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5 Minutes Craft : छोटे परिवर्तन जो लाते हैं बड़े बदलाव

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मैंने अक्सर गृहणियों को रोज़-रोज़ एक ही तरह के काम से उकताते हुए देखा है. एक ही ढर्रे पर काम करते हुए वो उसकी इतनी अभ्यस्त हो जाती है कि उनको नींद में से उठाकर भी कुछ पूछ लो तो किसी भी वस्तु के बारे में बिलकुल सही-सही जानकारी दे देंगी.

लेकिन यह एकरसता उनके जीवन में इतना अधिक ठहराव ले आती है कि वो किचन में चम्मच और चाकू की जगह का अचानक बदल जाना भी स्वीकार नहीं कर पाती. हल्दी नमक मिर्च की एक जैसी मात्रा ही की तरह उनके जीवन की रेसिपी में भी ज़रा सा भी चढ़ता हुआ नमक या मिर्च उन्हें घबराहट दे जाता है.

उनके महीने भर की किराने की लिस्ट सालों से एक ही तरीके से लिखी गयी है, उसमें किसी नई वस्तु का समावेश करते ही बजट का गड़बड़ा जाना उन्हें भविष्य के लिए चिंतित कर जाता है.

ऐसे लोगों के यहाँ सब्ज़ी भी अमूमन एक ही स्वाद की बनती है, कोई भी नया मसाला मिलाना या स्वाद का बदल जाना उसे मंज़ूर नहीं होता…

और फिर एक दिन इसी एकरसता से खुद ही तंग आकर जीवन से निराश होने लगती हैं…

इसलिए मैं अक्सर कहती हूँ जीवन एक प्रयोगशाला है. ईश्वर ने इतनी सारी चीज़ें दी हैं हमें प्रयोग करने के लिए कि रोज़ एक नई चीज़ शुमार करेंगे तब भी उसके खज़ाने में कमी नहीं आएगी… लेकिन आपका जीवन ज़रूर नयेपन से भर जाएगा…

और इसके लिए आपको बहुत बड़ी उठा पटक भी नहीं करना है… बहुत छोटी छोटी चीज़ें हैं जो आपके अन्दर और बाहर बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है… फिर चाहे अपनी हेयर स्टाइल बदलने की बात हो या घर की साज सज्जा… एक दो चीज़ें मैं अपने पसंद की बता रही हूँ, बहुत सारी चीज़ें आपके पसंद की आपके आस-पास ही बिखरी पड़ी है, बस एक बार नज़र तो दौड़ाइए… फिर देखिये कैसे ज़िंदगी हांफती हुई आके आपको क़दमों में बिछ जाती है…

जूड़े में गजरा मत बाँधो, मेरा गीत महक जायेगा

बचपन में गर्मी की छुट्टियों में माँ बालों का अम्बोड़ा बना दिया करती थी… हमारे यहाँ जुड़े को अम्बोड़ा कहते हैं. तब यह फैशन स्टेटमेंट नहीं था, सिर्फ गर्मी से बचाव के लिए था.

आजकल तो आपकी रोज़मर्रा के जीवन में भी जो कुछ आप कर रहे हैं उसका स्टाइलिश होना जैसे अनिवार्य-सा हो गया है… इसलिए जहाँ गृहणियां गर्मी से तंग आकर काम करते करते जुड़ा बाँध लेती थीं, वही जुड़ा आजकल न जाने कैसे कैसे नॉट और बन के नाम से चिड़िया से घोंसले से सर पर सजे दिखते हैं.

फिर भी ये घोंसला और उसमें चहचहाती चिड़िया सी क्लिप्स मेरी हमेशा से पसंदीदा रही है… बचपन से बहुत कोशिश की फ्रेंच नॉट बनाने की मुझसे कभी ना बना… भाई की शादी में भी मैंने नकली जुड़ा लगाया था… 22-23 साल की उम्र में भी साड़ी और जुड़ा मेरा फैवरेट स्टाइल स्टेटमेंट हुआ करता था…

तब तो सीखने को नहीं मिला लेकिन आजकल यू ट्यूब तो जैसे चलता फिरता ट्यूटोरियल हो गया है… दो से पांच मिनट का कोई भी वीडियो उठाकर देख लीजिये… और सीख लीजिये अलग अलग तरह के नॉट बनाना…

लेकिन सच कहूं वो माँ के हाथ के अम्बोड़े और गृहणी के जुड़े में लगे गजरे में जो बात है वो इन यू ट्यूब के वीडियो में नहीं… लेकिन अब माँ से अम्बोड़ा नहीं बनवा सकते तो यहीं सीख लीजिये… कुछ मैंने भी घर में ट्राय किया है, कुछ आप भी ट्राय कीजिये… एक बार में नहीं बनेगा, आठ दस बार बनाकर देखेंगे तो तो सीख जाएंगे…

साज सज्जा

आप यदि अपने लिविंग रूम की पुरानी व्यवस्था से ऊब गए हैं. तो आज ही इसमें थोड़ा सा परिवर्तन कर लीजिये. यूं भी वास्तु के हिसाब से थोड़े थोड़े दिनों में फर्नीचर की सेटिंग्स या उसकी जगह बदलते रहना चाहिए. इससे वहां पर जमी नकारात्मक ऊर्जा ख़त्म हो जाती है.

वैसे आप रेडीमेड सोफा कवर और कुशन ही लगाते होंगे. लेकिन ऐसी चीज़ें बरसों तक खराब नहीं होती और हम उसे रोज़ रोज़ देखकर बोर भी हो जाते हैं.

तो यदि घर में जगह है और फर्नीचर बहुत भारी नहीं है तो कुछ दिनों के लिए उसे कहीं और रख दीजिये.

अब लिविंग रूम में जमीन पर ही डनलप का या कोई भी मोटा सा गद्दा बिछाकर उस पर किसी भी रंग की प्लेन चादर बिछा दें. ध्यान रखें चादर का रंग थोड़ा गहरा हो. सोफे के कुशन रिमूवेबल हो तो उसे ही निकाल कर बिछा दीजिये.

ज़मीन पर पुराने ज़माने की सतरंगी दरी बिछाइये, जिसमें खूब सारे रंग होते हैं.

तकियों की जगह लोड जिसे हम गाव तकिया कहते हैं वो लगाना है. वो भी छोटे वाले. लेकिन उसके लिए आपको बाज़ार जाकर नए तकिये नहीं खरीदना होंगे.

गर्मियों में जिन कम्बलों को हम ट्रंक में ठूंस देते हैं बस उन्हें निकालिए, गाव तकिये के रूप में फोल्ड कर लीजिये. यदि आपके घर में छोटे बच्चे हैं और उनके छोटे पड़ चुके प्लेन टी शर्ट्स पड़े हैं तो उन चादरों को उसमें डालकर दोनों तरफ से अन्दर की ओर ऐसे फोल्ड कर दीजिये कि चादर न दिखे.

ऐसे ही घर में बड़ों की पुरानी शर्ट्स पड़ी हो तो बिना सिलाई मशीन का उपयोग किये आप उसके कवर बना सकती हैं. जिसका वीडियो लिंक मैं नीचे दे रही हूँ.

एक कुशल गृहणी वही है जो घर की अनुपयोगी वस्तुओं का भी उपयोग करना जानती हो. दूसरी बात यूं तो बाज़ार में आजकल सब तरह की वस्तुएं उपलब्ध हैं लेकिन अपने हाथ से बनी चीज़ों से भी तो घरवालों को अपनेपन की महक आती है ना…

जो बात माँ के हाथ की रोटी में है वो बाज़ार की ब्रेड में कहाँ…

  • माँ जीवन शैफाली

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