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Month: October 2018

‘पंछी’ से सीखिए आसमान में उड़ने का हुनर और शऊर

दूरदर्शन पर एक सीरियल आया करता था “दादी माँ जागी” … बीस तीस साल तक मूर्छा में रही दादी माँ एक दिन अचानक जाग जाती है… बाहर की दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी होती है लेकिन उनके लिए दुनिया वही बीस तीस साल पुरानी ही है… नए समय के साथ सामंजस्य बिठाने में दादी […]

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आज की नायिका : जोयिता मंडल, सिर्फ एक औरत या पुरुष नहीं, एक पूर्ण मनुष्य

दीपावली पर मिर्ज़ा ग़ालिब का एक वीडियो अक्सर वायरल होता है. जब कुछ हिन्दू दिवाली की मिठाई उनके घर पहुंचाते हैं तो उनके एक मुस्लिम मित्र उन पर प्रश्न उछालते हैं… आप बर्फी खाएंगे? हाँ क्यों? आपको शर्म नहीं आती, एक मुस्लिम होकर हिन्दू बर्फी खाएंगे? मिर्ज़ा हँसते हुए कहते हैं अच्छा! मिठाई भी हिन्दू […]

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कृष्ण : विरह का अनंत अनुराग

बरसों पहले देखा एक तैलचित्र अब तक मेरी स्मृति में सो रहा है । भगवान कृष्ण का वह चित्र महाभारत युद्ध के बाद का था, संभवत: राजा रवि वर्मा का बनाया हुआ । बात चूंकि बहुत पुरानी हो चुकी है इसलिए पक्के तौर पर नहीं कह सकता । चित्र अपनी गरिमा और गुणधर्म में रवि […]

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सदमा – 2 : मेरा कोई सपना होता…!

दुखांत प्रेम कहानियों पर बनने वाली फिल्मों में सदमा को मैं श्रेष्ठ मानता हूं। ऐसी फिल्मों में अकसर नायक-नायिका की दुखद मृत्यु हो जाती है। वे मिलते हुए बिछड़ जाते हैं। लेकिन सदमा का विछोह अपार है। वहां देह की मृत्यु नहीं है, आत्मा के लोक का लुंठन है। एक भयावह अंधकार है। स्याह अंधेरा.. […]

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127 Hours : जीवन को जीत लाने के लिए ज़रूरी है अब इस हाथ का धड़ से अलग होना

127 Hours… एक अंग्रेज़ी फिल्म है कुछ तीन चार साल पहले देखी थी. यूं तो अंग्रेज़ी फ़िल्में मैंने बहुत कम देखी हैं, लेकिन जितनी भी देखी हैं वो या तो जीवन और मृत्यु के बीच जीवन को बचा लाने की जिजीविषा पर आधारित रही या फिर मुझे वो इसलिए पसंद आई क्योंकि अंग्रेज़ी फ़िल्में अधिकतर […]

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दुनिया रंग रंगीली

क्या आप जानते हैं जापान के ओसाका में स्थित गेट टावर बिल्डिंग किसी साइंस फिक्शन मूवी का आभास देती है! यह विश्व की एक मात्र बिल्डिंग है जिसके बीच में से एक्सप्रेसहाइवे गुज़रता है, और ऊपर व नीचे लोग रहते हैं। जी हां, ओसका के फुकीसमा कु स्थित 16 मंज़िला बिल्डिंग 236 फुट ऊंची है, […]

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ममता : चोरनी

बात 2014 अक्टूबर की है जब अजित सिंह का उदयन स्कूल बस शुरू ही हुआ था, बच्चों के लिए कपड़ों का बड़ा सा पुलिंदा बना रही थी और फेसबुक पर अपने अनुभव लिखती जा रही थी कि कैसे कैसे मैंने इन बच्चों के लिए कपड़े जुटाए. उन दिनों लिखा था – मैं और मेरा Udayan […]

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मानो या ना मानो : रहस्यमयी रंगोली

हमारा समाज छद्म व्यवहार की नींव पर टिका है. हम यदि वास्तविक व्यवहार ज्यों का त्यों करने लगेंगे तो इस समाज की बुनियाद हिल जाएगी और वो भरभराकर नीचे गिर पड़ेगा….. लेकिन हम असामाजिक होने के साथ ही आदिम हो जाएंगे, एकदम बीहड़ लेकिन प्रकृति के एकदम करीब… यानि अज्ञात के करीब अज्ञेय की खोज […]

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किताबों की दुनिया

कवियित्री राजेश जोशी की ‘ब्रह्माण्ड का नृत्य’ संग्रह की कई रचनाओं को पढ़ते हुए मैंने महसूस किया जैसे संवेदनशील लोगों में यह फैलती चली जाएँगी और हर एक तक उसको, उसकी सी बातें कहेंगी. जैसे एक जंगल में भटका हुआ बनमाली जंगली फूलों की लताओं से प्रेम करने लगा हो और लताओं से उसकी होने […]

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एक कहानी : नाम याद नहीं मुझे…

क्लास, सातवीं से आठवीं हो गई तब महसूस किया कि कुछ बदल रहा है। कपड़ों में सलवार दुपट्टे की गिनती बढ़ी। मम्मी पहले से ज्यादा चौकन्नी हो गयीं। थोड़ी दुपट्टे को लेकर मैं भी सतर्क हुई। स्कूल जाने के लिए सहेलियों का एक ग्रुप साथ हो गया। लड़कों का कोई झुण्ड देखते ही सिर झुक […]

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