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#AskAmma : इतने भयंकर Viral Infection में भी Antibiotic नहीं ली, क्यों?

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ले लो मेरी अम्मा कम से कम बुखार की दवाई ले लो, तप रही हो एकदम…

ध्यान बाबा, शरीर पर विषाणुओं ने हमला किया है तो Antibodies सक्रीय हुई हैं, ऐसे में बुखार चढ़ता ही है, शरीर को कम से कम बीमारी से लड़ने तो दीजिये, जब लगे कि अब ये नहीं बचने वाली तो मुंह पकड़कर डाल देना दवाई अन्दर….

अरे मेरी माँ अभी तो पूरे 50 – 55 साल और मेरी छाती पर मूंग दलेंगी आप, फ़िलहाल तो वो दवाई खाइए जो पापा ने मुझे लाकर दी और दो दिन से मैं खा रहा हूँ…

अच्छा! ठीक हो गए आप उससे एकदम??? ठीक है ले लेती हूँ आपके कहने पर, लेकिन एक बार आप अपने मुंह से कह दीजिये कि स्वामी राम ने अपनी पुस्तक में जिस रोगहारिणी शक्ति के बारे में बताया है वह झूठ है, कह दीजिये आपने पिछले हफ्ते के अवकाश में मुझे Dr BM Hegde का वीडियो दिखाकर मेरे जीवन के अमूल्य ढाई घंटे बर्बाद कर दिए, Quantum Healing और Quantum Doctors की अवधारणा ही गलत है, गन्धर्व आयुर्वेद जैसा कुछ नहीं होता, कोई राग वाग के आधार पर रोग दूर नहीं होते, इससे तो मैं ढाई घंटे की मेरे पसंदीदा हीरो की कोई फिल्म देख लेती, देखो बेचारा अक्षय मेरे देखे देखे कित्ता बुड्ढा हो चला है…. कह दीजिये डॉ आलोक भारती की “चल हट तुच्छ बीमारी कहीं की” जैसा कोई जादू नहीं होता….

Swami Ram

सब होता है… लेकिन एक सुबह एकदम से उठकर आप कहें कि हे रोगहारिणी शक्ति जागृत हो जाओ और वो आपकी सेवा में हाज़िर हो जाएगी… ऐसा नहीं होता, इसके लिए बरसों की तपस्या और साधना चाहिए. आप ठहरी जीवन भर मांसाहार करनेवाली, ना आपके जागने का ठिकाना न सोने का, ना खाने का ना पीने का…

तो उन्होंने ऐसा कहाँ लिखा है या कहा है कि मांसाहारी लोगों की रोगहारिणी शक्ति नहीं होती, मांसाहारी लोगों को ध्यान और तपस्या का अधिकार नहीं होता… और आपके साथ के पूरे दस साल ना भी गिनूं तब भी पिछले डेढ़ दो वर्षों में जितनी तपस्या और ध्यान मैंने किया है वो मेरे पूरे जीवन का निचोड़ है, इससे अधिक समर्पित होकर मैंने कभी नहीं किया….

ध्यान बाबा मुझे अपने निर्णय से डिगाने के लिए जितने प्रयास कर सकते थे कर रहे थे, लेकिन मैं जानती थी कि वो मुझे अपने निर्णय पर बने रहने के लिए ही उकसा रहे थे… क्योंकि इस बहस का उनका अंतिम वाक्य था, देखिये दवाई ले लेंगी तो तीन दिन में ठीक हो जाएँगी और नहीं लेंगी तब भी 72 घंटे में तो ठीक होना ही है… लेकिन ये बताइये पापा को क्या कहेंगी… उन्होंने मुझे तो मेरे सर पर खड़े रहकर दवाई खिलाई और बच्चों को तो आपने देखा ही है आप नहीं देती हैं तो वो ही दे देते हैं बुखार का सिरप…

पापा से मैं नहीं, आप कहेंगे…

क्या?

झूठ?

मैंने जीवन में कभी झूठ नहीं बोला…

तो आपको इस ‘जीवन’ के लिए झूठ बोलना पड़ेगा…

तो उन तमाम कामों के साथ यह एक काम भी जुड़ गया जो ध्यान बाबा ने जीवन में कभी नहीं किया, और उन्हें मेरी खातिर करना पड़ा, पापा ने जितनी बार दवाई का पूछा, उन्हें कह दिया गया हाँ शैफाली को दवाई दे दी है…

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बात पिछले शनिवार की है जब ध्यान बाबा बुखार में तप रहे थे और मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी इतने महीनों में पहली बार मैंने अकेले लॉन्च किया. वर्ना लेख पब्लिश करने के बाद उसके मुख पृष्ठ को सजाना और ओन एयर करने का काम उनका ही होता है.

उनको बीमार पड़े दो दिन ही हुए थे कि छोटे बाबू गीत भी उसी बीमारी की चपेट में… बड़ों का तो फिर भी हम चला लेते हैं, बच्चों को देखकर कलेजा मुंह को आता है, यह वायरल इन्फेक्शन ऐसा था कि शरीर के जोड़-जोड़ में भयंकर पीड़ा, गीत बाबू हमारे वैसे ही बहुत नाज़ुक, उनसे तो खड़े होते न बन रहा था, गोद में लिए बाथरूम तक ले जाना पड़ रहा था…. ऐसे में दादा का पोतों के लिए और बेटे बहू के लिए दवाई के लिए परेशान होना लाज़मी है.

लेकिन मेरे लिए ये परीक्षा की घड़ी थी, बात जब अस्तित्वगत हो तो एक सीमा के बाद मुझे लगता है मैं एकदम संवेदनहीन हो जाती हूँ.

गीत बाबू के बुखार को दूसरा दिन था और बड़े सुपुत्र को बस शुरू ही हुआ था… देर रात तक बैठकर गीत बाबू के शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखती रही, और दूसरी तरफ स्वामी राम की पुस्तक से रोगहारिणी शक्ति के चमत्कार का वह अध्याय पढ़ती रही जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे उनके गुरु ने उनके सामने ही एक चेचक से पीड़ित बच्चे का रोग अपने शरीर पर ले लिया था और उनका पूरा शरीर चेचक के फफोलों से भर गया था, और फिर गाँव के बाहर जाकर वो कुछ देर तक एक बरगद के वृक्ष को देखते रहे और चेचक के सारे फफोलें उनके शरीर से गायब होकर उस वृक्ष पर निकल आते हैं और कुछ देर में वृक्ष से भी गायब हो जाते हैं…

ऐसी बहुत सारी बातें मैंने पढ़ीं और सुनी थी… मैंने आँख बंद कर उस शक्ति से बस यही कहा, मैं जानती हूँ ऐसा जादू होता है… हे रोगहारिणी शक्ति मेरे बच्चे का रोग मुझे दे दे, मुझे पूरा विश्वास है तू मुझे रुग्ण न रहने देगी… कौन माँ अपने बच्चों को ऐसी तकलीफ में देख सकती है भला.

इसे चमत्कार न मानने वाले, वैज्ञानिक आधार इस निर्णय पर आसानी से पहुँच सकते हैं कि गीत बाबू को वैसे भी दो दिन हो चुके थे तो तीसरे दिन तो उनको ठीक होना ही था, और चूंकि मैं मरीजों के बीच रह रही थी तो मुझे इन्फेक्शन लगना ही था, हर कोई इसे चमत्कार मान लेने के लिए बिलकुल बाध्य नहीं है कि अगले दिन से गीत बाबू को बुखार आना बंद हो गया और मुझे सुबह तक पूरे शरीर की पीड़ा के साथ तेज़ बुखार था… लेकिन यदि इस बात को आप स्वीकार करते हैं कि तीसरे दिन रोग अपने आप ठीक हो ही जाता है तो क्यों हम इतनी दवाइयां बिना वजह बच्चों को पिलाए जाते हैं… हालांकि मैंने बच्चों को ध्यान बाबा की तरह कोई antibiotic नहीं दी, सिर्फ बुखार कम करने की दवाई देते रहे.

इस बीच बहुत से करीबी मित्रों ने सलाहें दी, जोड़ों में दर्द है तो बीमारी हड्डी में घुस गयी होगी एंटीबायोटिक के बिना रोग हमेशा के लिए नहीं जाएगा, फिर पलट कर आएगा…

मैंने भी सोच लिया था फिर पलट कर आया तो फिर ऐसे ही भगा दूंगी जैसे डॉ आलोक भारती ने बताया था… चल हट भाग यहाँ से… लेकिन मैंने दवाई नहीं ली… 18 घंटे तक बुखार अपने आप चढ़ा उतरा और 24 घंटे के अन्दर मैं बुखार को भगा चुकी थी… मेरे साथ बच्चे और ध्यान बाबा अभी भी जोड़ों के दर्द से पीड़ित थे… मैं लगातार रोग हारिणी शक्ति का ध्यान करती रही…

इस बीच यह भी हुआ कि ज्वर इतना अधिक था कि मुझे लगा जैसे मेरे अन्दर कोई गीत बज रहा है… मैंने ध्यान बाबा को कहा वो गीत लगा दो जो बज रहा है…. ध्यान बाबा ने पूछा कौन सा… मैं उन्हें बोल नहीं बता पा रही थी क्योंकि बोल स्पष्ट सुनाई नहीं दे रहे थे तो मैंने उसकी धुन को दोहराना शुरू किया जो मेरे अन्दर चल रहा था….  मेरी बीमार आवाज़ में पता नहीं ध्यान बाबा धुन समझ पाए या नहीं लेकिन उन्होंने फिर भी गीत बजाया…. अरे हाँ यही तो है…. गीत क्या भजन ही है पंडित भीम सेन जोशी की आवाज़ में जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी…..

फिर तो एक के बाद एक यह गीत और इससे जुड़े सारे गीत ध्यान बाबा ने चलाये और मैं वहीं आँखें बंद किये सुनती रही… लग रहा था जैसे ज्वर मेरी आँखों से निकल रहे आंसुओं के साथ बह गया…

24 घंटे में ज्वर और 48 घंटे के अन्दर दर्द छू मंतर, हाँ दो चार दिन भोजन ठीक से न ले पाने के कारण और विषाणुओं के हमले के कारण जो भी शरीर में टूट फूट हुई होगी जिसकी वजह से थोड़ी कमजोरी आ गयी है, चेहरे पर और शरीर पर लाल दाने निकल आए हैं उससे निपटते निपटते एक हफ्ता लग जाएगा… लेकिन एक बात की और पुष्टि हो गयी थी कि सच में गन्धर्व आयुर्वेद के अनुसार हर रोग के निवारण के लिए कोई न कोई राग अवश्य होता है….

दोनों बच्चे मेरे बाद ठीक हुए, ध्यान बाबा आज भी जोड़ों के दर्द से परेशान हैं, पैरों में सूजन है और लग रहा है जो दवाइयां खाई हैं, फ़िलहाल उसके side effect झेल रहे हैं….

और जैसा मैं हमेशा कहती हूँ… side effect हर चीज़ का होता है… चाहे यह रोग हो या ‘वह’ रोग हो लेकिन उसे कभी भी अपने रास्ते के बीच में मत आने दीजिये साइड में करते चलिए रास्ता साफ़ होगा तो मंज़िल भी जल्दी मिलेगी..

बाकी Quantum Doctors का मेरा पिछला लेख, और Dr BM Hegde का ढाई घंटे का वीडियो का लिंक दे रही हूँ उसे अवश्य पढ़िए और सुनिए, अक्षय कुमार का क्या है उसे तो एक दिन बुड्ढा होना ही है लेकिन हमें तो चिरयौवना बने रहना है ना, और उसके लिए आवश्यक है कि एलोपैथिक दवाइयों से दूर से ही हाथ जोड़ लिए जाए.

और हाँ यह जादू उसी के साथ होता है जिसे इस जादू पर आस्था है, आपकी चेतना में सिर्फ यही एक जादुई शक्ति नहीं, शक्तियों का भण्डार है, आवश्यकता है तो बस उसे पूरे ध्यान और साधना के साथ जागृत करने की.

– माँ जीवन शैफाली

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