आख़िरी बार ईश्वर से कब मिले हो?

-“भगवान को मानते हैं आप?” -“बिल्कुल मानता हूँ।” -“तो रोज मंदिर क्यों नहीं जाते?” -“मेरे भगवान वहाँ नहीं हैं।” -“अच्छा…

Continue Reading →

जिसका कोई नहीं है उसके ‘गणपति बप्पा’ हैं

गणेश चतुर्थी के त्यौहार को समग्र राष्ट्र हर्सोल्लास के साथ मना रहा है। सारे महाराष्ट्र में इस त्यौहार को मानने…

Continue Reading →

ईश्वर के दूत : साहित्यकार आबिद सुरती और आईटी प्रोफेशनल विमल चेरांगट्टू

वे मेरी नज़र में ईश्वर के दूत हैं, जो मानव सेवा के लिए किसी मदद की प्रतीक्षा नहीं करते, ना…

Continue Reading →

तन नुं बनावे तम्बूर अने मन ना करे मंजीरा, तो तमे मानजो के ए हशे, राधा ने कां मीरा

एक राधा, एक मीरा दोनों ने श्याम को चाहाअन्तर क्या दोनों की चाह में बोलोइक प्रेम दीवानी, इक दरस दीवानी…

Continue Reading →

उत्पादक श्रम अर्थकारी और अनुत्पादक श्रम अनर्थकारी

उत्पादक श्रम अर्थकारी और अनुत्पादक श्रम अनर्थकारी होता है। सन्तानोत्पत्ति हेतु संसर्ग करना अर्थकारी है। केवल भोगेच्छा पूर्ति हेतु पहले…

Continue Reading →

नव युग चूमे नैन तिहारे, जागो, जागो मोहन प्यारे…

पूर्व में सूर्योदय हो चुका है। बाल अरुण अपनी पूर्ण आभा से प्रकाशित हो अपने प्रखर तेज से दसों दिशाओं…

Continue Reading →

मानो या ना मानो : यात्रा एक तांत्रिक मंदिर की

चौथे दिन मैं भैरव पहाड़ी पर पहुंचा तो कोहरा-सा छाया हुआ था, पर कुछ ही समय बाद कोहरा छंट गया…

Continue Reading →

ना उम्र की सीमा हो, ना जन्मों का हो बंधन

रिश्तों के कोंपल उसी मिट्टी में अंकुरित होते हैं, जहाँ अनुकूल वातावरण मिलता है, फिर चाहे विवाह हो, प्रेम हो…

Continue Reading →