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Bipolar Mood Disorder : बहुत ही कन्फ़्यूजिंग बीमारी

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हम भारतीय बोलते बहुत हैं इसीलिए बचपन से ही हमें विशेषण सुनने की आदत पड़ जाती है…. अरे यह तो आलसी है, वह तो बहुत गुस्सैल है… फलां तो नवाबजादा है जब देखो तब गाड़ियों, लड़कियों पर पैसे फूंकता रहता है… वह लड़की देखो… अपने आप को मिस इंडिया समझती है… उसका मेकअप कितना लाउड रहता है…. आदि आदि.

विशेषण सुनते सुनते ही हम बड़े होते हैं इसलिए कब हम खुद भी विशेषण देना प्रारम्भ कर देते हैं हमें खुद पता नहीं चलता… आसान काम है यह… बोला और छुट्टी… हम इसकी वजहों के पीछे जा ही नहीं पाते कि अगला या अगली कुछ अलग है तो क्यूँ हैं?

अति सर्वत्र वर्जयेत

इस प्रकार के लक्षणों का अति में होना भी सामान्य नहीं है… लेकिन विशेषण सोचने का मौका नहीं देते…

आज मैं बात करूंगी बाय पोलर मूड डिसॉर्डर की जिसे पहचानना इन्हीं विशेषणों के चलते आम जन के लिए थोड़ा मुश्किल होता है. इसीलिए मैंने इसे कन्फ़्यूजिंग बीमारी कहा.

जो व्यक्ति इन लक्षणों वाले व्यक्तियों के साथ रह रहे होते हैं उन्हें पता है कि वे कितनी मुश्किल से उन्हें और अपने आप को संभाल रहे होते हैं. अक्सर बाय पोलर से ग्रसित व्यक्ति को खुद पता ही नहीं होता कि उसे कोई बीमारी भी है क्या? लेकिन एक बार रियलायज़ेशन आ जाये तो वे दवाओं और काउन्सलिंग के साथ एक नॉर्मल लाइफ जी सकते हैं.

चूंकि इसके लक्षणों का स्पेक्ट्रम बड़ा है और ज़रूरी नहीं कि सभी लक्षण किसी एक में हो ही हो… या कि सभी में बिलकुल एक जैसे ही लक्षण हों…. लेकिन फिर भी इन लक्षणों को कुछ केटेगरीज़ में रखा जा सकता है जो हर ग्रसित व्यक्ति में पाया जाएगा…

इसीलिए आज मैं यहाँ किसी एक केस की बात न कर उन लक्षणों को आसान भाषा में समझाने की कोशिश करूंगी ताकि आप भी इसे आसानी से समझ सकें व अपनी या दूसरों की मदद कर सकें.

( मैं इस बीमारी की वैज्ञानिक व्याख्या व इलाज की बात न कर डिटेल में सिर्फ लक्षणों की बात करूंगी… इलाज डॉक्टर के ऊपर छोडते हैं …)

जैसा कि नाम कह रहा है बाय पोलर मूड डिसोर्डर

बाय मने दो पोलर मने ध्रुव, ( मेनिया और डिप्रेशन). मूड का मतलब आप जानते ही हैं और डिसोर्डर मने गड़बड़ी होना. मतलब जब व्यक्ति के मूड में दोनों ध्रुवों पर समान गड़बड़ हो जाये.

मतलब एक ही व्यक्ति का मूड उत्तर और दक्षिण दोनों ध्रुव पर पहुँच जाये. जिसे कहावत के रूप में कहते हैं पल में तोला पल में माशा. पलक झपकते ही उस व्यक्ति का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच सकता है और अगले ही पल वह ऐसे शांत हो सकता है जैसे कुछ हुआ ही नहीं.

अब नाम की इस व्याख्या के साथ आपको समझने में आसानी हो रही होगी. तो यदि किसी ऐसे व्यक्ति को आप जानते हैं तो उसमें अब और लक्षणों की पड़ताल कर सकते हैं.

बाय पोलर से ग्रसित अधिकतर लोग कभी तो बहुत खुश रहेंगे और कभी बहुत उदास. यह ‘कभी’ कुछ घंटे से लेकर कुछ दिन या कुछ महीने तक भी हो सकता है. (खुश, उदास, गुस्सा, मस्ती आदि को ही हम मूड कहते हैं… है न?)

जब वे मेनिया मूड में होते हैं तब इस फेज में व्यक्ति बेहद एनर्जी, रचनात्मकता और चरम तक खुशी महसूस करता है.

व्यक्ति खूब बोलता है, बहुत हायपर एक्टिव होता है और बहुत कम सोने पर भी थका हुआ महसूस नहीं करता. अपने आप को बहुत महान समझता है.

ऐसे व्यक्ति खूब मने खूब मस्ती, हंसी मज़ाक करते हैं लेकिन आप यह देख सकते हैं कि वे अक्सर लोगों के सामने कुछ ऐसी हरकत भी कर जाते हैं जो सामान्य तौर पर सामान्य व्यक्ति द्वारा नहीं की जाती.

उन्हें अपने बारे में ऐसा लगता है कि वे बहुत खूबसूरत हैं या बहुत स्मार्ट हैं या जैसे वे कहीं के राजा महाराजा हैं. या उनके पास कोई सुपर पावर है और अक्सर वे खुद ऐसी बातें अपने मुंह से ही कहते हैं. (कोई भी सामान्य व्यक्ति अपनी ही तारीफ अपने ही मुंह से नहीं करता है जब तक कि वह सेल्फ एपरेजल फ़ार्म न भर रहा हो).

शुरुआत में मेनिया अच्छा लगता है लेकिन फिर यह आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है. परेशानी तभी आरंभ होती है. ऐसा होने पर व्यक्ति औकात से अधिक कर्ज ले कर बिना सोचे समझे सामान खरीद सकता है. बचत को जुए में उड़ा सकता है. अनुचित सेक्सुयल एक्टिविटी में पड़ सकता है.

ऑनलाइन फ़्लर्टिंग या ऑफलाइन फ़्लर्टिंग बहुत हद तक बढ़ जाती है. एक्स्ट्रा मेराइटल अफ़ेयर में भी जा सकते हैं वे. यदि एक से संबंध टूटा तो वे बिना गिल्ट दूसरे के साथ या कई बार बहुत से एक साथ संबंध भी चला लेते हैं. सेक्सुअली भी.

यदि उनसे तकरार करो तो वे अपनी इस हरकत को जस्टिफ़ाय भी कर देते हैं. और उन्हें इस बात का फर्क नहीं पड़ता. वह बेवकूफ़ाना इनवेस्टमेंट भी कर सकता है. यदि उन्हें इस तरह के व्यवहार न करने की धमकी दी जाय या डराया जाय तो कुछ समय के लिए वे यह व्यवहार बंद कर देते हैं लेकिन फिर कुछ दिन बाद वही ढाक के तीन पात. उन्हें यह महसूस ही नहीं होता कि वे कुछ गलत कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इस बीमारी का रियलाइज़ेशन ही नहीं है.

इसी फेज़ में व्यक्ति का गुस्सा बढ़ सकता है. वह हिंसक हो सकता है. यदि दूसरे लोग उसके प्लान के मुताबिक नहीं चलें तो गाली गलौज और मारपीट तक कर सकता है. यदि कोई उसके व्यवहार की आलोचना करे तो वह व्यक्ति उन्हें ही दोषी ठहरा सकता है.

इसी फेज़ में कुछ लोगों को कुछ आवाज़ें सुनाई देने लग जाती हैं या कुछ दिखाई देने लग जाता है जो वास्तव में सामने है ही नहीं. कुछ को रस्सी को साँप समझने का सा भ्रम भी हो जाता है.

उसके विचार जंप करते रहते हैं एक से दूसरे पर. कुछ लोग इतना जल्दी बोलते हैं कि सामने वाले समझ ही नहीं पाते कि वह क्या कहना चाह रहा है. कंसंट्रेशन पावर घट जाती है. बहुत जल्दी डिसट्रेक्ट हो जाते हैं. बिना परिणाम सोचे समझे लापरवाही से काम करते हैं.

कुछ व्यक्तियों में उक्त लक्षणों की डिग्री में कमी होती है. मतलब उनमें एनर्जी और खुशी तो चरम पर रहती है लेकिन वे डे टु डे के काम ठीक तरीके से निभाते जाते हैं. लोगों को लगता है की यह व्यक्ति अच्छे मूड में है. लेकिन ये कम डिग्री वाले भी बहुत गलत निर्णय लेते हैं जिसका प्रभाव इनके करियर, इनके सम्बन्धों, इनकी प्रतिष्ठा आदि पर भी पड़ता है.

यही सेम व्यक्ति मूड बदलने पर डिप्रेशन में भी जाते हैं. तब वे उदासी, खालीपन महसूस करते हैं. खुशी एंजॉय नहीं कर पाते. थके हुए रहने लगते हैं. अपने आपको सँवारने सजाने में कोई आनंद नहीं लेते जबकि एक समय पर वे इस एक्टिविटी को पूरे जोश के साथ करते थे.

भूख और नींद बिगड़ जाती है. वज़न बदलने लगता है. याददाश्त पर फर्क पड़ जाता है. अपने आप पर इन्हें शर्म आती है. अपने आप को वर्थलेस समझने लग जाते हैं. कुछ लोग तो आत्महत्या करने की भी सोचने लगते हैं.

यदि आप खुद में या किसी व्यक्ति में उपरोक्त में से अधिकांश लक्षण देखें तो बिना समय गवाएं मनोचिकित्सक से मिलें. क्योंकि समय के साथ इन लक्षणों में वृद्धि होगी. कई बार परिवारजन यह कहते हैं कि वह व्यक्ति तो मानने को तैयार ही नहीं है कि उसे कोई बीमारी है भी.

इसीलिए वह डॉक्टर के पास जाने को तैयार नहीं है. ऐसे में बहुत मुश्किल हो जाती है. ऐसे में उस व्यक्ति से संबन्धित कोई भी व्यक्ति एक बार अकेले जाकर भी डॉक्टर से मिल सकता है. वह मनोचिकित्सक को समस्या से अवगत कराये. फिर जैसी वे सलाह दें वह करें.

यह वाकई एक दुखदाई बीमारी है लेकिन निराश न हों क्योंकि समाधान भी है.

यदि आपके कोई स्पेसिफिक प्रश्न हों तो editor@makingindia.co पर मेल कर पूछ सकते हैं. क्योंकि इस बीमारी के लक्षणों की सूची बहुत लंबी है सो सभी का यहाँ उल्लेख कर पाना मुश्किल है. हालांकि बनती कोशिश मेरी यही रही है कि अधिकतर ज़रूरी लक्षणों का उल्लेख कर सकूँ.

  • सुनीता सनाढ्य पाण्डेय (Counselor)
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