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Month: August 2018

माँ के जीवन से : YOU ARE MY PARLE-G

हम भारतीयों में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने अपने जीवन में Parle-G बिस्किट नहीं खाए होंगे। पारले जी के साथ और बाद बहुत सारे ब्रांड आए, लेकिन पारले जी जैसे वटवृक्ष की जड़ें न हिला सके। भारत की कुछ नामी कंपनियों में पारले जी एक ऐसा नाम है जिसका इतिहास भारत की स्वतंत्रता के […]

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मैं अपनी ही प्रेमिका हूँ

शायद 1996 या 97 की बात होगी उन दिनों टीवी पर एक डेली सोप आता था “एक महल हो सपनों का” ये टीवी सीरियल पहले गुजराती में बना फिर उसकी लोकप्रियता को देखते हुए उसका हिन्दी रीमेक भी बना। गर्मी की छुट्टियां चल रही थी, मेरा ग्रेजुएशन हो चुका था, और मैंने अपने विद्रोही लक्षण […]

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मानो या ना मानो : बिल्वा से सद्गुरु बनने की तीन जन्मों की दास्तान

करीब चार सौ साल पहले की बात है। जिला रायगढ़ (मध्य-प्रदेश) में बिल्वा नाम का एक आदमी रहता था। ऊंची कदकाठी, गठीला बदन। जिंदगी से बहुत प्यार करने वाला बिल्वा यह तो जानता ही नहीं था कि डर किसे कहते हैं। संपेरों के उस कबीले में उसकी छवि, लीक से हटकर चलने वाले एक अजीब […]

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जा वे सजना… मैं नईं करना तेरा एतबार…

पहाड़ी प्रेमाकांक्षी इकतरफ़ा होते हैं। जिनमें प्रेमी सदा समुंदर के तटीय मैदानी परदेस से आते तो हैं और प्रेमिका के दिल मे देस भी बसाते हैं फिर रुत बदलते ही रुत की ही तरह बदल जाते हैं। अपने देस याने के परदेस के हो लेते हैं। यह बात तनिक भी झूठी नहीं। न जाने कितनी […]

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धड़क-धड़क, जिया धड़क-धड़क जाए…

बादल और बारिश की आंख मिचौली में बनारस की सड़कें गीली हो चुकी हैं। भुट्टे के ठेले पर उठ चुके धुंए में और चाय के दड़बे में बैठ चुकी अंतहीन बहस में अचानक सावन उतर आया है। शाम सात बजने को है। काशी के अति व्यस्त गोदौलिया चौराहे से लक्सा रोड की तरफ बढ़ने पर […]

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द क्वीन ऑफ़ चैस!

उसका नाम रहने ही दीजिए, “क्वीन” काफ़ी नहीं? बहरहाल, उसका नाम था : गुंजन। बड़ी बड़ी काली सफ़ेद गोटियों-सी आखें, चौकोर सा कोमल मुख, आक्रामक भाव-भंगिमाएँ और ढेर सारी बातें। कुल मिला कर ठीक वैसी ही थी मानो संगमरमर के शतरंज की “क्वीन” उठ कर मानव रूप में आ गयी हो! लड़के के कॉलेज से […]

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प्रेम पत्र : तुम्हारी पीठ पर तिल है क्या?

तुम्हारी पीठ पर तिल है क्या? ठीक वैसे जैसे तुम्हारे होठों के नीचे और गले के थोड़ा ऊपर दो तिल हैँ, उस तरह का कुछ है क्या? अगर है, तो मैँ न उस तिल पर उँगलियाँ रखकर वहाँ से लिखना शुरू करना चाहता हूँ। मैँ उस तिल से शुरू करके तुम्हारे कटि तक लिख देना […]

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बनारस : एक रहस्यमय आध्यात्मिक प्रेम कहानी

कुछ दिनों पहले फिल्म बनारस का अंत देखा, कुछ आधे एक घंटे की ही फिल्म देखी, कहानी ऐसी कि हर दृश्य पर आंसू निकलते रहे, दो कारणों से। पहला, बनारस की पृष्ठभूमि पर बनी एक रहस्यमयी प्रेम कथा को फिल्म चालबाज़ के निर्देशक पंकज पराशर ने बिलकुल ही चालबाज़ स्टाइल में बनाकर फुर्सत पा ली […]

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