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Author: Making India Desk

Fritjof Capra, The TAO of PHYSICS के बहाने : तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा

सुबह जागी तो दो शब्द मुंह पर थे तन्मय और तल्लीन, और लगा कोई रचना इन दो शब्दों के आसपास बुनकर जागी हूँ। एमी माँ (अमृता प्रीतम) के अनुसार इसे ‘सांध्य भाषा’ कहते हैं जब आप अर्धचेतनावस्था में कुछ रच रहे होते हैं और जागने पर भी पूरी तरह से या झलक भर याद रह […]

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‘Zombie Boy’ Rick Genest की आत्महत्या : बालकनी से नहीं, जीवन से कूद गया है युवा वर्ग

बीती 1 अगस्त को खबर पढ़ी कि Rick Genest जो Zombie Boy के नाम से प्रसिद्ध था, ने सिर्फ़ 32 वर्ष की उम्र में बालकनी से कूदकर आत्महत्या कर ली। Zombie Boy के बारे में बहुत अधिक नहीं जानती, बस इतना कि Lady Gaga के किसी म्यूज़िक एल्बम में काम किया था, एक मॉडल, संगीतकार […]

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The Quantum Doctors : बीमारी को ऐसे दुत्कारें ‘चल हट भाग यहां से’

यदि आप Autoimmune disease का अर्थ देखेंगे तो होता है – An autoimmune disease is a condition in which your immune system mistakenly attacks your body. अब यदि ऐसे में आप अपने इम्यून सिस्टम को समझाएं कि जिस पर तुम आक्रमण कर रहे हो वो तुम्हारा ही भाई बंधु है तो क्यों नहीं सुनेगा? जो […]

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माँ के जीवन से : YOU ARE MY PARLE-G

हम भारतीयों में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने अपने जीवन में Parle-G बिस्किट नहीं खाए होंगे। पारले जी के साथ और बाद बहुत सारे ब्रांड आए, लेकिन पारले जी जैसे वटवृक्ष की जड़ें न हिला सके। भारत की कुछ नामी कंपनियों में पारले जी एक ऐसा नाम है जिसका इतिहास भारत की स्वतंत्रता के […]

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मैं अपनी ही प्रेमिका हूँ

शायद 1996 या 97 की बात होगी उन दिनों टीवी पर एक डेली सोप आता था “एक महल हो सपनों का” ये टीवी सीरियल पहले गुजराती में बना फिर उसकी लोकप्रियता को देखते हुए उसका हिन्दी रीमेक भी बना। गर्मी की छुट्टियां चल रही थी, मेरा ग्रेजुएशन हो चुका था, और मैंने अपने विद्रोही लक्षण […]

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मानो या ना मानो : बिल्वा से सद्गुरु बनने की तीन जन्मों की दास्तान

करीब चार सौ साल पहले की बात है। जिला रायगढ़ (मध्य-प्रदेश) में बिल्वा नाम का एक आदमी रहता था। ऊंची कदकाठी, गठीला बदन। जिंदगी से बहुत प्यार करने वाला बिल्वा यह तो जानता ही नहीं था कि डर किसे कहते हैं। संपेरों के उस कबीले में उसकी छवि, लीक से हटकर चलने वाले एक अजीब […]

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जा वे सजना… मैं नईं करना तेरा एतबार…

पहाड़ी प्रेमाकांक्षी इकतरफ़ा होते हैं। जिनमें प्रेमी सदा समुंदर के तटीय मैदानी परदेस से आते तो हैं और प्रेमिका के दिल मे देस भी बसाते हैं फिर रुत बदलते ही रुत की ही तरह बदल जाते हैं। अपने देस याने के परदेस के हो लेते हैं। यह बात तनिक भी झूठी नहीं। न जाने कितनी […]

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धड़क-धड़क, जिया धड़क-धड़क जाए…

बादल और बारिश की आंख मिचौली में बनारस की सड़कें गीली हो चुकी हैं। भुट्टे के ठेले पर उठ चुके धुंए में और चाय के दड़बे में बैठ चुकी अंतहीन बहस में अचानक सावन उतर आया है। शाम सात बजने को है। काशी के अति व्यस्त गोदौलिया चौराहे से लक्सा रोड की तरफ बढ़ने पर […]

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द क्वीन ऑफ़ चैस!

उसका नाम रहने ही दीजिए, “क्वीन” काफ़ी नहीं? बहरहाल, उसका नाम था : गुंजन। बड़ी बड़ी काली सफ़ेद गोटियों-सी आखें, चौकोर सा कोमल मुख, आक्रामक भाव-भंगिमाएँ और ढेर सारी बातें। कुल मिला कर ठीक वैसी ही थी मानो संगमरमर के शतरंज की “क्वीन” उठ कर मानव रूप में आ गयी हो! लड़के के कॉलेज से […]

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प्रेम पत्र : तुम्हारी पीठ पर तिल है क्या?

तुम्हारी पीठ पर तिल है क्या? ठीक वैसे जैसे तुम्हारे होठों के नीचे और गले के थोड़ा ऊपर दो तिल हैँ, उस तरह का कुछ है क्या? अगर है, तो मैँ न उस तिल पर उँगलियाँ रखकर वहाँ से लिखना शुरू करना चाहता हूँ। मैँ उस तिल से शुरू करके तुम्हारे कटि तक लिख देना […]

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