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Day: October 6, 2018

जीवन-रेखा : पहुंचेली

रेखा, विरह का सबसे सुन्दर अधूरा गीत कहते हैं मिलन का सबसे सुन्दर और भीना गीत वही लिख सकता है जिसने विरह की सबसे तपती भूमि पर नंगे पैर चलने का अनुभव प्राप्त किया हो. लेकिन कुछ गीत ऐसे भी होते हैं, जो विरह से मिलन तक नहीं पहुँच पाते, पूरे नहीं हो पाते. रेखा […]

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रेखा जहां पर ख़त्म होती है, वहां से शुरू होते हैं अमिताभ

रेखा जन्मोत्सव की सारी सीरिज़ को जब विराम देने का दिन आया तो ये ख़याल आया, 10 अक्टूबर की रात जब रेखा अपना जन्मदिन मना चुकी होगी, तब नए सूर्योदय के साथ 11 अक्टूबर को अमिताभ अपने जन्मदिन की मुबारकें ले रहे होंगे. उनके वास्तविक जीवन में भी उनका भाग्योदय तभी हुआ जब उनकी मन […]

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नायिका -4 : जादू और शक्ति

… कुछ बताऊँ? तुम अब लगभग तैयार हो कि हम मिल सकें… लगभग पर रुकना, ध्यान देना… उन 4 या 5 दिनों के ध्यान में बैठने का बहुत बड़ा हाथ है इस तैयारी में… अब बोलो, ये अगर पहले बता देता तो? तो ये अपेक्षा जुड़ जाती और उस तरीके से ध्यान सम्पन्न न हो […]

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अन्नपूर्णा : जिसके वक्षों का अमृत कभी सूखता नहीं, रसोई का रस उसी से है

जब वह रसोईघर में प्रवेश करती है तो उसकी चूड़ियों के साथ बर्तन भी लयबद्ध होकर खनक जाते हैं. हवा में घुलती छौंक की खुशबू से घर का वातावरण उतना ही शुद्ध होता है जितना हवन कुण्ड के उठते धुंए से. झालर वाली फ्रॉक पहने गोभी भी उसका पल्लू पकड़ कर खुशी से फूल हो […]

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नवरात्रि विशेष : अनीता की रसोई से फलाहारी व्यंजन की थाली

1. व्रत की पकौड़ी वाली कढ़ी सामग्री कच्चे आलू – दो मध्यम आकार के कुट्टू या सिंघाड़े का आटा – दो टेबलस्पून कढ़ी पत्ता – 8-10 साबुत लालमिर्च – 2 घी – दो छोटे चम्मच हरी मिर्च – 2 पिसी कालीमिर्च – चौथाई छोटा चम्मच जीरा – चौथाई छोटा चम्मच हींग – एक चुटकी अदरक […]

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मितवा : राग भूपाली का चुपके से आना राग पहाड़ी से मिलने

संगीत के रागों में मुझे संपूर्ण प्रकृति परिलक्षित होती दिखाई देती है. जैसे कोई थिरकती नदी हवाओं से संगत करे, जैसे कोई जलप्रपात कहरवा ताल में निबद्ध होकर घाटी में उतर जाए, जैसे गोपियों की लजाई पायल बज उठे. राग उतने ही प्राकृतिक हैं, जितनी कोई जंगली बूटी होती है. रागों का लेप अवसाद दूर […]

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दिव्यांगना बनी वीरांगना

“दंगल” में एक दृश्य आता है। जब महावीर फौगाट ( आमिर खान) गीता और बबीता को पहलवानी का प्रशिक्षण देना प्रारंभ करते हैं तो गांव में उनकी आलोचना और व्यंग शुरू हो जाता है। कुछ गाँव वाले कहते हैं के महावीर बौरा गया है जो मर्दों के खेल में बेटियों की सफलता चाह रहा है। […]

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