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Author: Making India Desk

हरक्यूलिस

“निर्दयी, तुम मातृत्व का निर्वहन न कर पायीं पर मैं… मैं अपने पुत्र होने के दायित्वों को अवश्य पूर्ण करूँगा, निश्चिंत रहो!! कहते कहते उनकी आंखों से आंसू टपक ही पडे. उपस्थित सारे छात्र भी भाव-विव्हल हो गए. मैं समझ ही नहीं पा रहा था कुछ ना ही कोई और समझ पाया होगा. वे लगभग […]

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इतिहास के पन्नों से : उमर ख़य्याम, एक आशिक़ की कहानी ऐसी भी!

ये ग्यारहवीं सदी की बात है। उनदिनों इस्लाम पर “अब्बासी” वंश की ख़लीफ़ाई थी। एक रोज़, ख़लीफ़ा के दरबार की चर्चाओं में सामने आया, हुज़ूर, एक नामुराद ने अपनी आशिक़ी में ऐसी रुबाई लिख दी है, जिसमें उसकी महबूबा के गाल के तिल पर आपका समरकंद-ओ-बुख़ार भी कुर्बान कर दिया गया है! ख़लीफ़ा ने विषैले […]

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नाग लोक का रहस्य – 3 : नागराज वासुकी की बहन मनसा देवी और उनकी मानस पुत्रियाँ

कहते हैं हमारी जीवन यात्रा के साथ साथ हमारी आध्यात्मिक यात्रा को नैपथ्य से कुछ लोग संचालित कर रहे होते हैं, जो उचित समय से पहले हमारे सामने अपनी उपस्थिति का कोई संकेत नहीं देते, ये उचित समय भी वही तय करते हैं और हमारी यात्राएं भी. ऐसे में ब्रह्माण्ड के स्वर्णिम नियमों को सुचारू […]

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Masala-E-Magic : जब भगवान को बेचने पड़ते हैं पापड़

आज फिर भगवान मेरे घर पापड़ बेचने आए… पिछली बार आपके पापड़ का टेस्ट उतना अच्छा नहीं था मैंने साइकिल पर पापड़ के थैले लटकाए खड़े, लटके मुंह वाले भगवान से कहा… तो उन्होंने कहा बेटा दे देना वापस पापड़ का वो पैकेट, बदले में ये दूसरा ले लो… ये वाले बहुत अच्छे हैं सच […]

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मणिकर्णिका

आज कंगना राणावत की बहु चर्चित फिल्म मणिकर्णिका देखी। यद्यपि आजकल ज्यादा फ़िल्में नहीं देखती हूँ, किन्तु अव्वल तो इस फिल्म के नाम ने ध्यान आकर्षित किया था, दूजा, हाल में इसका ट्रेलर देखा बस उसी वक़्त मन बन चुका था कि देखूंगी अवश्य ही। राष्ट्रगान के साथ ही जब फिल्म शुरू होती है, मन […]

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नाग लोक का रहस्य – 2 : Sri M की नाग लोक के उपनायक से मुलाकात

भाषा की क्लिष्टता का उपयोग अधिकतर वहां किया जाता है जहाँ कहने को कम और प्रदर्शन के लिए अधिक होता है. लेकिन जहां सामान्य मनुष्य को कोई महत्वपूर्ण जानकारी पहुँचाना हो तो भाषा सीधी सरल ही रखी जाती है. और ये किसी पर आक्षेप नहीं, मेरा व्यक्तिगत अनुभव है. जब मुझे अपनी लेखन क्षुधा के […]

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नायिका – 17 : बरगद की चुड़ैल और श्मशान चम्पा

नायिका – मैं बता देती हूँ एक बार और मुझे मोबाइल नंबर नहीं चाहिए… नहीं चाहिए… नहीं चाहिए….. विनायक – किसने कहा कि मैं दे रहा हूँ? देना होगा तो आपकी इजाज़त के बिना भी दे दूँगा, कौन रोक सकेगा मुझे? got it?? now please note it down, its 93001*****…. अर्ररे!!! ये क्या हरक़त है, […]

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शकुन शास्त्र – 5 : सूक्ष्म जगत की वस्तु का स्थूल जगत में प्रकटीकरण

हमने पहले बताया है कि जड़वादियों के लिए भी पशु-पक्षी आदि से ज्ञात शकुन मान्य होने चाहिए, परन्तु जड़वाद को मानकर इन अद्भुत शकुनों का कारण पाया नहीं जा सकता. पाषाण में या धातु, काष्ठादि की मूर्तियों में हास्य, रोदन, गति, स्वेद तथा आकाश से रक्त, चन्दन आदि की वृष्टि का कारण जड़वाद से पाना […]

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कश्मीरी कहानी : राधाकृष्ण की बिल्ली

वासुदेव के घर में जब नव-वधू ने प्रवेश किया तो सबसे पहली बात जो उसे समझाई गई वह थी, ‘ध्यान रखना वधू। सामने वाली पोशकुज से कभी बात मत करना। एक तो इस कुलच्छनी की नजर ठीक नहीं है, दूसरे बनते काम बिगाड़ देने में इसे देर नहीं लगती। चुड़ैल हमेशा उस सामने वाली खिड़की […]

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तरानों से झांकते प्रेमप्रश्न

तरानों का संसार प्रेमियों का प्रकाश-लोक है. एक ऐसा लोक, जहाँ उनके सभी प्रश्नों के काव्यात्मक उत्तर रहते हैं. मसलन, प्रेमिका को पूछना हो कि जब हमारा साहचर्य नहीं होता तो आप क्या करते हैं? तो बरबस ही, स्मरण के किसी कोने में एक तराना चहक जाता है : “क्या करते थे साजना, तुम हमसे […]

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