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Author: Making India Desk

नेप्ट्यून से परे एक ‘महापृथ्वी’ : जो नवाँ होगा और नवा भी

पुराने बच्चों को स्कूल में नौ ग्रह पढ़ाये गये; आज-कल के बच्चे आठ पढ़ते हैं. जो थोड़े अधिक कुतूहली हैं, वे इस आठ की संख्या के बाद एक प्रश्नचिह्न लगा छोड़ देते हैं. नेप्ट्यून से सुदूर शायद कोई और है, जिस पर से कभी पर्दा उठेगा और सत्य प्रकट होगा. वह जो नवाँ होगा और […]

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ध्यान का ज्ञान : इस ज़मीं से आसमां तक मैं ही मैं हूँ, दूसरा कोई नहीं

मैं अहंकारी हूँ, तुम भी अहंकारी हो और वो भी… निरपवाद रूप से सभी अहंकारी हैं… ऐसा भी नहीं कि बहुत बड़े-बड़े अहंकार पाले हों… छोटे-छोटे, बहुत तुच्छ, टुच्चे से अहंकार पाले हुए हैं. क्या खूब लिखता हूँ मैं, क्या खूब दिखता हूँ मैं, कितनी ऐशो-आराम की ज़िन्दगी जुटाई है मैंने खुद के लिए और […]

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जब मशीनें करेंगी हमारा काम, और हम करेंगे चेतना की खोज : सद्‌गुरु

इस बार सद्‌गुरु हमें उस दिन के बारे में बता रहे हैं, जब हमारे सभी काम मशीनों द्वारा होंगे और हमारे पास काफी खाली समय होगा. वे बताते हैं कि तब हमें चेतना की खोज की जबरदस्त जरुरत महसूस होगी. याद्दाश्त से पूरी तरह से मुक्त चीज़ ऐसी कोई भी चीज जो स्मृति(याद्दाश्त) के जमा […]

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प्रेम की भिक्षा मांगे भिखारन : कान्हा देख तेरी गोपियाँ तड़प रहीं…

कहते हैं विधवाएं हैं, परित्यक्ता हैं, सताई हुईं, बेघर, बच्चों ने घर से निकाल दिया या खुद ही बच्चों के दुर्व्यवहार से घर छोड़ आईं, कुछ जीवन की तलाश में, कुछ मृत्यु की तलाश में तो कुछ मोक्ष की तलाश में… कारण कई हैं, सामाजिक और दुनियावी स्तर पर प्रकट कारणों का होना आवश्यक भी […]

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अध्यात्म के रंगमंच पर जीवन का किरदार…

मुझसे किसी को किसी बात पर ईर्ष्या नहीं हो सकती, लेकिन बिस्तर पर करवट बदलते रहने वालों को मेरी इस आदत पर अवश्य ईर्ष्या हो सकती है कि ध्यान बाबा कहते हैं आप इतनी बड़ी कुम्भकरण हैं कि आप पास में बैठी हैं और ज़रा सी कोहनी मारकर आपको लुढ़का दो तो वहीं खर्राटे मारने […]

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एक मुलाक़ात : डॉ. बशीर बद्र साहब से

न जी भर के देखा, न कुछ बात की, बड़ी आरज़ू थी मुलाकात की! डॉ. बशीर बद्र साहब की लिखी गई और चन्दन दास जी की आवाज़ में इस गज़ल की ये दो पंक्तियाँ; बशीर बद्र साहब के सामने पहुँचने के बाद, मेरे हाल को बख़ूबी दर्शा रही हैं. बशीर बद्र! नाम ही काफी है, […]

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तू खाली-सी जगह हो गया, जिसमें मैं भर आई हूँ

हर एक के जीवन में ऐसा क्षण अवश्य आता है जब वह रिक्तता के चरम बिंदु पर पहुँच जाता है. जीवन में यह रिक्तता दो तरफ से काम करती है, बाहर की तरफ से व्यक्ति असुरक्षित और एकाकी अनुभव करता है तो अन्दर से कोई उसे इस अवस्था के आनंद को जी लेने के लिए […]

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बचिए एनर्जी वैम्पा़यर्स से : क्योंकि खाली दिमाग़ शैतान का घर

ईश्वर की एक बहुत असीम अनुकंपा है हम मनुष्यों पर कि उन्होंने हमें इतना ज़्यादा सक्षम दिमाग बख्शा. बिल्कुल धरती पर उतरी पहली गंगधार की तरह, पवित्र और एक कोरे कागज़ की तरह धवल. यह हम पर निर्भर होता है कि हम इस कागज़ पर किस तरीके की भावनात्मक स्याही का इस्तेमाल करते हैं. अब […]

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कविताएं कुछ प्रेम पगी

उसके लिए भी, जिसका चेहरा स्मृति में धुंधला हो गया है, पर उसका राशिफल आज भी पढ़ता हूँ, और उसके लिए भी जो आभासी संसार मे रहती है, पर लगता है कि हमारी रेखाएं कहीं ना कहीं तो जुड़ती है. तुम वही हो ना, जो बदल सकती है, मौन को मुखर में, और छेड़ सकती […]

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मुझ जंगली का मन तो जंगल में ही भटकता है

बचपन के दिनों में खाए गए फलों को याद करती हूँ तो दो तीन चीज़े दिमाग में कौंध जाती है, और मैं ‘हाय वो भी क्या दिन थे’ सोचकर बचपन की गलियों में उतर जाती हूँ… जहां माँ गर्मियों के मौसम में रस वाले नरम आम की टोकनी, एक बड़ा सा तपेला लेकर बैठती थी […]

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