Menu

Author: Making India Desk

नवरात्रि : दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, 3 देवियों के 9 शक्तिशाली दिन

नवरात्रि ईश्वरत्व के स्त्री गुण यानी – दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की कृपा से जुड़ने का एक अवसर है। ये तीन देवियाँ अस्तित्व के तीन मूल गुणों – तमस, रजस और सत्व की प्रतीक हैं। तमस का अर्थ है जड़ता। रजस का गुण सक्रियता और जोश से जुड़ा है। और सत्व गुण, ज्ञान और बोध […]

Read More

अकथ कहानी प्रेम की

दाड़िमवा खाना खाय के जाए रे! कास के गट्ठर को बुने जा रहे छप्पर के ऊपर फैलाते हुए सुन्नर महतो ने कहा। —————————————————————————————– (दाड़िम समूचे गावं का सेवक था कहते हैं पांच साल की उम्र में भटकते हुए यहां आ गया था जाने कहाँ से, तब से यह गाँव ही दाड़िम का घर परिवार है, […]

Read More

आज की नायिका : जानती नहीं थी माहवारी, बेचती थी सेनेटरी नैपकिन

घर में सबसे बड़ी बेटी लेकिन उम्र केवल 13 साल, पिता की बीमारी से घर की ज़िम्मेदारी उसके नाज़ुक से कन्धों पर आ गयी. काम क्या करना है जानती नहीं थी. एक परिचित ने कहा सेल्सगर्ल बन जाओ, मैं दिलवाता हूँ काम, तो वो सेल्सगर्ल बन गयी. उसके हाथों में पकड़ा दिए गए सेनेटरी नैपकिन […]

Read More

सुई-धागा : ज़िंदगी की उधड़न पर तुरपई करती फिल्म

अनुष्का शर्मा और वरुण धवन अभिनीत फिल्म “सुई -धागा” देखी, वाकई बेहतरीन फ़िल्म है। रेडीमेड और ब्रांडेड कपड़ों के इस दौर ने किस तरह हमारे ट्रेडिशनल बुनकरों, रंगदारों और दर्जियों सहित वस्त्र उद्योग से जुड़े तमाम परिवारों को मजूबर और लाचार बना दिया है इसका एहसास होता है। एक समय था जब परिवार भर के […]

Read More

जीवन-रेखा : पहुंचेली

रेखा, विरह का सबसे सुन्दर अधूरा गीत कहते हैं मिलन का सबसे सुन्दर और भीना गीत वही लिख सकता है जिसने विरह की सबसे तपती भूमि पर नंगे पैर चलने का अनुभव प्राप्त किया हो. लेकिन कुछ गीत ऐसे भी होते हैं, जो विरह से मिलन तक नहीं पहुँच पाते, पूरे नहीं हो पाते. रेखा […]

Read More

रेखा जहां पर ख़त्म होती है, वहां से शुरू होते हैं अमिताभ

रेखा जन्मोत्सव की सारी सीरिज़ को जब विराम देने का दिन आया तो ये ख़याल आया, 10 अक्टूबर की रात जब रेखा अपना जन्मदिन मना चुकी होगी, तब नए सूर्योदय के साथ 11 अक्टूबर को अमिताभ अपने जन्मदिन की मुबारकें ले रहे होंगे. उनके वास्तविक जीवन में भी उनका भाग्योदय तभी हुआ जब उनकी मन […]

Read More

नायिका -4 : जादू और शक्ति

… कुछ बताऊँ? तुम अब लगभग तैयार हो कि हम मिल सकें… लगभग पर रुकना, ध्यान देना… उन 4 या 5 दिनों के ध्यान में बैठने का बहुत बड़ा हाथ है इस तैयारी में… अब बोलो, ये अगर पहले बता देता तो? तो ये अपेक्षा जुड़ जाती और उस तरीके से ध्यान सम्पन्न न हो […]

Read More

अन्नपूर्णा : जिसके वक्षों का अमृत कभी सूखता नहीं, रसोई का रस उसी से है

जब वह रसोईघर में प्रवेश करती है तो उसकी चूड़ियों के साथ बर्तन भी लयबद्ध होकर खनक जाते हैं. हवा में घुलती छौंक की खुशबू से घर का वातावरण उतना ही शुद्ध होता है जितना हवन कुण्ड के उठते धुंए से. झालर वाली फ्रॉक पहने गोभी भी उसका पल्लू पकड़ कर खुशी से फूल हो […]

Read More

नवरात्रि विशेष : अनीता की रसोई से फलाहारी व्यंजन की थाली

1. व्रत की पकौड़ी वाली कढ़ी सामग्री कच्चे आलू – दो मध्यम आकार के कुट्टू या सिंघाड़े का आटा – दो टेबलस्पून कढ़ी पत्ता – 8-10 साबुत लालमिर्च – 2 घी – दो छोटे चम्मच हरी मिर्च – 2 पिसी कालीमिर्च – चौथाई छोटा चम्मच जीरा – चौथाई छोटा चम्मच हींग – एक चुटकी अदरक […]

Read More

मितवा : राग भूपाली का चुपके से आना राग पहाड़ी से मिलने

संगीत के रागों में मुझे संपूर्ण प्रकृति परिलक्षित होती दिखाई देती है. जैसे कोई थिरकती नदी हवाओं से संगत करे, जैसे कोई जलप्रपात कहरवा ताल में निबद्ध होकर घाटी में उतर जाए, जैसे गोपियों की लजाई पायल बज उठे. राग उतने ही प्राकृतिक हैं, जितनी कोई जंगली बूटी होती है. रागों का लेप अवसाद दूर […]

Read More
error: Content is protected !!