मैं और मेरी किताबें अक्सर ये बातें करते हैं : वर्जित बाग़ की गाथा

ये समीक्षा नहीं है, सचमुच समीक्षा नहीं है. समीक्षा तो पुस्तक की होती है, जीवित गाथाओं की नहीं. अच्छा बुरा पहलू तो लिखे हुए हरूफ़ का देखा जाता है, उन … Continue reading मैं और मेरी किताबें अक्सर ये बातें करते हैं : वर्जित बाग़ की गाथा