प्रेम पत्र : इश्क़ की दास्तान है प्यारे, अपनी-अपनी ज़बान है प्यारे

ये नहीं कि मैं बिना बात किए नहीं रह सकता. रह सकता हूँ. सिर्फ ये एहसास ही काफी होता है…

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एक थी अमृता : मेरी सेज हाज़िर है, पर जूते-कमीज़ की तरह तू अपना बदन भी उतार दे

आत्ममिलन मेरी सेज हाज़िर है पर जूते और कमीज़ की तरह तू अपना बदन भी उतार दे उधर मूढ़े पर…

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मानो या ना मानो : साक्षात माँ काली से बातें करता है वह!

आठ साल बाद हरेन्द्र फिर से मेरी ज़िंदगी में अचानक से आ गया है. दो-तीन दिन पहले मुझसे मिलने ग्वालियर…

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पैसा, प्रेम, परमात्मा : प्रचलित, प्रचलन, प्रचोदयात

जैसा कि मेरे साथ हमेशा होता है मेरा रचनात्मक संसार मेरे साथ कोई न कोई खेल खेल रहा होता है,…

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#AskAmma : इतने भयंकर Viral Infection में भी Antibiotic नहीं ली, क्यों?

ले लो मेरी अम्मा कम से कम बुखार की दवाई ले लो, तप रही हो एकदम… ध्यान बाबा, शरीर पर…

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