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भारतीय भोजन थाली से गायब सेंधा नमक और अजीनोमोटो की सेंध

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एक समय था जब भारत की पारंपरिक रसोई में सिल बट्टे पर मसाले पीसते समय खड़ा नमक डाला जाता था. काला नमक और सेंधा नमक तो उपवास में खाया जाने वाला नमक था यानी इतना शुद्ध कि नमक खाने से भी व्रत ना टूटे.

फिर अचानक से वैश्वीकरण की चकाचौंध में हमें अपनी ही रसोई का नमक आयोडीनहीन बता दिया गया और फिर जो नमक रुपये दो रुपये में आ जा टा था उसमें न जाने कहाँ से अलग से आयोडीन मिलाकर महंगे दामों में बेचा जाने लगा.

बात यहीं तक रुकती तो भी ठीक था उसके बाद विदेशी खानों के साथ प्रवेश हुआ अजीनोमोटो नामक विषैले पदार्थ का. बीच में इसके विरोध में खूब हल्ला हुआ था, लेकिन यही हल्ला मचाने वाले युवा घर के बाहर Just For A Change के नाम पर चायनीज़ ठेले से लेकर फाइव स्टार होटल में खूब अजीनोमोटो खा रहे हैं…

और फिर एक उम्र के बाद डॉक्टर के पास जाते हैं कभी थाइरोइड को लेकर, कभी मोटापे को लेकर कभी हाई बीपी के नाम पर, घुटने का दर्द, कमर में दर्द, और ज़माने भर की बीमारियाँ….

फिर लाख आप आधुनिक जीवन शैली रूपी विलेन के सामने गिड़गिड़ाते रहे… सरदार मैंने आपका नमक खाया है… और वो यही कहेगा अब तू एलोपैथिक गोलियां खा…

जी, जितना आप पारंपरिक जीवन शैली को छोड़कर आधुनिकता के नाम पर विदेशी जीवन शैली अपनाएंगे इन गोलियों के गुलाम होते जाएंगे. और ये गोलियां भी कौन सा आपको बीमारी से मुक्त कर रही है, जैसे आप नमक के गुलाम हुए वैसे गोलियों के गुलाम हो जाओगे…

इसलिए स्वतंत्रता का एक अर्थ स्वस्थ रहना भी है…

इस विषय में स्वर्गीय राजीव दीक्षित ने बहुत सारगर्भित बात कही थी उसे अवश्य पढ़ें कि कैसे हमारी भारतीय भोजन की थाली से सेंधा नमक गायब कर दिया गया.

आप सोच रहे होंगे कि ये सेंधा नमक बनता कैसे है? आइये आज हम आपको बताते हैं कि नमक मुख्य कितने प्रकार होते हैं. एक होता है समुद्री नमक दूसरा होता है सेंधा नमक (rock salt).

सेंधा नमक बनता नहीं है पहले से ही बना बनाया है. पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को ‘सेंधा नमक’ या ‘सैन्धव नमक’, लाहोरी नमक आदि आदि नाम से जाना जाता है. जिसका मतलब है ‘सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ’.

वहाँ नमक के बड़े बड़े पहाड़ हैं, सुरंगे हैं. वहाँ से ये नमक आता है. मोटे मोटे टुकड़ो में होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन में मदद रूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है.

इससे पाचक रस बढ़ते हैं. तो आप ये समुद्री नमक के चक्कर से बाहर निकले. काला नमक, सेंधा नमक प्रयोग करे, क्योंकि ये प्रकृति का बनाया है ईश्वर का बनाया हुआ है. और सदैव याद रखे इंसान जरूर शैतान हो सकता है लेकिन भगवान कभी शैतान नहीं होता.

भारत में 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था. विदेशी कंपनीयां भारत में नमक के व्यापार में आज़ादी के पहले से उतरी हुई है, उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली भाली जनता को आयोडीन मिलाकर समुद्री नमक खिलाया जा रहा है.

हुआ ये कि जब ग्लोबलाईज़ेशन के बाद बहुत सी विदेशी कंपनियों (कैपटन कुक) ने नमक बेचना शुरू किया तब ये सारा खेल शुरू हुआ! अब समझिए खेल क्या था? खेल ये था कि विदेशी कंपनियों को नमक बेचना है और बहुत मोटा लाभ कमाना है और लूट मचानी है तो पूरे भारत मे एक नई बात फैलाई गई कि आयोडीन युक्त नामक खाओ, आयोडीन युक्त नमक खाओ!

आप सबको आयोडीन की कमी हो गई है. ये सेहत के लिए बहुत अच्छा है आदि आदि बातें पूरे देश में प्रायोजित ढंग से फैलाई गई. और जो नमक किसी ज़माने में 2 से 3 रुपये किलो में बिकता था. उसकी जगह आयोडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रुपये प्रति किलो और आज तो 20 रूपये को भी पार कर गया है.

दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आयोडीन युक्त नमक 40 साल पहले ban कर दिया. अमेरिका में नहीं है, जर्मनी में नहीं है, फ्रांस में नहीं, डेन्मार्क में नहीं, डेन्मार्क की सरकार ने 1956 में आयोडीन युक्त नमक बैन कर दिया क्यों? उनकी सरकार ने कहा हमने आयोडीन युक्त नमक खिलाया! (1940 से 1956 तक) अधिकांश लोग नपुंसक हो गए!

जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा हो गया! उनके वैज्ञानिकों ने कहा कि आयोडीन युक्त नमक बंद करवाओ तो उन्होंने बैन लगाया. और शुरू के दिनो में जब हमारे देश में ये आओडीन का खेल शुरू हुआ इस देश के बेशर्म नेताओं ने कानून बना दिया कि बिना आयोडीन युक्त नमक भारत में बिक नहीं सकता. वो कुछ समय पूर्व किसी ने कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया और ये बैन हटाया गया.

आज से कुछ वर्ष पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था सब सेंधा नमक ही खाते थे.

सेंधा नमक के फ़ायदे

सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत ही गंभीर बीमारियों पर नियन्त्रण रहता है. क्योंकि ये अम्लीय नहीं ये क्षारीय है (alkaline) क्षारीय चीज़ जब अम्ल में मिलती है तो वो न्यूट्रल हो जाता है और रक्त अम्लता खत्म होते ही शरीर के 48 रोग ठीक हो जाते हैं.

ये नमक शरीर में पूरी तरह से घुलनशील है. और सेंधा नमक की शुद्धता के कारण आप एक और बात से पहचान सकते हैं कि उपवास, व्रत मे सब सेंधा नमक ही खाते है. तो आप सोचिए जो समुंदरी नमक आपके उपवास को अपवित्र कर सकता है वो आपके शरीर के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है?

सेंधा नमक शरीर में 97 पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है! इन पोषक तत्वो की कमी ना पूरी होने के कारण ही लकवे (paralysis) का अटैक आने का सबसे बड़ा जोखिम होता है. सेंधा नमक के बारे में आयुर्वेद में बोला गया है कि यह आपको इसलिये खाना चाहिए क्योंकि सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है.

यह पाचन में सहायक होता है और साथ ही इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो हृदय के लिए लाभकारी होता है. यही नहीं आयुर्वेदिक औषधियों में जैसे लवण भाष्कर, पाचन चूर्ण आदि में भी प्रयोग किया जाता है.

समुद्री नमक के भयंकर नुकसान

ये जो समुद्री नमक है आयुर्वेद के अनुसार ये तो अपने आप मे ही बहुत खतरनाक है क्योंकि कंपनियाँ इसमें अतिरिक्त आयोडीन डाल रही है. अब आओडीन भी दो तरह का होता है एक तो भगवान का बनाया हुआ जो पहले से नमक में होता है. दूसरा होता है “industrial iodine” ये बहुत ही खतरनाक है. तो समुद्री नमक जो पहले से ही खतरनाक है उसमे कंपनियां अतिरिक्त industrial iodine डाल पूरे देश को बेच रही है. जिससे बहुत सी गंभीर बीमारियाँ हम लोगों को हो रही है. ये नमक मानव द्वारा फ़ैक्टरियों मे निर्मित है.

आम तौर से उपयोग में लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (high BP), डाइबिटीज़, आदि गंभीर बीमारियों का भी कारण बनता है. ये नमक पानी में कभी पूरी तरह नहीं घुलता, हीरे (diamond ) की तरह चमकता रहता है. इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता और अंत में इसी प्रकार किडनी से भी नहीं निकल पाता और पथरी का भी कारण बनता है.

ये नमक नपुंसकता और लकवा (paralysis ) का बहुत बड़ा कारण है समुद्री नमक से सिर्फ शरीर को 4 पोषक तत्व मिलते हैं. और बीमारियां ज़रूर साथ मे मिल जाती है!

रिफाइण्ड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड ही है शरीर इसे विजातीय पदार्थ के रुप में रखता है. यह शरीर में घुलता नहीं है. इस नमक में आयोडीन को बनाये रखने के लिए Tricalcium Phosphate, Magnesium Carbonate, Sodium Alumino Silicate जैसे रसायन मिलाये जाते हैं जो सीमेंट बनाने में भी इस्तेमाल होते है.

विज्ञान के अनुसार यह रसायन शरीर में रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाते हैं, जिससे ब्लॉक्स बनने की संभावना और ऑक्सीजन जाने में परेशानी होती है. जोड़ों का दर्द और गठिया, प्रोस्टेट आदि होता है. आयोडीन नमक से पानी की ज़रुरत ज्यादा होती है. 1 ग्राम नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है. यह पानी कोशिकाओं के पानी को कम करता है. इसी कारण हमें प्यास ज़्यादा लगती है.

निवेदन : पांच हजार साल पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी भोजन में सेंधा नमक के ही इस्तेमाल की सलाह दी गई है. भोजन में नमक व मसाले का प्रयोग भारत, नेपाल, चीन, बांगलादेश और पाकिस्तान में अधिक होता है. आजकल बाज़ार में ज्यादातर समुद्री जल से तैयार नमक ही मिलता है. जबकि 1960 के दशक में देश में लाहौरी नमक मिलता था. यहां तक कि राशन की दुकानों पर भी इसी नमक का वितरण किया जाता था. स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता था. समुद्री नमक के बजाय सेंधा नमक का प्रयोग होना चाहिए.

आप इस अतिरिक्त आयोडीन युक्त समुद्री नमक को खाना छोड़िए और उसकी जगह सेंधा नमक खाइये! सिर्फ आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि जैसा हमने ऊपर बताया आयोडीन हर नमक में होता है, सेंधा नमक में भी आयोडीन होता है. बस फर्क इतना है इस सेंधा नमक में प्राकृतिक रूप से आयोडीन होता है. इसके इलावा आयोडीन हमें आलू, अरबी के साथ-साथ हरी सब्ज़ियों से भी मिल जाता है.

– स्वर्गीय राजीव दीक्षित
– माँ जीवन शैफाली द्वारा संकलित

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