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Month: October 2018

थोड़ा सा रूमानी हो जाए : #NOTYOU नाना, ME TOO

कभी किसी ने आपको I love you कहा है?… कहा ही होगा… जवाब में आपने क्या कहा था? Me Too… बस सच इतना ही है… ये इसी सुन्दर प्राकृतिक नैसर्गिक प्रेम के स्वीकार Me Too का घृणित रूप है आधुनिक बालाओं का Me Too… अब एक बात और बताइये… जब भी आप सजती संवरती थी, […]

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मोहब्बत और अदा का संगम : प्यार ये जाने कैसा है

पहाड़ से नदी का उतरना, अटखेलियों के दस्तावेज पर स्पर्श की मोहर और मोहब्बत से अदा का संगम बस यही भाव उपजते हैं, जब भी मैं इस गीत में जैकी की बाहों से उर्मिला का फिसलना, और फिर उलझकर शर्माना देखती हूँ…. रंगीला… जवानी की दहलीज़ पर कदम रखते हुए जिसने भी यह फिल्म देखी […]

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मैं और मेरी किताबें अक्सर ये बातें करते हैं : अघोरी बाबा की गीता

जीवन को अपनी पूरी उन्मुक्तता से वही इंसान जी सकता है, जो उसके रहस्यों को जानता हो या उन रहस्यों की खोज में अग्रसर हो. यूं तो ये रहस्य हमारे चारों ओर खुले पड़े हैं, लेकिन इनको समझने के लिए, शुरुआती तौर पर हम हमारे ही द्वारा इजाद की गई वस्तुओं के उपयोग में सुविधा […]

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नवरात्रि : दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, 3 देवियों के 9 शक्तिशाली दिन

नवरात्रि ईश्वरत्व के स्त्री गुण यानी – दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की कृपा से जुड़ने का एक अवसर है। ये तीन देवियाँ अस्तित्व के तीन मूल गुणों – तमस, रजस और सत्व की प्रतीक हैं। तमस का अर्थ है जड़ता। रजस का गुण सक्रियता और जोश से जुड़ा है। और सत्व गुण, ज्ञान और बोध […]

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अकथ कहानी प्रेम की

दाड़िमवा खाना खाय के जाए रे! कास के गट्ठर को बुने जा रहे छप्पर के ऊपर फैलाते हुए सुन्नर महतो ने कहा। —————————————————————————————– (दाड़िम समूचे गावं का सेवक था कहते हैं पांच साल की उम्र में भटकते हुए यहां आ गया था जाने कहाँ से, तब से यह गाँव ही दाड़िम का घर परिवार है, […]

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आज की नायिका : जानती नहीं थी माहवारी, बेचती थी सेनेटरी नैपकिन

घर में सबसे बड़ी बेटी लेकिन उम्र केवल 13 साल, पिता की बीमारी से घर की ज़िम्मेदारी उसके नाज़ुक से कन्धों पर आ गयी. काम क्या करना है जानती नहीं थी. एक परिचित ने कहा सेल्सगर्ल बन जाओ, मैं दिलवाता हूँ काम, तो वो सेल्सगर्ल बन गयी. उसके हाथों में पकड़ा दिए गए सेनेटरी नैपकिन […]

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सुई-धागा : ज़िंदगी की उधड़न पर तुरपई करती फिल्म

अनुष्का शर्मा और वरुण धवन अभिनीत फिल्म “सुई -धागा” देखी, वाकई बेहतरीन फ़िल्म है। रेडीमेड और ब्रांडेड कपड़ों के इस दौर ने किस तरह हमारे ट्रेडिशनल बुनकरों, रंगदारों और दर्जियों सहित वस्त्र उद्योग से जुड़े तमाम परिवारों को मजूबर और लाचार बना दिया है इसका एहसास होता है। एक समय था जब परिवार भर के […]

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जीवन-रेखा : पहुंचेली

रेखा, विरह का सबसे सुन्दर अधूरा गीत कहते हैं मिलन का सबसे सुन्दर और भीना गीत वही लिख सकता है जिसने विरह की सबसे तपती भूमि पर नंगे पैर चलने का अनुभव प्राप्त किया हो. लेकिन कुछ गीत ऐसे भी होते हैं, जो विरह से मिलन तक नहीं पहुँच पाते, पूरे नहीं हो पाते. रेखा […]

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रेखा जहां पर ख़त्म होती है, वहां से शुरू होते हैं अमिताभ

रेखा जन्मोत्सव की सारी सीरिज़ को जब विराम देने का दिन आया तो ये ख़याल आया, 10 अक्टूबर की रात जब रेखा अपना जन्मदिन मना चुकी होगी, तब नए सूर्योदय के साथ 11 अक्टूबर को अमिताभ अपने जन्मदिन की मुबारकें ले रहे होंगे. उनके वास्तविक जीवन में भी उनका भाग्योदय तभी हुआ जब उनकी मन […]

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नायिका -4 : जादू और शक्ति

… कुछ बताऊँ? तुम अब लगभग तैयार हो कि हम मिल सकें… लगभग पर रुकना, ध्यान देना… उन 4 या 5 दिनों के ध्यान में बैठने का बहुत बड़ा हाथ है इस तैयारी में… अब बोलो, ये अगर पहले बता देता तो? तो ये अपेक्षा जुड़ जाती और उस तरीके से ध्यान सम्पन्न न हो […]

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