 

काली

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