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जिसकी रचना इतनी सुन्दर, वो कितना सुन्दर होगा

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सुन्दरता से आकर्षित होना स्वभाविक ही है, लेकिन सुन्दरता है क्या? कौन सुन्दर है कौन सुन्दर नहीं, इसका उत्तर एक ही है, जो पसंद आये या आकर्षित करे वहीं सुन्दर है, हर व्यक्ति के लिये सुन्दरता के मायने अलग अलग है, और सुन्दरता के पैमाने समय समय पर बदलते ही रहते हैं, एक ही व्यक्ति जो बहुत सुन्दर लगता हो रोज देखने पर सुन्दरता की मात्रा कम लगने लगती है, और एक बदसूरत लगने वाला शख्स कुछ समय बाद कम बदसूरत लगने लगता है.

यह मानव मन की चंचल प्रवृत्ति ही है जो किसी को खूबसूरत और किसी को बदसूरत करार देती है. सुन्दरता के सिद्धांत पर विज्ञापन जो चालीस पचास साल से भी ज्यादा एक ही थीम पर लंबे समय पर हिट है लक्स साबुन, जो हमेशा “फिल्मी सितारों का सौंदर्य साबुन” के नाम पर अग्रणी रहा और आज भी है.

कामिनी कौशल, निरुपा रॉय, मीना कुमारी, ज़रीना बहाव, मौसमी चटर्जी, रेखा, राखी, हेमा मालिनी, जयाप्रदा, श्रीदेवी, काजोल, ऐश्वर्या, करीना, कैटरीना, सभी ने लक्स के ब्रांड अंबेसडर का काम किया और सबको सुन्दर दिखने का सपना दिखाया.

पुरुषों में सिर्फ शाहरुख ख़ान को ही यह गौरव हासिल हुआ वो भी बहुत थोड़े समय के लिये. तब क्या पुरुष सुन्दर नहीं होते? वास्तव में सुन्दरता पुरुष या स्त्री होने की मोहताज नहीं होती, फिर भी नारी और पुरुष में सुन्दरता के मापदंड अलग-अलग हैं.

सुन्दर तो पशु-पक्षी, वनस्पति और बेजान वस्तुयें भी होती हैं. लेकिन सबसे अधिक सराहा गया नारी की सुन्दरता को, हर कवि ने उसे महत्ता दी. चित्तोड़ की रानी पद्मिनी के बारे में कहा गया कि वर्णन करने से उसकी सुन्दरता कम हो जायेगी.

पाकीज़ा में कहा गया “तुम्हारे पाँव देखे, बेहद खूबसूरत हैं, इन्हें ज़मीन पर ना रखना, मैले हो जायेंगे” कभी चंद्रमुखी कहा, कभी गजगामिनी, कभी स्वप्न सुन्दरी कहा तो कभी चंचल हिरनी, इतने विशेषण मिले कि सुन्दरता की परिभाषा उसमें दबी रह गयी.

“जिसके स्वभाव में कुटिलता, धूर्तता, अनाचार एवं उद्दण्डता का समावेश जितनी अधिक मात्रा में है वह उतनी ही मात्रा में विक्षुब्ध रहेगा और उसका प्रदर्शन शरीर के अंग अवयवों पर उभरता हुआ दिखेगा। इन विकृतियों से लदा हुआ कोई श्वेत वर्ण व्यक्ति नखशिख से आकर्षक होते हुए भी गंभीरता पूर्वक देखने से स्पष्ट ही कुरूप दिखेगा।”

सुन्दरता की ‘मोटी’ पहचान है-किसी की त्वचा सफेद होना। मांसपेशियों में मजबूती रहना, आँखें बड़ी, दाँत साफ होना, नखशिख सुन्दर होना। आरंभिक दर्शन और परिचय में किसी के रूप की सुन्दरता इतने ही लक्षणों से समझ ली जाती हैं पर यह भौंड़ी पहचान है।

किसी क्षेत्र के लोगों की बनावट एक प्रकार की होती है और दूसरे क्षेत्र वालों की दूसरी तरह की। चमड़ी या बनावट देख कर सुन्दरता-असुन्दरता का आंकलन नहीं किया जा सकता, कई काले दुबले लोग भी इतने सुन्दर होते हैं कि उन्हें हर घड़ी देखते रहने को ही मन करता है और कई मोटी दृष्टि से सुन्दर लगने पर भी ऐसा लगता है जिनके पास बैठने, उनसे बात करने को भी मन नहीं करता। वरन् उलटे डर लगता है और मन करता है कि जितनी जल्दी इनसे संपर्क टूटे उतना ही अच्छा है।

लब्बो लुआब ये कि जो आप को, आप के मन को सुन्दर लग जाये वही सुन्दर है.
आप के लिये एक असुन्दर ही किसी अन्य के लिये अत्यन्त सुन्दर है और किसी अन्य के लिये असुन्दर आप के लिये अत्यन्त सुन्दर हो सकता है.

इसीलिये शायद कहा भी गया है कि beauty lies in your eyes

– आईना शाण्डिल्य

कुछ परियां काली भी होती हैं!

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