नवरात्रि : 9 दिन उपवास में ये 9 बातें बढ़ाएंगी आपकी ऊर्जा

दिनांक 6 अप्रेल 2019 से चैत्र नवरात्रि प्रारम्भ हो रही हैं, जो लोग नौ दिन का उपवास रखते हैं उनके लिए मैं अपने सीमित ज्ञान से मिले कुछ अनुभवों के बारे में विस्तार से बताना चाहूंगी ताकि आपके उपवास से आप अपनी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा को अधिक से अधिक बनाए रखने में सक्षम हो सके.

सबसे पहली बात मैं जो कुछ भी लिख रही हूँ वह मेरी भाषा है, जो आपको किसी पुस्तक में सन्दर्भ रूप में न मिलेगी, या फिर पुस्तकों में लिखी बातों से मेल खाती हुई न भी लगे.

  1. तो पहले तो मेरे लिए व्रत और उपवास दो भिन्न बातें हैं. व्रत का अर्थ मेरे लिए किसी वस्तु पर संयम से है, वह संयम भोजन का भी हो सकता है, बातों का भी और विचारों का भी. परन्तु उपवास का अर्थ हम सामान्यत: लेते हैं परमात्मा के पास होने से. तो आप दोनों समय भोजन लेते हुए भी उपवासी हो सकते हैं, और व्रत करते हुए भी उपवासी हो सकते हैं.
    यहाँ व्रत करने से अतिरिक्त लाभ यह होता है कि शरीर, मन और चेतना भोजन और विचारों से रिक्त होने के कारण उपवासी होने में सरलता होती है.
  2. इसलिए प्रयास करें कि यदि आप भोजन का व्रत ले रहे हैं तो साथ में बातों और विचारों से भी इन नौ दिनों के लिए व्रत ले लें. दूसरों की बातों में कम से कम उलझें, और आवश्यक न हो तो केवल मुस्कुरा दें पर प्रतिक्रया न दें.
  3. भोजन से व्रत लिया है तो शरीर भोजन की मांग करेगा, ऐसे में अपने संकल्प शक्ति को बढ़ाएं, फलाहारी के नाम पर आलू, साबूदाना वगैरह खाने से बचें. फल अधिक से अधिक खाएं. और अधिक से अधिक रसाहार लें.
  4. नवरात्रि में कुछ ऊर्जाएं अधिक सक्रिय होती हैं, मन को निर्मल और निश्छल रखते हुए आप उसके लिए अपनी ग्रहणशीलता बढ़ा सकते हैं.
  5. लम्बे दिनों के लिए जब भी व्रत करना हो तो व्रत के दिनों से कुछ एक दो दिन पहले हल्का और सात्विक भोजन करना प्रारम्भ करें.
  6. पानी का उपयोग अधिक से अधिक करें. आपको यदि कैल्शियम की कमी है तो पानी में एक चम्मच चूने का पानी मिला लें.
  7. व्रत के दिन सबसे उचित समय होता है वज़न कम करने का, भोजन न करने के कारण शरीर की अतिरिक्त चर्बी जलकर ख़त्म होने लगती है. लेकिन आपको उसके लिए शरीर को भी मज़बूत बनाना होगा.
  8. शरीर को मज़बूत बनाने के लिए चेतना की ऊर्जा का उच्च होना आवश्यक है, उसके लिए आप अपनी श्रद्धा अनुसार पूजा पाठ के साथ कुछ देर के लिए ध्यान में अवश्य बैठे.
  9. एक बात हमेशा याद रखें भोजन की आवश्यकता मात्र शरीर के निर्माण के लिए हैं,. ऊर्जा सीधे आपको परमात्मा से मिल रही है. इस परमात्मा को आप आदिशक्ति, माँ, ब्रह्माण्ड, अस्तित्व कुछ भी कह सकते हैं, नाम से परमात्मा में कोई अंतर नहीं आएगा. अंतर आता है तो मात्र आपके भाव से. इसलिए व्रत नहीं रख पा रहे तो उपवासी भाव के साथ दोनों समय सात्विक भोजन कर, मानसिक और भाषा का व्रत लेकर भी आप उतना ही लाभ कमा सकते हैं.

यह नौ दिन हमारी सामूहिक ऊर्जा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं. जब हम लोगों के साथ जुड़कर ऐसे त्यौहारों का आनंद लेते हैं, प्रार्थना करते हैं तो हमारी सामूहिक प्रार्थना और ऊर्जा से राष्ट्र की आध्यात्मिक ऊर्जा में भी वृद्धि होती है. इसलिए यह बहुत सही समय है कि हम राष्ट्र की आध्यात्मिक उन्नति के लिए मिलकर प्रार्थना करें और मोदीजी को वोट देकर उन्हें दुबारा प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प लें.

माँ का आशीर्वाद और प्रेम सब पर बना रहे.

– माँ जीवन शैफाली

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