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Day: February 2, 2019

मणिकर्णिका

आज कंगना राणावत की बहु चर्चित फिल्म मणिकर्णिका देखी। यद्यपि आजकल ज्यादा फ़िल्में नहीं देखती हूँ, किन्तु अव्वल तो इस फिल्म के नाम ने ध्यान आकर्षित किया था, दूजा, हाल में इसका ट्रेलर देखा बस उसी वक़्त मन बन चुका था कि देखूंगी अवश्य ही। राष्ट्रगान के साथ ही जब फिल्म शुरू होती है, मन […]

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नाग लोक का रहस्य – 2 : Sri M की नाग लोक के उपनायक से मुलाकात

भाषा की क्लिष्टता का उपयोग अधिकतर वहां किया जाता है जहाँ कहने को कम और प्रदर्शन के लिए अधिक होता है. लेकिन जहां सामान्य मनुष्य को कोई महत्वपूर्ण जानकारी पहुँचाना हो तो भाषा सीधी सरल ही रखी जाती है. और ये किसी पर आक्षेप नहीं, मेरा व्यक्तिगत अनुभव है. जब मुझे अपनी लेखन क्षुधा के […]

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नायिका – 17 : बरगद की चुड़ैल और श्मशान चम्पा

नायिका – मैं बता देती हूँ एक बार और मुझे मोबाइल नंबर नहीं चाहिए… नहीं चाहिए… नहीं चाहिए….. विनायक – किसने कहा कि मैं दे रहा हूँ? देना होगा तो आपकी इजाज़त के बिना भी दे दूँगा, कौन रोक सकेगा मुझे? got it?? now please note it down, its 93001*****…. अर्ररे!!! ये क्या हरक़त है, […]

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शकुन शास्त्र – 5 : सूक्ष्म जगत की वस्तु का स्थूल जगत में प्रकटीकरण

हमने पहले बताया है कि जड़वादियों के लिए भी पशु-पक्षी आदि से ज्ञात शकुन मान्य होने चाहिए, परन्तु जड़वाद को मानकर इन अद्भुत शकुनों का कारण पाया नहीं जा सकता. पाषाण में या धातु, काष्ठादि की मूर्तियों में हास्य, रोदन, गति, स्वेद तथा आकाश से रक्त, चन्दन आदि की वृष्टि का कारण जड़वाद से पाना […]

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कश्मीरी कहानी : राधाकृष्ण की बिल्ली

वासुदेव के घर में जब नव-वधू ने प्रवेश किया तो सबसे पहली बात जो उसे समझाई गई वह थी, ‘ध्यान रखना वधू। सामने वाली पोशकुज से कभी बात मत करना। एक तो इस कुलच्छनी की नजर ठीक नहीं है, दूसरे बनते काम बिगाड़ देने में इसे देर नहीं लगती। चुड़ैल हमेशा उस सामने वाली खिड़की […]

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तरानों से झांकते प्रेमप्रश्न

तरानों का संसार प्रेमियों का प्रकाश-लोक है. एक ऐसा लोक, जहाँ उनके सभी प्रश्नों के काव्यात्मक उत्तर रहते हैं. मसलन, प्रेमिका को पूछना हो कि जब हमारा साहचर्य नहीं होता तो आप क्या करते हैं? तो बरबस ही, स्मरण के किसी कोने में एक तराना चहक जाता है : “क्या करते थे साजना, तुम हमसे […]

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व्यंग्य : यक्ष इन पुस्तक मेला

दिल्ली का पुस्तक मेला समाप्त हो चुका था, धर्मराज युधिष्ठिर हस्तिनापुर के अलावा इंद्रप्रस्थ के भी सम्राट थे। अचानक यक्ष प्रकट हुए, उन्होंने सोचा कि चलकर देखा जाये कि धर्मराज अभी भी वैसे हैं या बदल गए जैसे कि मेरे सरोवर का जल पीने के समय थे। युधिष्ठिर से मिले, कुशल क्षेम हुई, उन्होंने यक्ष […]

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