ग्रामीण महिलाओं में माहवारी और स्वच्छता के प्रति जागरूकता का एक सार्थक प्रयास

नारीवादी स्त्रियों ने सोशल मीडिया पर पीरियड को लेकर तमाशा बनाया हुआ हैं। लेकिन उन्होंने क्या कभी महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छ्ता पर किसी को जागरूक किया है? शायद नहीं।

टीवी से लेकर सोशल मीडिया तक पर माहवारी के समय पैड उपयोग करने की बाढ़ आ गयी हैं। लेकिन उस पैड को उपयोग करने के लिए पैसे की जरूरत होती हैं। साथ ही उसको कहाँ डिस्पोज़ करना है शायद ये भी किसी किसी को पता होता है।

शहर के कचरे में पैड को कुत्ते फाड़ते नज़र आते हैं। वहीं गांव में पैड सड़को में और खेतों में उड़ते नज़र आते हैं। वही कुत्ते गांव के घर मे घुस के बर्तन चाट जाते हैं।

मेरे लिए इस विषय पर काम करना आसान नहीं था और इस विषय पर महिलाओं से बात करने वह भी एक अनजान मर्द के द्वारा बहुत ही मुश्किल काम होता है। आप का एक शब्द आप को आरोपी बना सकता है। आप के चरित्र का हनन कर सकता है।

लेकिन गांव में बढ़े प्रदूषण को रोकने के लिए मुझे इस पर काम करना था। ग्रामीण विकास का स्वप्न इस के बिना भी अधूरा है क्योंकि 50% समाज गांव में स्त्री का है। उस संख्या की समस्या का समाधान नहीं करेंगे तो कैसे ग्रामीण विकास सफल करेंगे?

इस सबके बाद हमने eco friendly मासिक धर्म उत्पादों की जानकारी जुटाई। जिस में सबसे उत्तम मेंस्ट्रुअल कप होता है। Menstrual cup सिलिकन और thermoplastic elastomer का बना हुआ होता है। दूसरे स्थान पर washable cloth पैड होता हैं।

मार्किट में आने वाले पैड में कई बार कैमिकल की वजह से स्किन प्रॉब्लम आ जाती है परंतु मेंस्ट्रुअल कप और washable cloth पैड को आप कई साल तक गर्म पानी में धो कर उपयोग में लेकर आ सकते हैं।

मेंस्ट्रुअल कप की कीमत 500 से 1000 के बीच हैं लेकिन ये 5 से 6 साल तक आराम से यूज़ किया जा सकता है। साथ ही इसको आप 7 से 8 घंटे तक चेंज करना नहीं होता और लीकेज की समस्या भी नहीं होती है।

मेरे लिए इस सब विषय पर गांव में बात करना बहुत मुश्किल रहा लेकिन अब मैं इस विषय पर कई जगह और कई महिला समूह में प्रशिक्षण देता हूँ और इस विषय को गंभीरता से स्वच्छ्ता से भी जोड़ता हूँ।

  • सुमित कुमार, इंजीनियर व सामाजिक कार्यकर्ता
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