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Day: September 29, 2018

चरित्रहीन – 1 : प्रेम, पीड़ा, प्रतीक्षा, परमात्मा

उसे कई बार ऐसा लगता है जैसे वह इस जन्म में जिस किसी से भी मिल रही है, वह पिछले किसी न किसी जन्म का कोई रिश्ता है… यूं तो वह हज़ारों लोगों से मिलती है, लेकिन एक दिन अचानक किसी को देखकर आँखें चमक जाती है. चेतना से कोई लहर उठती है और वह […]

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चरित्रहीन -2 : मैं ईश्वर की प्रयोगशाला हूँ

(उसके लिए भविष्यवाणी हुई है कि यह उसका अंतिम जन्म है… और इस जन्म में उसे पिछले सारे जन्मों के हिसाब पूरे करना है, चाहे वह हिसाब प्रेम का हो, नफरत का हो, अपमान का हो.. उसे पता है यदि वह किसी से प्रेम पाती है तो वह पिछले अधूरे छूटे प्रेम का पूर्ण होना […]

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चरित्रहीन – 3 : तुम्हारा प्रेम बीज है, मेरा प्रेम सुवास

पश्चिम की एक बहुत प्रसिद्ध अभिनेत्री मर्लिन मनरो ने आत्महत्या की, भरी जवानी में! और कारण? कितने प्रेमी उसे उपलब्ध थे! ऐरे-गैरे-नत्थू-खैरों से लेकर अमरीका का राष्ट्रपति कैनेडी तक, सब उसके प्रेमी! तो भी वह प्रेम से वंचित थी। प्रेमियों की भीड़ से थोड़े ही प्रेम मिल जाता है। प्रेम तो एक आत्मीयता का अनुभव […]

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चरित्रहीन – 4 : उड़ियो पंख पसार

और फिर एक दिन… स्वामी ध्यान विनय मुझसे पूछने लगे base camp का अर्थ जानती हो? मैंने कहा आप पूछ रहे हैं तो ज़रूर कोई और ही अर्थ बताने वाले होंगे… बताइये.. जब लोग पर्वतारोहण करने जाते हैं तो अपना सारा सामान नीचे base camp में ही छोड़ जाते हैं बस ज़रूरी सामान लेकर ऊपर […]

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आख़िरी बार ईश्वर से कब मिले हो?

-“भगवान को मानते हैं आप?” -“बिल्कुल मानता हूँ।” -“तो रोज मंदिर क्यों नहीं जाते?” -“मेरे भगवान वहाँ नहीं हैं।” -“अच्छा फिर आप मुस्लिम हैं। आपके भगवान जरूर मस्जिद में रहते होंगे।” -“नहीं। न मैं मुस्लिम हूँ और न मेरे भगवान मस्जिद में ही रहते हैं।” -“फिर पक्का आप क्रिश्चन हैं। आपके भगवान गिरिजाघर में रहते […]

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जिसका कोई नहीं है उसके ‘गणपति बप्पा’ हैं

गणेश चतुर्थी के त्यौहार को समग्र राष्ट्र हर्सोल्लास के साथ मना रहा है। सारे महाराष्ट्र में इस त्यौहार को मानने के लिये “गणेश मंडल” बने हुये हैं जो उत्सव से पहले धनराशि इक्कठी कर के अपने गली मोहल्ले में भव्य पंडाल लगाते हैं जिसमे गणेश चतुर्थी का भव्य आयोजन किया जाता है। पुणे में ऐसा […]

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ईश्वर के दूत : साहित्यकार आबिद सुरती और आईटी प्रोफेशनल विमल चेरांगट्टू

वे मेरी नज़र में ईश्वर के दूत हैं, जो मानव सेवा के लिए किसी मदद की प्रतीक्षा नहीं करते, ना ही ईश्वर की कृपा बरसने की राह देखते हैं, जिन्हें अपने हौसलों पर विश्वास होता है, वह अपना पहला कदम स्वयं बढ़ाते हैं. और इस पहले कदम के बढ़ने के साथ ही ईश्वर की कृपा […]

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